उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी 33 सीटों पर सफल रही थी। शेष सीटें कांग्रेस और अन्य दलों के खाते में गई थीं। अब जब इन नतीजों को जिला-वार मतदाता सूची कटौती के आंकड़ों के साथ मिलाकर देखा जा रहा है, तो एक दिलचस्प और जटिल तस्वीर उभरकर सामने आ रही है। साफ तौर पर दिख रहा है कि जिन इलाकों में दोनों प्रमुख दलों ने जीत हासिल की थी, वहां वोटर लिस्ट से नाम हटने की दर में बड़ा फर्क है। यही वजह है कि आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर नई सियासी बहस शुरू हो गई है।
समाजवादी पार्टी के पक्ष में गई लोकसभा सीटों वाले जिलों में मतदाता सूची से नाम कटने का औसत आंकड़ा आमतौर पर 15 से 25 प्रतिशत के बीच रहा। हालांकि कुछ जिलों में यह दर इससे ऊपर या नीचे भी देखने को मिली। उदाहरण के तौर पर कन्नौज लोकसभा सीट में 21.57 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटे, जबकि मैनपुरी में यह आंकड़ा 16.17 प्रतिशत रहा। कैराना सीट से जुड़े शामली जिले में 16.75 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर में 16.29 प्रतिशत और मुरादाबाद में 15.76 प्रतिशत नाम सूची से बाहर हुए। रामपुर में 18.29 प्रतिशत, संभल में 20.29 प्रतिशत, फिरोजाबाद में 18.13 प्रतिशत, एटा में 16.80 प्रतिशत और बदायूं में 20.39 प्रतिशत मतदाता कटौती के दायरे में आए।
आंवला लोकसभा सीट से जुड़े बरेली जिले में 20.99 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटाए गए। खीरी जिले की खीरी और धौरहरा—दोनों सीटों पर 17.50 प्रतिशत की समान कटौती दर्ज की गई। मोहनलालगंज सीट वाले लखनऊ जिले में स्थिति सबसे चौंकाने वाली रही, जहां करीब 30.04 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटे, जो इस पूरे आंकड़े में सबसे ऊंचे स्तर पर माना जा रहा है।
इसके अलावा सुल्तानपुर में 17.19 प्रतिशत, प्रतापगढ़ में 19.81 प्रतिशत, इटावा में 18.95 प्रतिशत, जालौन में 16.34 प्रतिशत, हमीरपुर में 10.78 प्रतिशत और बांदा में करीब 13 प्रतिशत वोटरों के नाम कटे। फतेहपुर में 16.32 प्रतिशत, कौशाम्बी में 18 प्रतिशत, अयोध्या (फैजाबाद) में 17.69 प्रतिशत, अंबेडकर नगर में 13.82 प्रतिशत, श्रावस्ती में 16.51 प्रतिशत, बस्ती में 15.70 प्रतिशत और संत कबीर नगर में 19.96 प्रतिशत नाम हटाए गए। आजमगढ़ जिले की लालगंज और आजमगढ़—दोनों सीटों पर 15.25 प्रतिशत की कटौती हुई। घोसी (मऊ) में 17.52 प्रतिशत, सलेमपुर से जुड़े देवरिया में 17.22 प्रतिशत, बलिया में 18.16 प्रतिशत, जौनपुर और मछलीशहर में 16.51 प्रतिशत, गाजीपुर में 13.85 प्रतिशत, चंदौली में 15.45 प्रतिशत और रॉबर्ट्सगंज सीट वाले सोनभद्र में 17.93 प्रतिशत मतदाताओं के नाम हटे।
बीजेपी के कब्जे वाली लोकसभा सीटों के जिलों में तस्वीर कुछ अलग नजर आती है। यहां मतदाता सूची से नाम कटने का प्रतिशत कई स्थानों पर ज्यादा दिखाई देता है और कई जिलों में यह 20 से 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अमरोहा में 13.22 प्रतिशत, मेरठ में 24.65 प्रतिशत, गाजियाबाद में 28.83 प्रतिशत और गौतमबुद्ध नगर में 23.98 प्रतिशत नाम हटे। बुलंदशहर में 15.14 प्रतिशत और बरेली में 20.99 प्रतिशत की कटौती दर्ज की गई। हाथरस में 16.30 प्रतिशत, मथुरा में 19.19 प्रतिशत, हापुड़ में 22.30 प्रतिशत और शाहजहांपुर में 21.76 प्रतिशत मतदाता सूची से बाहर हुए।
इसके अलावा कन्नौज में 21.57 प्रतिशत, फर्रुखाबाद में 20.80 प्रतिशत, बहराइच में 20.44 प्रतिशत और बदायूं में 20.39 प्रतिशत नाम कटे। कानपुर नगर में 25.50 प्रतिशत, आगरा में 23.25 प्रतिशत, वाराणसी में 18.18 प्रतिशत और लखनऊ में 30.04 प्रतिशत की भारी कटौती दर्ज की गई। पीलीभीत में 13.61 प्रतिशत, हरदोई में 18.04 प्रतिशत, कौशाम्बी में 18 प्रतिशत, एटा में 16.80 प्रतिशत, अलीगढ़ में 18.60 प्रतिशत, उन्नाव में 17.51 प्रतिशत और झांसी में 13.92 प्रतिशत मतदाता सूची से हटाए गए।
प्रयागराज (फूलपुर) में 24.64 प्रतिशत, कैसरगंज सीट से जुड़े बहराइच जिले में 20.44 प्रतिशत, गोंडा में 18.40 प्रतिशत, सिद्धार्थनगर (डुमरियागंज) में 20.33 प्रतिशत, महराजगंज में 15.11 प्रतिशत, गोरखपुर में 17.61 प्रतिशत, कुशीनगर में 18.65 प्रतिशत, देवरिया में 17.22 प्रतिशत, बांसगांव (गोरखपुर जिला) में 17.61 प्रतिशत और भदोही में 16.73 प्रतिशत नाम कटौती के आंकड़े सामने आए हैं।