बिहार के बाद यूपी में भी बढ़ा सियासी तनाव, SIR को लेकर कांग्रेस-सपा ने कसा शिकंजा, कहा—'इस बार नहीं होने देंगे गड़बड़ी'

बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है। जैसे-जैसे मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य शुरू हो रहा है, वैसे-वैसे आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस बार किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए मोर्चा संभाल लिया है। वहीं, चुनाव आयोग ने भी जिला और निर्वाचन अधिकारियों को निष्पक्षता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।

विपक्ष ने कसी कमर, मतदाता सूची पर रखेंगे पैनी नजर

कांग्रेस और सपा दोनों ही पार्टियां मतदाता सूची में हेरफेर की संभावना को लेकर मुखर हैं। दोनों दलों ने घोषणा की है कि वे हर बीएलओ (BLO) के साथ अपने एजेंट तैनात करेंगे ताकि सूची में कोई गड़बड़ी न हो। विधानसभावार निगरानी समितियां भी गठित की जा रही हैं। विपक्ष का दावा है कि वे सरकारी साजिश को नाकाम करेंगे और हर एक वोट की निगरानी करेंगे ताकि किसी मतदाता का नाम जानबूझकर न हटाया जाए।

2003 के बाद फिर से चर्चा में आया एसआईआर

गौरतलब है कि पिछली बार विशेष सघन पुनरीक्षण वर्ष 2003 में किया गया था। अब लगभग दो दशक बाद इसे लेकर फिर से सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। खासकर उन जिलों में जहां सत्ताधारी दल का वर्चस्व है, वहां विपक्ष इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम प्रक्रिया मान रहा है।

क्या है विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR)?

एसआईआर दरअसल सालभर चलने वाले संक्षिप्त पुनरीक्षण से आगे की प्रक्रिया है। इसके तहत बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी इकट्ठा करेंगे और हर मतदाता से तीन बार संपर्क किया जाएगा। जो मतदाता घर पर मौजूद न हों, वे ऑनलाइन माध्यम से अपने विवरण अपडेट कर सकेंगे।

इस बार निर्वाचन अधिकारी 27 अक्टूबर 2025 की सूची के अनुसार यूनिक एन्यूमरेशन फार्म तैयार करेंगे, जिसमें मतदाता की सभी जरूरी जानकारी होगी। बीएलओ इन फॉर्मों को मतदाताओं तक पहुंचाएंगे और पुराने रिकार्ड (2002–2004) से तुलना कर सुधार करेंगे।

आधार कार्ड से हटेंगे डुप्लीकेट नाम

इस बार की पुनरीक्षण प्रक्रिया में आधार कार्ड लिंकिंग को भी शामिल किया गया है। इससे एक व्यक्ति का नाम दो बार दर्ज होने की संभावना खत्म होगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे मतदाता सूची अधिक सटीक और पारदर्शी बनेगी तथा शिकायतों की संख्या भी घटेगी।

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

भाजपा – “गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं”

भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने कहा कि एसआईआर से “शुद्ध मतदाता सूची” तैयार होगी। आधार लिंकिंग के कारण डुप्लीकेट नाम हट जाएंगे और पारदर्शिता बढ़ेगी। भाजपा इस अभियान का समर्थन करती है और जल्द ही रणनीति पर बैठक करेगी।

कांग्रेस – “प्रारूप हिंदी में जारी हो”

कांग्रेस जिलाध्यक्ष विक्रम पांडेय ने कहा कि पहले भी सरकारी दबाव में सूची में गड़बड़ियां हुई हैं, लेकिन इस बार पार्टी सतर्क है। उन्होंने मांग की कि आयोग द्वारा जारी किए गए फॉर्म अंग्रेजी की बजाय हिंदी में उपलब्ध कराए जाएं ताकि ग्रामीण मतदाता आसानी से समझ सकें।

सपा – “हर बीएलओ के साथ होगा हमारा बीएलए”

समाजवादी पार्टी जिलाध्यक्ष शराफत अली ने बताया कि पार्टी बूथ-लेवल एजेंट (BLA) और पोलिंग प्रभारी तैनात कर रही है। उनका कहना है कि किसी भी कीमत पर एसआईआर में गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी और शीर्ष नेतृत्व के निर्देशानुसार रणनीति तैयार की जाएगी।

बसपा – “हर वोट वापस सूची में जोड़ेंगे”

बसपा जिलाध्यक्ष सुरेश चौधरी ने कहा कि यह एक सराहनीय अभियान है। इससे वे मतदाता जिनके नाम पहले हट गए थे, फिर से जोड़े जा सकेंगे। बसपा पूरी तैयारी के साथ काम करेगी ताकि पार्टी का हर समर्थक सूची में दर्ज रहे।

जिले के मतदाताओं का विवरण


विधानसभा क्षेत्र - मतदाता - अनुमानित जनसंख्या
सवाजयपुर - 4,17,289 - 7,13,411
शाहाबाद - 3,68,181 - 6,10,822
हरदोई - 4,24,204 - 7,12,013
गोपामऊ - 3,55,010 - 6,17,365
सांडी - 3,42,928 - 5,56,788
बिलग्राम-मल्लावां - 3,96,009 - 6,66,181
बालामऊ - 3,58,808 - 5,65,949
संडीला - 3,52,994 - 6,59,597

मतदाता सूची देखने का तरीका

भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट https://voters.eci.gov.in पर जाकर मतदाता अपना नाम ऑनलाइन खोज सकते हैं।

निर्वाचन विभाग के अनुसार,

28 अक्टूबर से 3 नवंबर तक तैयारी, प्रशिक्षण और प्रिंटिंग का कार्य चलेगा।

4 नवंबर से 4 दिसंबर तक घर-घर सर्वेक्षण और फॉर्म वितरण होगा।

5 से 8 दिसंबर के बीच प्रारूप निर्वाचक नामावली तैयार की जाएगी।

9 दिसंबर 2025 को प्रारूप सूची का प्रकाशन किया जाएगा।