महिलाओं को लेकर दिए गए विवादित बयान पर प्रेमानंद महाराज की सफाई, बोले – 'कटु सत्य बुरा लगता है'

हाल ही में महिलाओं को लेकर दिए गए बयान ने संत प्रेमानंद महाराज को आलोचनाओं के घेरे में ला खड़ा किया है। उनके कथनों के चलते न केवल आमजन, बल्कि महिलाएं भी खुलकर विरोध जता रही हैं। जगह-जगह उनके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं और सोशल मीडिया पर उन्हें तीव्र आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

इसी बीच, प्रेमानंद महाराज ने अब स्वयं सामने आकर अपने बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर एक प्रवचन के माध्यम से स्पष्ट किया कि जो सत्य होता है, वह अक्सर कड़वा होता है और जिसे गंदे आचरण की आदत हो, उसे सच्ची बातें हमेशा चुभती हैं।

सत्य सुनना सबको अच्छा नहीं लगता – प्रेमानंद महाराज

अपने वक्तव्य को लेकर मचे बवाल के बाद प्रेमानंद महाराज ने कहा कि आज के समय में लोगों की सोच केवल भौतिक संसार तक ही सीमित रह गई है। अध्यात्म की राह बहुत कम लोग अपनाते हैं। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा – “जैसे नाली का कीड़ा नाली में ही आनंद महसूस करता है, यदि उसे अमृतकुंड में डाल दिया जाए तो वह उसे स्वीकार नहीं कर पाएगा।”

महाराज का कहना है कि जब किसी को सुधारने के लिए कड़ा सत्य कहा जाता है, तो वही लोग उसे अपमान समझ बैठते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया – तुम सब नवयुवक हो, जीवन में सुधार के लिए आए हो। यदि हम तीखे शब्दों में भी कुछ कहें, तो उसे सहन करना चाहिए। लेकिन यदि सही बात भी समझाने जाएं और वह बुरी लगे, तो फिर सुधार कैसे होगा?

युवाओं को दी जिम्मेदारी की सीख

प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचन में युवाओं को चेताया कि वे व्यर्थ की गतिविधियों से दूर रहें। उन्होंने कहा – “बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड के रिश्ते बनाना छोड़ो, नशे से दूर रहो और अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन करो। यदि इन बातों को बुरा मान लिया जाए, तो फिर संत समाज उपदेश देना ही छोड़ देगा। फिर तुम्हें कैसे पता चलेगा कि क्या उचित है और क्या अनुचित?”

उन्होंने आगे समझाया कि नए युग के युवा सुख की तलाश में व्यसन, अशुद्ध व्यवहार और अनैतिक संबंधों में उलझते जा रहे हैं। यही आदतें आगे चलकर उन्हें मानसिक तनाव और अपराध की ओर धकेल सकती हैं। उन्होंने कहा – “इन सब में उलझकर अंततः वही तुम्हें जेल तक पहुंचा सकता है।”

शास्त्र, गुरु और संतों की वाणी को अपनाने की सलाह

प्रेमानंद महाराज ने अपने प्रवचन का समापन करते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति संतों, सतगुरुओं और धर्मशास्त्र की बातों को हृदय से स्वीकार कर ले, तो वह माया के जाल से बच सकता है। उन्होंने कहा – “माया तब तक प्रभावशाली है, जब तक तुम सत्संग, शास्त्र और संतों की वाणी को नजरअंदाज करते हो। मनन करो, विचार करो – तभी सही राह पर चल सकोगे।”