भारत के इतिहास में हुआ ऐसा पहली बार, जब जल्लाद ने नहीं बल्कि जेल कर्मचारियों ने दी थी फांसी

निर्भया गैंगरेप के चारों दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे एक साथ तिहाड़ की जेल नंबर-3 में एक साथ फांसी पर लटकाया जाएगा। इसके लिए यूपी के जेल विभाग की ओर से तिहाड़ में जल्लाद भेजे जाने के लिए हामी भर दी गई है। तिहाड़ जेल ने यूपी से दो जल्लाद मांगे हैं। कानपुर में रहने वाला जल्लाद बूढ़ा हो गया है, इसलिए उम्मीद है कि मेरठ वाला जल्लाद ही इन चारों को फांसी पर लटकाएगा। आधिकारिक तौर पर देश में दो ही जीवित जल्लाद हैं। दोनों यूपी के ही रहनेवाले हैं। इनमें से एक मेरठ निवासी पवन कुमार हैं, जो निर्भया के गुनाहगारों को फांसी पर लटकाएंगे। दूसरे का नाम इलियास उर्फ अली है, जो लखनऊ के रहने वाले हैं। इन दोनों के अलावा फिलहाल देश में कोई भी पेशेवर जल्लाद नहीं है। इससे पहले देश में जितनी भी फांसी हुईं वो पवन के दादा कालू जल्लाद, पिता मामू जल्लाद, पंजाब के फकीरा जल्लाद या फिर कोलकाता के नाटा जल्लाद ने दीं। इनमें से अब कोई भी जिंदा नहीं है। पवन के परिवार में चार पीढ़ियों से जल्लाद का काम होता आ रहा है। जल्लाद की पारिवारिक विरासत को निभाने वाले पवन परिवार की चौथी पीढ़ी हैं।

आपको बता दे, 14 अगस्त 2004 को कोलकाता, अलीपुर सेंट्रल जेल में एक नाबालिग स्कूली बच्ची के साथ रेप के मामले में दोषी धनंजय चटर्जी को फांसी दी गई थी। वो फांसी एक पेशेवर जल्लाद नाटा मलिक ने दी थी। 15 साल पहले हुई ये फांसी किसी जल्लाद के हाथों दी जाने वाली आखिरी फांसी थी। उसके बाद आज तक आखिरी तीन फांसी जो हुईं, उनमें किसी पेशेवर जल्लाद की मदद नहीं ली गई।

अजमल कसाब, अफजल गुरु और याकूब मेमन को जेल कर्मचारियों ने ही दी फांसी

अजमल कसाब

21 नवंबर 2012 को मुंबई हमले के गुनहगार अजमल कसाब को पुणे की यरवदा जेल में फांसी दी गई थी। आजाद हिंदुस्तान में यह पहली बार हुआ था, जब बगैर किसी पेशेवर जल्लाद के किसी को फांसी दी गई थी। दरअसल, मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब को पुणे की जेल में फांसी देने के लिए पवन जल्लाद के पिता मामू सिंह को ही मुकर्रर किया गया था। इसी दौरान मामू का निधन हो गया था।

अफजल गुरु

9 फरवरी 2013 को तिहाड़ में संसद पर हमले के गुनाहगार अफजल गुरु को फांसी पर लटकाया गया था। तिहाड़ के इतिहास में पहली बार था जब बगैर जल्लाद के किसी को फांसी दी गई। अफजल गुरु को फांसी देने के लिए फांसी के तख्ते का लिवर तिहाड़ जेल के ही एक कर्मचारी ने खींचा था।

याकूब मेमन

30 जुलाई 2015 को नागपुर की सेंट्रल जेल में 1993 के मुंबई सीरियल धमाकों के गुनहगार याकूब मेमन को फांसी दी गई थी। नागपुर सेंट्रल जेल में भी पहली बार था, जब फांसी देने के लिए किसी पेशेवर जल्लाद की जगह जेल के एक कर्मचारी ने ही लिवर खींचा था।