भारत में अगली पीढ़ी की इंटरनेट तकनीक 6G को लेकर तैयारियां अब तेजी से आगे बढ़ रही हैं। केंद्र सरकार ने स्वदेशी टेलीकॉम रिसर्च और डेवलपमेंट को मजबूत बनाने के लिए बड़ा निवेश करने की घोषणा की है। इसी दिशा में हाल ही में सरकार ने भारत 6G विजन डॉक्यूमेंट जारी किया है, जो देश में भविष्य की 6G सेवाओं के विकास और तैनाती के लिए एक विस्तृत रणनीति प्रस्तुत करता है।
केंद्रीय संचार राज्यमंत्री Pemmasani Chandra Sekhar ने राज्यसभा में इस विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि यह विजन डॉक्यूमेंट 6G तकनीक के लिए रिसर्च, इनोवेशन और अगली पीढ़ी के नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने का रोडमैप तय करता है। इसका उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर 6G तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है।
स्वदेशी रिसर्च के लिए सरकार का बड़ा निवेशराज्यसभा में दिए गए अपने बयान में Pemmasani Chandra Sekhar ने बताया कि सरकार ने स्वदेशी 6G तकनीक के अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF) योजना के तहत 104 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के लिए कुल 271 करोड़ रुपये का निवेश स्वीकृत किया गया है।
यह फंड Department of Telecommunications की पहल है, जिसका उद्देश्य भारत में विकसित होने वाली नई दूरसंचार तकनीकों को आर्थिक और संस्थागत सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत रिसर्च संस्थानों, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी डेवलपर्स को 6G से जुड़ी नई तकनीकों पर काम करने का अवसर मिलेगा।
इस फंड का उपयोग टेस्टबेड तैयार करने, नई तकनीकों के प्रयोग, इनोवेशन को बढ़ावा देने और उभरती हुई टेलीकॉम तकनीकों के विकास में किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे भारत की स्वदेशी टेलीकॉम क्षमता मजबूत होगी और देश भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेगा।
6G के लिए स्पेक्ट्रम रोडमैप भी तैयारसरकार ने 6G सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम से जुड़ी दीर्घकालिक योजना भी तैयार कर ली है। राज्यसभा में जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि भारत 6G विजन डॉक्यूमेंट में अगले दस वर्षों के लिए एक स्पष्ट स्पेक्ट्रम रोडमैप बनाया गया है।
इस योजना के तहत रिसर्च और तकनीकी परीक्षण के लिए स्पेक्ट्रम को तीन चरणों में आवंटित किया जाएगा—शॉर्ट टर्म (2025-26), मीडियम टर्म (2027-2030) और लॉन्ग टर्म (2031-2035)। इस व्यवस्था का उद्देश्य उन्नत 6G एप्लीकेशंस को विकसित करना और उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण के लिए तैयार करना है।
यह पूरा ढांचा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए अध्ययनों और मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें International Telecommunication Union जैसे वैश्विक मंचों की सिफारिशों को भी आधार बनाया गया है।
इस प्रक्रिया के तहत 6G तकनीक के लिए स्पेक्ट्रम की व्यवहार्यता, नई एंटीना तकनीक, नेटवर्क आर्किटेक्चर और भविष्य के IMT सिस्टम से जुड़ी तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। फरवरी 2026 तक TTDF के तहत 104 परियोजनाओं के लिए कुल 271 करोड़ रुपये की मंजूरी दी जा चुकी है।
भारत जल्द लॉन्च कर सकता है 6G सेवाहाल ही में आयोजित Mobile World Congress के दौरान केंद्रीय संचार मंत्री Jyotiraditya Scindia ने भी 6G तकनीक को लेकर भारत की प्रगति का उल्लेख किया था। उन्होंने कहा कि भारत उन देशों में शामिल होने की दिशा में काम कर रहा है, जो दुनिया में सबसे पहले 6G सेवाओं को लॉन्च करेंगे।
इससे पहले पीएम मोदी ने भी इंडिया मोबाइल कांग्रेस के दौरान कहा था कि भारत में वर्ष 2030 तक 6G सेवाओं को शुरू करने की योजना पर काम चल रहा है।
टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों और रिसर्च रिपोर्ट्स के अनुसार 6G तकनीक आने के बाद इंटरनेट की गति मौजूदा 5G नेटवर्क के मुकाबले लगभग 10 गुना अधिक तेज हो सकती है। इससे अल्ट्रा-फास्ट कनेक्टिविटी, स्मार्ट सिटीज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नेटवर्क और उन्नत डिजिटल सेवाओं के नए अवसर खुलेंगे।