स्मृति ईरानी बनेंगी राज्यसभा सांसद? यूपी में BJP के उम्मीदवारों को लेकर हलचल

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर उम्मीदवारों के नाम पर मंथन तेज हो गया है। इन सीटों के लिए 16 अक्टूबर को मतदान होना है और भाजपा के सामने मौजूदा सांसदों को दोबारा मौका देने के साथ नए चेहरों को मैदान में उतारने का विकल्प है। संभावित नामों में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और भाजपा नेता हरीश द्विवेदी भी शामिल हैं। हालांकि, अभी भाजपा ने उम्मीदवारों की आधिकारिक सूची जारी नहीं की है।

स्मृति ईरानी के नाम की चर्चा क्यों तेज हुई

अमेठी से 2024 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद स्मृति ईरानी की सक्रिय राजनीतिक भूमिका जारी है। हाल में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है और पार्टी ने उन्हें हरियाणा तथा छत्तीसगढ़ का प्रभार भी दिया है। अब उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेजे जाने की संभावनाओं को लेकर उनके नाम की चर्चा सामने आई है।

हालांकि, स्मृति ईरानी की उम्मीदवारी अभी तय नहीं है। भाजपा की ओर से अंतिम फैसला उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा के साथ ही स्पष्ट होगा। मौजूदा चर्चा में उन्हें संभावित नए चेहरों में गिना जा रहा है।

हरीश द्विवेदी का नाम भी चर्चा में

भाजपा के राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारियों में सक्रिय हरीश द्विवेदी का नाम भी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के संभावित उम्मीदवारों में शामिल बताया जा रहा है। उन्हें पार्टी में प्रमुख ब्राह्मण चेहरे के तौर पर देखा जाता है और हाल के संगठनात्मक बदलावों के बाद उनकी भूमिका भी चर्चा में है।

इसके अलावा पार्टी मौजूदा राज्यसभा सदस्यों में से किन नेताओं को दोबारा मौका देगी और किन सीटों पर नए चेहरों को उतारेगी, इस पर भी विचार कर रही है। रिपोर्टों के मुताबिक भाजपा की संभावित आठ सीटों में कई नए चेहरों को जगह मिल सकती है।

कई मौजूदा सांसदों का कार्यकाल हो रहा खत्म

उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों में से आठ फिलहाल भाजपा के पास हैं, जबकि एक-एक सीट समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के पास है। इनमें भाजपा के जिन मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, उनमें अरुण सिंह, गीता शाक्य, नीरज शेखर, बृजलाल, बीएल वर्मा, सीमा द्विवेदी और केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी शामिल हैं। इसके अलावा डॉ. दिनेश शर्मा के अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल नियुक्त होने के बाद उनकी सीट पहले ही खाली हो चुकी है।

ऐसे में भाजपा के सामने मौजूदा चेहरों को दोबारा राज्यसभा भेजने और संगठन में सक्रिय नए नेताओं को उच्च सदन में लाने के बीच चयन का सवाल है। बीएल वर्मा, बृजलाल, नीरज शेखर और अरुण सिंह समेत कई मौजूदा या पूर्व संगठनात्मक नेताओं के नाम भी संभावित दावेदारों में चर्चा में हैं।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण पर भी नजर

राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में भाजपा सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण को भी ध्यान में रख रही है। गीता शाक्य और सीमा द्विवेदी को दोबारा मौका देने के बजाय नए चेहरों को उतारने की संभावना पर भी चर्चा है। ओबीसी और दलित वर्ग से जुड़े नेताओं के नाम भी संभावित दावेदारों में बताए जा रहे हैं।

रिपोर्टों में ममतेश शाक्य, प्रकाश पाल और विद्यासागर जैसे नामों की चर्चा का भी उल्लेख है। हालांकि, इन नामों पर अंतिम निर्णय भाजपा के स्तर पर होना बाकी है। पार्टी के लिए उम्मीदवारों का चयन संगठनात्मक समीकरण के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की आगामी विधानसभा राजनीति को ध्यान में रखते हुए किए जाने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है।

29 सितंबर से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश की इन 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित हो चुका है। 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होने के साथ नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके बाद 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना होगी।

विधानसभा के आंकड़ों से तय होगा सीटों का गणित

राज्यसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश विधानसभा का मौजूदा संख्याबल महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास विधानसभा में पर्याप्त संख्या है, जबकि समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्ष के पास भी दो सीटों के लिए आवश्यक समर्थन जुटाने की स्थिति बताई जा रही है। विभिन्न रिपोर्टों में भाजपा के आठ और सपा के दो सीटें हासिल करने की संभावना का उल्लेख किया गया है, हालांकि अंतिम नतीजे मतदान और चुनावी समीकरण पर निर्भर करेंगे।

इन चुनावों के बाद बसपा के राज्यसभा में प्रतिनिधित्व पर भी असर पड़ सकता है। मौजूदा बसपा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल समाप्त हो रहा है और पार्टी के पास उत्तर प्रदेश विधानसभा में कोई विधायक नहीं है। ऐसे में राज्यसभा में उसका प्रतिनिधित्व बनाए रखना उसके लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति है।

भाजपा की ओर से अभी अंतिम उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किए गए हैं। इसलिए स्मृति ईरानी, हरीश द्विवेदी, मौजूदा राज्यसभा सदस्यों और अन्य संभावित दावेदारों में से किसे टिकट मिलता है, यह पार्टी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।