उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर चल रही अटकलों के बीच कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने स्थिति साफ करते हुए कहा है कि चुनाव अपने निर्धारित समय पर ही कराए जाएंगे। बुधवार को आजमगढ़ दौरे के दौरान उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार दोनों मिलकर पूरी गंभीरता से तैयारियों में जुटे हुए हैं। उनके मुताबिक, चुनावी मतपत्रों की छपाई का काम पूरा हो चुका है और उन्हें जिलों के मुख्यालयों तक पहुंचाया जा रहा है, जबकि मतदाता सूची भी अब अंतिम चरण में है।
राजभर ने विपक्ष की ओर से फैलाए जा रहे भ्रम और चुनाव टलने की आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी तक मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया जाएगा और इसके बाद चुनावी प्रक्रिया को लेकर कोई बाधा नहीं रहेगी। मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी निभा रही है और समयबद्ध तरीके से सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
बोर्ड परीक्षाओं या जनगणना के कारण पंचायत चुनाव टलने की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए ओम प्रकाश राजभर ने इन्हें महज अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी चर्चाओं का कोई आधार नहीं है और न ही फिलहाल चुनाव स्थगित करने का कोई प्रस्ताव है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार दोनों ही समय पर चुनाव कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। एसआईआर से जुड़े कार्यों का जिक्र करते हुए राजभर ने कहा कि 6 मार्च तक इससे संबंधित अंतिम प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी, लेकिन कम समय में फैली अफवाहों से लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। बावजूद इसके, अधिकारी और कर्मचारी पूरी निष्ठा से अपने काम में लगे हुए हैं।
पिछड़े वर्गों और दलितों के आरक्षण को लेकर उठ रहे सवालों पर भी कैबिनेट मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार आयोग का गठन किया जा रहा है और संवैधानिक प्रावधानों के तहत आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। राजभर ने कहा कि पंचायत चुनाव तय समय पर होंगे और “सबका साथ, सबका विकास” के सिद्धांत के अनुरूप हर वर्ग को उसकी उचित भागीदारी दी जाएगी।
पंचायत चुनावों को लेकर ओम प्रकाश राजभर खुद भी लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। वे पूर्वांचल के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं और अपने कार्यकर्ताओं व समर्थकों से चुनावी तैयारियों में जुटने का आह्वान कर रहे हैं। इससे पहले भी वे कई बार दोहरा चुके हैं कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे। जिला मुख्यालयों तक मतपत्रों की आपूर्ति को उन्होंने अपने दावों का ठोस प्रमाण बताया, जिससे यह संकेत मिलता है कि राज्य में चुनावी मशीनरी पूरी तरह से हरकत में आ चुकी है।