राम मंदिर में रामलला के दर्शन और आरती के लिए जारी किए जाने वाले पास अब आस्था से ज़्यादा व्यवस्था की कमजोरी का उदाहरण बनते जा रहे हैं। ट्रस्ट द्वारा बुकिंग खुलते ही कुछ ही पलों में आगामी पंद्रह दिनों तक के सभी पास ऑनलाइन भर जाने से आम श्रद्धालु खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। मौजूदा हालात यह हैं कि ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर 20 जनवरी तक के दर्शन पास पहले ही बुक दिखाए जा रहे हैं, जिससे सामान्य भक्तों के लिए सुविधा लगभग बेअसर हो गई है।
इस पूरे तंत्र में दलालों और होटल–होम स्टे संचालकों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि ये लोग पहले से पास बुक कर लेते हैं और बाद में उन्हें बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को मोटी रकम लेकर उपलब्ध कराते हैं। उधर, ऑफलाइन पास के लिए भी हालात बेहतर नहीं हैं। दोनों यात्री सेवा केंद्रों पर लंबी कतारों में लगने के बावजूद अधिकतर श्रद्धालुओं को यही जवाब मिलता है कि पास समाप्त हो चुके हैं।
राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट दर्शन और आरती के लिए पास जारी कर रहा है। यह प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित होती है। ऑनलाइन बुकिंग ट्रस्ट की अधिकृत वेबसाइट (https://srjbtkshetra.org) के जरिए स्वयं या साइबर कैफे के माध्यम से की जाती है, जबकि ऑफलाइन पास ट्रस्ट के दोनों सेवा केंद्रों के साथ-साथ पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों की संस्तुति पर जारी किए जाते हैं।
ट्रस्ट की ओर से प्रतिदिन दर्शन के लिए दो-दो घंटे के कुल सात स्लॉट निर्धारित किए गए हैं, जो सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक चलते हैं। दोपहर 11 से 12 बजे का स्लॉट एक घंटे का होता है। इसके अलावा रामलला की मंगला, श्रृंगार और शयन—इन तीनों आरतियों के लिए अलग-अलग पास जारी किए जाते हैं, जो केवल ट्रस्ट पदाधिकारियों की अनुशंसा या सेवा केंद्रों पर प्रत्यक्ष उपस्थिति के आधार पर ही मिलते हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रत्येक दर्शन स्लॉट में प्रतिदिन करीब 300 पास जारी किए जाते हैं, जबकि तीनों आरतियों के लिए 75-75 पास निर्धारित हैं। आरती पास की बुकिंग भी वेबसाइट के माध्यम से संभव है, लेकिन इसकी उपलब्धता सीमित रहती है। ऑनलाइन पास 15 दिन पहले खोले जाते हैं, वहीं ऑफलाइन पास केवल छह दिन पहले ही जारी होते हैं।
इस व्यवस्था में एक पहचान पत्र पर आठ दर्शनार्थियों को शामिल करने की अनुमति दलालों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन गई है। वे किसी एक व्यक्ति के नाम पर पहले से पास बुक कर लेते हैं और फिर अपने कर्मचारियों को श्रद्धालुओं के साथ दर्शन के लिए भेजकर उनसे शुल्क वसूलते हैं। यही वजह है कि जैसे ही कोई आम भक्त वेबसाइट पर बुकिंग करने की कोशिश करता है, उसे संबंधित तारीख के सभी पास ‘अनएवलेबल’ दिखाई देते हैं।
ट्रस्ट से जुड़े लोगों का कहना है कि रोज़ सुबह छह बजे जैसे ही तत्काल ऑनलाइन बुकिंग शुरू होती है, कुछ ही मिनटों में सभी पास भर जाते हैं। यात्री सेवा केंद्रों पर प्रतिदिन केवल 15 आरती पास उपलब्ध कराए जाते हैं, जो एक दिन पहले ही समाप्त हो जाते हैं। हालात ऐसे हैं कि दिव्यांग, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं तक को दर्शन पास पाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे व्यवस्था पर सवाल और भी गहरे हो गए हैं।