कोलकाता। 21 जुलाई को आयोजित होने वाले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पारंपरिक 'शहीद दिवस' कार्यक्रम को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कोलकाता पुलिस द्वारा मध्य कोलकाता के निर्धारित स्थल पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद टीएमसी ने इस फैसले को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि वे इस मुद्दे को न्यायिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर उठाएंगे।
दरअसल, मंगलवार को कोलकाता पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष एस्प्लेनेड क्रॉसिंग के निकट स्थित सीईएससी हाउस के सामने टीएमसी को 'शहीद दिवस' रैली आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस ने इस क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू कर दी है। इस प्रावधान के तहत एक निश्चित सीमा से अधिक लोगों के एक स्थान पर एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया जाता है, जिससे कानून-व्यवस्था बनाए रखी जा सके।
टीएमसी ने फैसले को बताया गैर-कानूनीपुलिस के निर्णय के बाद तृणमूल कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। हालांकि पार्टी से अलग हो चुके नेताओं की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे इस आदेश को अदालत में चुनौती देंगे।
टीएमसी के वरिष्ठ नेता, चार बार के लोकसभा सांसद और अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि पूरे इलाके में दो महीने के लिए बीएनएसएस की धारा 163 लागू करना कानून की भावना के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार, इस तरह का आदेश लोकतांत्रिक गतिविधियों और शांतिपूर्ण जनसभाओं के अधिकार को सीमित करता है।
अदालत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जताया भरोसाकल्याण बनर्जी ने कहा कि पार्टी इस आदेश के खिलाफ जल्द ही कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर करेगी। उन्होंने कहा कि टीएमसी इस फैसले का कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर विरोध करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों के शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र होने और अपनी बात रखने के अधिकार को इस प्रकार प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए उम्मीद व्यक्त की कि अदालत इस मामले में उचित निर्णय देगी।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी पुलिस के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि न्यायपालिका राज्य प्रशासन के इस फैसले की समीक्षा करेगी और यदि कहीं लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ है तो उसका उचित समाधान निकालेगी।
1993 की घटना की स्मृति में आयोजित होता है कार्यक्रमतृणमूल कांग्रेस पिछले कई वर्षों से हर वर्ष 21 जुलाई को सीईएससी हाउस के सामने 'शहीद दिवस' रैली आयोजित करती रही है। यह कार्यक्रम वर्ष 1993 में हुई उस घटना की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जिसमें कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी। शुरुआत में इस आयोजन का नेतृत्व कांग्रेस करती थी।
बाद में वर्ष 1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन किया। इसके बाद से 21 जुलाई का यह कार्यक्रम टीएमसी की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक रैलियों में शामिल हो गया। हर वर्ष बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक इस आयोजन में हिस्सा लेते हैं। ऐसे में इस बार कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए प्रतिबंध ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।