क्या iPhone वाकई हो रहा स्लो? Apple पर लगे गंभीर आरोप—क्या अपडेट में छिपा है मालवेयर का खेल?

Apple एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी ने अमेरिकी टेक दिग्गज पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि Apple जानबूझकर सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए iPhone में ऐसा मालवेयर भेजता है, जिससे पुराने डिवाइस की परफॉर्मेंस धीमी पड़ जाती है। इसके पीछे उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि यूजर्स मजबूरी में नया iPhone खरीदने के लिए प्रेरित हों। दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में शामिल Apple पर लगे इस आरोप का असर लाखों iPhone यूजर्स पर पड़ सकता है।

पूर्व कर्मचारी के इस दावे के बाद टेक जगत में हलचल तेज हो गई है और सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है। कहा जा रहा है कि Apple अपडेट के नाम पर पुराने फोन की स्पीड और परफॉर्मेंस को प्रभावित करने वाली कोडिंग शामिल कर सकता है, जिससे डिवाइस धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगते हैं।

पूर्व इंजीनियर का दावा

Apple के एक पूर्व सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए यह आरोप लगाया है कि जब भी कंपनी नया iPhone लॉन्च करती है, तो पुराने डिवाइस के लिए भी अपडेट जारी किए जाते हैं। उनका कहना है कि इन अपडेट्स में ऐसी तकनीक या कोड शामिल होता है, जिससे पुराने मॉडल की गति कम हो जाती है।

उनके अनुसार, जैसे ही फोन स्लो होता है, यूजर्स को नए मॉडल की ओर अपग्रेड करने की मजबूरी महसूस होने लगती है। यही वजह है कि कई लोग पुराने iPhone छोड़कर नया डिवाइस लेने लगते हैं।
पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल

यह पहली बार नहीं है जब Apple पर इस तरह के आरोप लगे हों। इससे पहले भी साल 2017 में कंपनी पर सवाल खड़े हुए थे, जब iOS 10.2.1 अपडेट जारी किया गया था। इस अपडेट के बाद iPhone 6 यूजर्स ने शिकायत की थी कि उनके फोन की बैटरी अचानक अस्थिर व्यवहार करने लगी है और वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की समस्या आने लगी है।

ध्यान देने वाली बात यह थी कि इस अपडेट के कुछ ही महीनों पहले Apple ने iPhone 7 लॉन्च किया था, जिससे संदेह और गहरा गया था।

iPhone 6 यूजर्स की शिकायतें

उस समय कई iPhone 6 यूजर्स ने दावा किया था कि उनके फोन 30% बैटरी रहने के बावजूद अचानक बंद हो जाते थे। कुछ मामलों में तो फोन बिना किसी चेतावनी के शटडाउन हो जाता था।

बढ़ते विवाद के बाद Apple ने एक नया अपडेट जारी कर समस्या को काफी हद तक ठीक किया। हालांकि इस बीच कई यूजर्स ने कंपनी पर “बैटरी थ्रॉटलिंग” और जानबूझकर परफॉर्मेंस कम करने के आरोप लगाते हुए कानूनी शिकायतें भी दर्ज कराई थीं।

बाद में Apple ने कुछ प्रभावित यूजर्स को फ्री बैटरी रिप्लेसमेंट की सुविधा भी दी थी, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

Apple की चुप्पी और बढ़ता विवाद

फिलहाल Apple ने पूर्व कर्मचारी द्वारा लगाए गए नए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और कई iPhone यूजर्स अपनी डिवाइस पर भरोसा कम होने की बात कह रहे हैं।

इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—क्या टेक कंपनियां सच में सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए डिवाइस के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं, या यह सिर्फ एक तकनीकी भ्रम है?

अपडेट के बाद फोन स्लो क्यों लगता है?

तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, सभी iPhone में लिथियम-आयन बैटरी का उपयोग किया जाता है। शुरुआती 2–3 साल तक यह बैटरी बेहतर प्रदर्शन करती है, लेकिन समय के साथ इसकी क्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है और यह लगभग 80% तक रह जाती है।

जब कोई नया सॉफ्टवेयर अपडेट आता है, तो उसमें नए फीचर्स और ज्यादा प्रोसेसिंग पावर की जरूरत होती है। ऐसे में पुरानी बैटरी उतनी ऊर्जा सपोर्ट नहीं कर पाती, जिससे फोन पर दबाव बढ़ता है और परफॉर्मेंस धीमी महसूस होने लगती है।

कई बार इसी वजह से फोन अचानक शटडाउन भी कर सकता है, जैसा कि पहले iPhone 6 केस में देखा गया था।

इसी कारण अपडेट के दौरान फोन को चार्जिंग पर रखने की सलाह दी जाती है, ताकि प्रोसेसर और बैटरी दोनों पर संतुलित लोड रहे। जब सिस्टम पर अधिक दबाव पड़ता है, तो फोन हैंग या स्लो होने लगता है, जिसे यूजर्स अक्सर “अपडेट के बाद स्लोडाउन” के रूप में महसूस करते हैं।