उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी को राजनीतिक झटका लगा है। सपा के तीन विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों में अयोध्या जिले की गोसाईगंज सीट से अभय सिंह, अमेठी की गौरीगंज सीट से राकेश प्रताप सिंह और जालौन जिले की कालपी सीट से विनोद चतुर्वेदी शामिल हैं। तीनों नेताओं को उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पार्टी का पटका पहनाकर औपचारिक रूप से सदस्यता दिलाई। इस मौके पर भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी के साथ करीब डेढ़ दर्जन मंत्री, विधायक और सांसद मंच पर मौजूद रहे। तीनों विधायकों के पार्टी बदलने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव से पहले नए समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इन नेताओं के भाजपा में आने से चुनावी नतीजों पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।
विनोद चतुर्वेदी ने बताई सपा छोड़ने की वजहभाजपा में शामिल होने के बाद कालपी के विधायक विनोद चतुर्वेदी ने अपने राजनीतिक सफर और पार्टी बदलने के फैसले पर बात रखी। उन्होंने कहा कि वह वर्ष 1982 से राजनीति में सक्रिय हैं और उनके मुताबिक, जो काम पहले कभी नहीं हुए, वे भाजपा के शासन में हो रहे हैं। विनोद चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज की तारीफ करते हुए कहा कि बुंदेलखंड को पिछले 70 वर्षों में जो सुविधाएं नहीं मिलीं, वे अब मिल रही हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के काम से प्रभावित होने के साथ-साथ समाजवादी पार्टी की विचारधारा से आहत होकर उन्होंने भाजपा की सदस्यता लेने का फैसला किया।
बुंदेलखंड में औद्योगिक विकास का भी किया जिक्रविनोद चतुर्वेदी ने अपने बयान में झांसी में औद्योगिक विकास से जुड़ी पहल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा की तर्ज पर झांसी में PIDA की रचना की है। उनके मुताबिक, औद्योगिक क्षेत्र के लिए 66 हजार जमीन आरक्षित की गई है।
विधायक ने भाजपा नेतृत्व के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि पार्टी नेतृत्व की ओर से उन्हें जो भी आदेश मिलेगा, उसका पालन करेंगे। उनके बयान में भाजपा सरकार के विकास कार्यों के प्रति समर्थन और सपा से वैचारिक असहमति को पार्टी बदलने के प्रमुख कारणों के रूप में पेश किया गया।
अभय सिंह ने राम मंदिर और सनातन से जुड़े मुद्दे उठाएगोसाईगंज के विधायक अभय सिंह ने समाजवादी पार्टी छोड़ने के फैसले के पीछे धार्मिक और वैचारिक मुद्दों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि भगवान राम और सनातन से जुड़े मामलों पर पार्टी के रुख से वह और उनके साथी आहत हुए। अभय सिंह ने आरोप लगाया कि रामचरितमानस को जलाने और फाड़ने जैसी घटनाओं के बाद अखिलेश यादव ने जिस तरह की प्रतिक्रिया दी, उससे उनकी नाराजगी बढ़ी। उनके मुताबिक, इन मुद्दों पर सपा नेतृत्व की ओर से अपेक्षित कदम नहीं उठाए जाने के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया।
प्रदर्शन और विदेशी फंडिंग को लेकर भी जताई नाराजगीअभय सिंह ने दिल्ली में चल रहे आंदोलन का जिक्र करते हुए भी अपनी आपत्ति जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रविरोधी ताकतों के साथ मिलकर विदेशी फंडिंग के जरिए प्रदर्शन किए जा रहे हैं। अभय सिंह ने कहा कि ऐसी गतिविधियों को देखकर वह और उनके साथी आहत हुए। उन्होंने अपने पिछले कार्यकाल का जिक्र करते हुए बताया कि वह 2012 से 2017 तक लगातार विधायक रहे। उस दौर में टीजीटी, पीजीटी और सिपाही भर्ती का उल्लेख करते हुए उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में घोटालों का आरोप लगाया। अभय सिंह के अनुसार, उस समय एक क्षेत्र और एक विशेष जाति के लोगों की भर्ती किए जाने की स्थिति बनी थी। ये आरोप अभय सिंह ने सपा छोड़ने के कारणों को स्पष्ट करते हुए लगाए हैं। संदर्भ सामग्री में इन आरोपों पर समाजवादी पार्टी या अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
तीन विधायकों के भाजपा में आने से चुनावी समीकरण पर नजरराकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी के भाजपा में शामिल होने के साथ ही उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले दल-बदल की यह घटना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। तीनों विधायकों ने अलग-अलग कारण बताते हुए सपा से दूरी बनाने का फैसला किया है।
विनोद चतुर्वेदी ने भाजपा सरकार के विकास कार्यों और बुंदेलखंड में औद्योगिक पहल की तारीफ की, जबकि अभय सिंह ने रामचरितमानस, सनातन और दिल्ली में चल रहे आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर अपनी नाराजगी जाहिर की। राकेश प्रताप सिंह के भाजपा में शामिल होने की जानकारी तो सामने आई है, लेकिन संदर्भ सामग्री में उनके फैसले की वजह या इस पर उनका बयान नहीं दिया गया है। अब इन तीनों विधायकों के भाजपा में आने का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के राजनीतिक समीकरणों पर कितना प्रभाव पड़ेगा, इस पर नजर रहेगी।