‘आइए हो जाए दो-दो हाथ’, अखिलेश यादव को राजभर की खुली चुनौती, बोले- नेता क्या जो चुनाव से भागे?

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आगामी विधानसभा चुनाव खुद नहीं लड़ने के ऐलान पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो नेता चुनाव लड़ने से पीछे हट जाए, वह कैसा नेता है? राजभर ने अखिलेश यादव को किसी एक सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती देते हुए कहा, 'आइए हो जाए दो-दो हाथ।' राजभर की यह प्रतिक्रिया अखिलेश यादव के वाराणसी दौरे के दौरान दिए गए बयान के बाद आई है। मंगलवार, 3 नवंबर को पत्रकारों से बातचीत में सपा प्रमुख ने कहा था कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह लोकसभा सांसद रहते हुए ही मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। अखिलेश के इस बयान के बाद बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के नेताओं ने उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

राजभर ने पूछा- नेता क्या जो चुनाव से भागे?

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए अपने बयान में कहा, अरे मित्र अखिलेश यादव जी! सुना है कि आप अगले साल यूपी विधानसभा चुनाव में किसी सीट से नहीं लड़ेंगे। ए महाराज, नेता क्या जो चुनाव से भागे? आइये हो जाये दो-दो हाथ। उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता था कि अखिलेश यादव इतना टोना-टोटका मानते हैं। राजभर ने उनके बिना विधानसभा चुनाव लड़े मुख्यमंत्री बनने के पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि यह कोई टोना-टोटका नहीं था, बल्कि उनके मुताबिक रेडीमेड पार्टी के रेडीमेड शहजादा होने की वजह से वह मुख्यमंत्री बने थे। सुभासपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को अंदाजा हो गया है कि अगर वह चुनाव लड़ने मैदान में उतरेंगे तो उन्हें हार का सामना करना पड़ सकता है। इसी वजह से वह चुनावी मैदान से पीछे हट रहे हैं। यह राजभर का राजनीतिक आरोप है; अखिलेश यादव ने चुनाव नहीं लड़ने के अपने फैसले की वजह अलग तरीके से बताई है।

'लाल टोपी वालों की सरकार नहीं है', राजभर ने साधा निशाना


राजभर ने अपने बयान में समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, मित्र अखिलेश जी, ये लाल टोपी वालों की सरकार नहीं है, जब प्रदेश टोना-टोटका वाले चलाया करते थे। उन्होंने आगे दावा किया कि नोएडा से लेकर आगरा, अयोध्या और मथुरा तक टोना-टोटका मानने वालों की सरकार को जनता ने 10 साल पहले ही सत्ता से बाहर कर दिया था। राजभर ने कहा कि अब उनकी सहयोगी सरकार ने टोना-टोटका, भूत-प्रेत और पिशाच जैसी मान्यताओं को खत्म कर दिया है। राजभर के इस बयान में पिछली सपा सरकार को लेकर राजनीतिक कटाक्ष के साथ-साथ अखिलेश यादव के उस तर्क पर भी निशाना था, जिसमें उन्होंने 2012 में लोकसभा सांसद रहते हुए मुख्यमंत्री बनने के अनुभव को अपने लिए शुभ बताया था।

'किसी एक सीट से लड़ लिये होते', राजभर ने दी चुनौती

सुभासपा प्रमुख ने अखिलेश यादव को विधानसभा चुनाव में उतरने की चुनौती दोहराते हुए कहा कि वह अब तक केवल एक बार मुख्यमंत्री बन पाए हैं और आगे उनके मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कम से कम अखिलेश को हिम्मत दिखाकर किसी एक सीट से चुनाव लड़ लेना चाहिए था। राजभर ने कहा, वैसे भी! ले दे के एक्कै बार सीएम बन पाए हैं आप। अब आगे अगली पैदाइश तक उम्मीद भी नहीं है। तो कम से कम हिम्मत दिखाते हुए किसी एक सीट से लड़ लिये होते। डर गए चुनौती पर। इसके बाद उन्होंने वाराणसी दौरे का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव पर धार्मिक संदर्भों के जरिए भी कटाक्ष किया। राजभर ने कहा कि उनके पास चौराहे पर रुककर मिठाई खाने का समय था, लेकिन कुछ ही दूरी पर स्थित बाबा विश्वनाथ के दरबार में शीश झुकाने का समय नहीं मिला। उन्होंने अखिलेश को काल भैरव बाबा के मंदिर जाने की सलाह देते हुए कहा कि वहां उनके टोना-टोटका का इलाज हो जाता। अपने बयान के अंत में राजभर ने जय भारत, जय श्रीराम, जय परशुराम, जय श्रीकृष्ण और जय महाराजा सुहेलदेव के नारे भी लगाए। उनके पूरे बयान में अखिलेश यादव के चुनाव नहीं लड़ने के फैसले को लेकर राजनीतिक तंज, चुनौती और पिछली सपा सरकार पर निशाने शामिल रहे।

अखिलेश यादव ने क्या कहा था?

दरअसल, अखिलेश यादव मंगलवार को वाराणसी पहुंचे थे। पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वह 2027 में होने वाला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ेंगे? इस पर उन्होंने कहा, हम मुख्यमंत्री तब बनते हैं, जब इलेक्शन नहीं लड़ते हैं। इसलिए वही करेंगे जो हमारे लिए शुभ है।

उन्होंने वर्ष 2012 का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी वह लोकसभा सांसद रहते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। इस बार भी वह लोकसभा सदस्य रहते हुए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। अखिलेश यादव फिलहाल कन्नौज से लोकसभा सांसद हैं। जब उनसे वाराणसी में समाजवादी पार्टी के किसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने पत्रकार से ही पूछ लिया, 'तुम सीट बताओ।' उनके इस जवाब के बाद उनके चुनाव नहीं लड़ने के फैसले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई।

2012 में लोकसभा सांसद रहते बने थे मुख्यमंत्री


अखिलेश यादव मार्च 2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। उस समय वह कन्नौज से लोकसभा सांसद थे और उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। समाजवादी पार्टी को उस चुनाव में 403 में से 224 सीटों पर जीत मिली थी। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अखिलेश यादव विधान परिषद के सदस्य बने थे। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने मैनपुरी की करहल सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में वह कन्नौज से सांसद चुने गए। अब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने फिर से 2012 की तरह लोकसभा सदस्य रहते हुए मुख्यमंत्री बनने की बात कही है। अखिलेश यादव के इस ऐलान पर ओम प्रकाश राजभर ने सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी राजभर सपा प्रमुख को चुनावी मैदान में उतरने की चुनौती देते रहे हैं। इस बार उन्होंने अपने बयान में चुनाव लड़ने के साथ-साथ अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के पुराने घटनाक्रम और धार्मिक मान्यताओं को लेकर भी निशाना साधा है।