बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई से किया इनकार, 6 अक्टूबर के उपचुनाव से पहले 37 लाख से ज्यादा अपीलें लंबित

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। 28 सितंबर को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव का हवाला देते हुए सुनवाई को पहले करने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत ने कहा कि मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं।

उपचुनाव से पहले सुनवाई की मांग क्यों की गई?

मामले में याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई जल्द करने का अनुरोध किया था। उनका कहना था कि मामला पहले 29 सितंबर के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन अब इसे 5 अक्टूबर को सुनवाई के लिए दिखाया जा रहा है। उन्होंने नंदीग्राम और रेजीनगर के उन मतदाताओं का मुद्दा उठाया, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के खिलाफ अपीलें लंबित हैं।

वकील ने अदालत को बताया कि इन मतदाताओं को पहले ही एक चुनाव में मतदान का अवसर नहीं मिला और यदि उनकी अपीलों पर समय रहते फैसला नहीं हुआ तो 6 अक्टूबर के उपचुनाव में भी वे मतदान नहीं कर पाएंगे। अदालत से इसी आधार पर मामले को जल्द सुनने का आग्रह किया गया था।

वकील ने यह भी बताया कि 18,000 से अधिक अपीलें अभी लंबित हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की और कहा, ये केवल उपचुनाव हैं। इसके बाद पीठ ने मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर को ही रखने की बात कही।

SIR से जुड़ी 38 लाख से ज्यादा अपीलें

चुनाव आयोग की ओर से 16 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में SIR के बाद अपीलों की बड़ी संख्या का ब्योरा दिया गया था। आयोग के मुताबिक, कुल 38,31,429 अपीलें अपीलीय न्यायाधिकरणों के सामने दाखिल हुई थीं। इनमें से 1,26,194 अपीलों का निपटारा हो चुका था, जबकि 37,05,235 मामले अभी लंबित थे।

आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 22,21,118 अपीलें उन मतदाताओं से जुड़ी थीं जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए या बाहर किए गए थे। वहीं 16,10,311 अपीलें मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने वाली थीं।

चुनाव आयोग ने इन मामलों के तेजी से निपटारे के लिए अपीलीय न्यायाधिकरणों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा है। आयोग के मुताबिक, ज्यादा न्यायाधिकरणों के जरिए लंबित मामलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज की जा सकती है।
नंदीग्राम और रेजीनगर में कितनी अपीलें?

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, नंदीग्राम से 6,443 अपीलें दाखिल हुई थीं। इनमें अब तक 89 नाम मतदाता सूची में बहाल किए गए हैं। रेजीनगर में 12,452 अपीलें दाखिल की गई थीं और इनमें से अब तक 4 नाम मतदाता सूची में बहाल किए गए हैं।

इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। ऐसे में लंबित अपीलों को लेकर जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 5 अक्टूबर को ही रखने का निर्देश दिया है।

31 विधानसभा सीटों के नतीजों को रद्द करने की मांग का भी मामला

SIR से जुड़ा विवाद केवल लंबित अपीलों तक सीमित नहीं है। तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ'ब्रायन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल आवेदन के जवाब में चुनाव आयोग ने 31 विधानसभा सीटों के चुनाव परिणामों को रद्द करने की मांग पर भी अपना पक्ष रखा है।

ओ'ब्रायन की ओर से तर्क दिया गया था कि इन सीटों पर मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ लंबित अपीलों की संख्या संबंधित सीटों पर TMC उम्मीदवारों की हार के अंतर से अधिक है। इसी आधार पर चुनाव परिणामों को रद्द करने और नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की गई थी।

चुनाव आयोग ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों में Absentee, Shifted, Dead and Duplicate (ASDD) श्रेणी के मतदाता भी शामिल हैं। आयोग ने आरोप लगाया कि सभी प्रकार के नाम हटाए जाने को एक साथ जोड़कर तस्वीर पेश की गई है।

TMC के नाम और चुनाव चिह्न पर भी सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

इसी बीच, तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में भी सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को निर्वाचन आयोग के लिए समयसीमा तय की। अदालत ने दोनों गुटों को आयोग के सामने अपनी दलीलें और दस्तावेज दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर विवाद पर फैसला करने का निर्देश दिया गया है। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए प्रभावी रूप से चार महीने की समयसीमा तय हुई है।

यह मामला ममता बनर्जी की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने निर्वाचन आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत विवाद का अंतिम निपटारा होने तक तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके 'जोड़ाफूल' चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई थी। आयोग के सामने दोनों गुट अपने-अपने दावे रख रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक पहले दोनों पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपनी दलीलें पूरी करनी होंगी। इसके बाद निर्वाचन आयोग को तीन महीने में इस विवाद पर निर्णय लेना होगा।

इस बीच पश्चिम बंगाल SIR से जुड़ी लंबित अपीलों पर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी, जबकि नंदीग्राम और रेजीनगर में उपचुनाव 6 अक्टूबर को निर्धारित हैं।