राजस्थान और मध्य प्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत की घटनाओं के बाद उत्तर प्रदेश सरकार सतर्क हो गई है। राज्य में बिकने वाले विभिन्न ब्रांडों के कफ सिरप की गुणवत्ता जांचने के लिए व्यापक अभियान शुरू कर दिया गया है। बुधवार तक कुल 359 कफ सिरप के नमूने एकत्र कर विभिन्न सरकारी प्रयोगशालाओं में भेजे जा चुके हैं। अब औषधि प्रशासन विभाग ने प्रदेश की सभी कफ सिरप निर्माण इकाइयों पर अचानक छापेमारी के आदेश जारी किए हैं।
औषधि निरीक्षकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे राज्यभर में सक्रिय दवा निर्माण कंपनियों का दौरा करें और मौके पर जाकर नमूने लेकर जांच के लिए भेजें। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई न केवल बाजार में बिक रहे सिरप तक सीमित रहेगी, बल्कि निर्माण प्रक्रिया और रॉ मटेरियल की भी बारीकी से जांच की जाएगी।
राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) ने कफ सिरप की जांच को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में रखा है। ड्रग कंट्रोलर एस. एम. गुप्ता ने बताया कि अब तक भेजे गए 359 नमूनों की रिपोर्ट अगले 10 दिनों के भीतर आने की संभावना है। साथ ही, यूपी में मौजूद करीब 25 फार्मा कंपनियों में छापेमारी की योजना तैयार की गई है, ताकि संदिग्ध दवाओं की पहचान की जा सके।
गुप्ता ने बताया कि इस बार जांच का विशेष फोकस प्रोपाइलीन ग्लाइकोल नामक रसायन पर रहेगा। माना जा रहा है कि यही रसायन बच्चों की मौत की वजह बना था, क्योंकि इसका उपयोग अगर शुद्ध रूप में न हो तो यह शरीर में ज़हर जैसा असर कर सकता है। प्रयोगशालाओं को निर्देश दिया गया है कि वे सिरप के हर बैच में इस तत्व की उपस्थिति और गुणवत्ता की गहन जांच करें।
ड्रग कंट्रोलर ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक की जांच में कोल्ड्रिफ सिरप की बिक्री या वितरण का कोई सबूत यूपी में नहीं मिला है। राज्य के थोक और खुदरा बाजारों में इस सिरप की उपलब्धता नहीं पाई गई। हालांकि, सतर्कता के तहत लगभग 50 से अधिक ब्रांडों के कफ सिरप के नमूने जांच के लिए लिए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि कफ सिरप बच्चों और बुजुर्गों में सबसे अधिक उपयोग होने वाली दवा है। किसी भी तरह की मिलावट या गलत रसायन मिलाने से गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं। विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य आम जनता की सुरक्षा और दवाओं की गुणवत्ता पर भरोसा बनाए रखना है।
इस बीच, सरकार ने सभी दवा वितरकों और मेडिकल स्टोर्स को भी निर्देश दिया है कि वे अपने स्टॉक की तत्काल जांच करें और संदिग्ध उत्पाद मिलने पर प्रशासन को सूचित करें। आने वाले हफ्तों में जांच रिपोर्ट के आधार पर कई कंपनियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।