समाजवादी पार्टी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के बीच संभावित सियासी तालमेल को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर के बयान के बाद यह मामला राजनीतिक गलियारों में सुर्खियां बटोर रहा है। राजभर ने दावा किया कि अगर AIMIM आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में सपा के साथ आना चाहती है, तो पार्टी उनका स्वागत करेगी। हालांकि, इस बयान पर AIMIM की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
AIMIM के वरिष्ठ नेता असीम वकार ने सपा सांसद के बयान को सिरे से खारिज करते हुए इसे भ्रामक और गुमराह करने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि सपा नेता सार्वजनिक मंचों पर गठबंधन की बात करते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
“मीडिया में स्वागत, अंदरखाने अपमान” — असीम वकार का आरोपअसीम वकार ने साफ शब्दों में कहा कि सपा सांसद का यह बयान केवल दिखावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया के सामने AIMIM का स्वागत किया जाता है, लेकिन निजी तौर पर बातचीत के दौरान पार्टी के नेताओं के साथ अपमानजनक व्यवहार किया जाता है। वकार ने कहा, “जब कैमरे चलते हैं तब स्वागत होता है, और जब घर जाते हैं तो हमारे सामने दरवाज़ा बंद कर दिया जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि अगर सपा वास्तव में गंभीर है और उसके सांसद सच बोल रहे हैं, तो इसका प्रमाण भी देना होगा। AIMIM नेता ने स्पष्ट शर्त रखते हुए कहा कि पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की ओर से औपचारिक निमंत्रण या दावतनामा भेजा जाए, उसके बाद ही किसी तरह की आगे की बातचीत संभव है।
लखनऊ बैठक से निकला सियासी संकेतदरअसल, यह पूरा विवाद समाजवादी पार्टी की उस अहम बैठक के बाद सामने आया है, जो मंगलवार को लखनऊ में आयोजित की गई थी। इस बैठक में पार्टी के सभी सांसदों को बुलाया गया था और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर मंथन किया गया। बैठक के दौरान पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और मजबूत करने पर जोर दिया गया, साथ ही छोटे दलों को साथ लाने के संकेत भी दिए गए।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में सपा सांसद रमाशंकर राजभर ने बिना किसी पार्टी का नाम लिए कहा था कि भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए जो भी दल साथ आना चाहता है, समाजवादी पार्टी उसके लिए दरवाज़े खुले रखे हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि सपा चुनाव में छोटे दलों के साथ गठबंधन के लिए तैयार है।
AIMIM को लेकर बदला-बदला नजरिया?रमाशंकर राजभर का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव कई मौकों पर AIMIM को “वोट कटवा पार्टी” बताकर उस पर निशाना साधते रहे हैं। लंबे समय तक दोनों दलों के बीच सियासी दूरी साफ नजर आती रही है।
हालांकि, हाल के कुछ चुनावों में AIMIM को मिले समर्थन और उसके बढ़ते प्रभाव के बाद सपा का रुख कुछ हद तक सतर्क और बदला हुआ दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही वजह है कि अब AIMIM को लेकर खुले तौर पर गठबंधन के संकेत दिए जा रहे हैं, भले ही दोनों पक्षों के बीच अभी भरोसे की खाई बनी हुई है।