उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने वाराणसी में एमएलसी चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यहां मिला जनादेश पढ़े-लिखे लोगों का है, आम जनता का नहीं। वाराणसी में भाजपा को मिली राजनीतिक चुनौती के बीच राजभर के इस बयान ने ध्यान खींचा है। उन्होंने चुनाव परिणामों का स्वागत करने की बात कही, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि विधान परिषद चुनाव को आगामी विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल मानना सही नहीं है।
राजभर का तर्क है कि विधान परिषद के चुनाव में मतदान करने वाले मतदाताओं और विधानसभा चुनाव में वोट डालने वाले आम मतदाताओं की भागीदारी में अंतर होता है। उनके मुताबिक, एमएलसी चुनाव में पढ़े-लिखे लोग वोट डालते हैं, जबकि विधानसभा चुनाव के दौरान यही वर्ग कई बार मतदान केंद्रों तक नहीं पहुंचता और छुट्टी मनाता है। ऐसे में दोनों चुनावों के नतीजों को सीधे जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।
वाराणसी के नतीजों पर क्या बोले ओम प्रकाश राजभर?
एमएलसी चुनाव के परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए राजभर ने कहा कि यह जनता का जनादेश है और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर पढ़े-लिखे मतदाताओं ने अपना फैसला सुनाया है, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। वाराणसी में भाजपा के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने दोहराया कि यह पढ़े-लिखे लोगों का वोट है, आम जनता का नहीं।
राजभर के बयान का आशय यह था कि विधान परिषद चुनाव में मतदाताओं का एक अलग वर्ग हिस्सा लेता है और उसके फैसले को विधानसभा चुनाव में होने वाले मतदान का सीधा संकेत नहीं माना जा सकता। हालांकि, उनके इस कथन को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं हो सकती हैं। बयान में उन्होंने यह नहीं कहा कि पढ़े-लिखे मतदाताओं का फैसला महत्वहीन है, बल्कि उन्होंने दोनों चुनावों के मतदाता वर्ग और मतदान के व्यवहार में अंतर होने की बात रखी। वाराणसी की स्नातक एमएलसी सीट पर 29 अक्टूबर की सुबह तक मतगणना जारी थी। प्रथम वरीयता के मतों की नौवें चक्र तक की गिनती में सपा प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा को 50,462 और भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह को 33,478 वोट मिले थे। इस चरण में आशुतोष सिन्हा 16,984 मतों से आगे चल रहे थे, लेकिन दूसरी वरीयता के मतों की गिनती पूरी होने तक अंतिम परिणाम स्पष्ट नहीं हुआ था। इसलिए इस सीट पर उस समय की बढ़त को घोषित जीत नहीं माना जा सकता था।
विधानसभा चुनाव को सेमीफाइनल मानने से किया इनकारउत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव के नतीजों को आगामी विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखे जाने के सवाल पर भी राजभर ने अपनी बात रखी। उन्होंने इसे विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल मानने से इनकार किया। उनका कहना था कि यदि किसी उपचुनाव की घोषणा हो जाए, तो उसे भी सेमीफाइनल कहा जाने लगेगा। इसलिए सिर्फ एमएलसी चुनाव के नतीजों के आधार पर विधानसभा चुनाव की दिशा तय करना सही नहीं है।
राजभर ने कहा कि विधान परिषद सदस्य का चुनाव विधानसभा चुनाव का रिहर्सल नहीं है। उनके मुताबिक, विधानसभा चुनाव में आम मतदाता बड़ी भूमिका निभाता है, जबकि एमएलसी चुनाव में पढ़े-लिखे मतदाता वोट डालते हैं। उन्होंने दोनों चुनावों के बीच सीधे संबंध को खारिज करते हुए दावा किया कि विधानसभा चुनाव के दौरान पढ़े-लिखे लोग अक्सर मतदान केंद्रों पर नहीं जाते और छुट्टी मनाते हैं।
उनके बयान में चुनावी भागीदारी का मुद्दा प्रमुख रहा। राजभर ने यह संदेश देने की कोशिश की कि विधान परिषद के चुनाव में किसी पार्टी के पक्ष या विरोध में आए मतों को विधानसभा चुनाव में उसी तरह दोहराया जाएगा, ऐसा मानकर नहीं चलना चाहिए।
मौलाना अरशद मदनी के बयान पर भी तीखी प्रतिक्रियाओम प्रकाश राजभर ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। मदनी ने आरोप लगाया था कि पहले की सरकारें मुसलमानों को निशाना बनाती थीं, जबकि मौजूदा सरकार के दौर में इस्लाम और उसकी धार्मिक पहचान को भी निशाना बनाया जा रहा है।
राजभर ने मदनी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मौलाना अरशद मदनी सौ फीसदी झूठ बोल रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि आने वाले दिनों में न मदनी मौलाना की चलेगी और न ही मौलवी-मौलाना की। इस तरह राजभर ने धार्मिक पहचान और मौजूदा सरकार को लेकर दिए गए मदनी के बयान से असहमति जताई।
यह प्रतिक्रिया राजनीतिक बहस के उस हिस्से से जुड़ी है, जिसमें सरकार की नीतियों और धार्मिक समुदायों के साथ उसके व्यवहार को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। राजभर ने मदनी के आरोपों को स्वीकार नहीं किया और उन्हें पूरी तरह गलत बताया।
महिला बिल के मुद्दे पर सपा-बसपा को घेरा
राजभर ने महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक का विरोध करने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को निशाने पर लिया। उन्होंने महिलाओं से आह्वान किया कि लोकसभा में महिला बिल का विरोध करने वाली इन पार्टियों को महिलाएं सबक सिखाएंगी। उनके बयान का केंद्र महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और इस मुद्दे पर सपा-बसपा की भूमिका रही।
राजभर ने आजमगढ़ में 29 नवंबर को होने वाले कार्यक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने आजमगढ़ के आईटीआई मैदान में सपा की विदाई की तारीख तय की है। उनके मुताबिक, इस कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहुंचेंगे।
उन्होंने यह दावा भी किया कि अगले महीने के आखिरी सप्ताह तक माताओं और बहनों के खातों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से पैसा आने वाला है। राजभर ने कहा कि इसका ऐलान हो चुका है। हालांकि, उनके इस बयान में खाते में आने वाली राशि की रकम, योजना का नाम और लाभार्थियों से जुड़ी विस्तृत शर्तों का उल्लेख नहीं किया गया।
कांग्रेस पर भी कसा तंज, सीट मांगने पर याद दिलाया नतीजाएमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर राजभर ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट के जरिए कांग्रेस पर तंज कसते हुए सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीटों की मांग का मुद्दा उठाया। राजभर ने कहा कि जब कांग्रेस सीट मांगे, तो उसे चुनाव परिणाम का वही शून्य याद दिला दिया जाए। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने कांग्रेस की चुनावी स्थिति पर सवाल उठाने की कोशिश की। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा जारी है।