नोएडा के सेक्टर-150 स्थित निर्माणाधीन बेसमेंट में कार समेत डूबे सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में जांच और कार्रवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। इस गंभीर हादसे की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) मंगलवार को नोएडा पहुंची और विभिन्न स्तरों पर पड़ताल शुरू की। पुलिस ने बेसमेंट निर्माण से जुड़े एमजेड विशटाउन के निदेशक और बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के मुताबिक, आरोपित बिल्डर ने करीब दो साल पहले एक मॉल के लिए बेसमेंट निर्माण के उद्देश्य से जमीन पर गहरा गड्ढा खुदवाया था। समय के साथ इस गड्ढे में भारी मात्रा में पानी भर गया। बीते शुक्रवार को इसी पानी से भरे बेसमेंट में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार गिर गई, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। पुलिस अब दूसरे बिल्डर की गिरफ्तारी के लिए भी लगातार दबिश दे रही है। वहीं, बेसमेंट में डूबी कार को एनडीआरएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने मंगलवार को 96 घंटे बाद बाहर निकाला।
कैंडल मार्च निकालकर लोगों ने जताया आक्रोशइस घटना को लेकर शहर में गुस्सा और शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कैंडल मार्च निकाला। उधर, मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित SIT ने जांच के पहले दिन नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए। युवराज के पिता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि हादसे के समय वे बेटे को बचाने के लिए इधर-उधर मदद की गुहार लगाते रहे।
उनका आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ के कर्मियों से बार-बार त्वरित रेस्क्यू की अपील की गई, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। पानी बहुत ठंडा होने की बात कहकर बचावकर्मी पीछे हटते रहे। केवल रस्सी फेंककर औपचारिकता निभाई गई। उनके मुताबिक, बचाव दल के पास न तो पर्याप्त संसाधन थे और न ही जरूरी तैयारी। एनडीआरएफ को भी काफी देर से सूचना दी गई।
बचाव एजेंसियों के बयान दर्ज, दिए अपने तर्कघटना की रात किसी भी विभाग का कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। हैरानी की बात यह रही कि तीन दिन बीतने के बाद भी कोई आला अधिकारी पीड़ित परिवार से मिलने नहीं आया। SIT ने पुलिस, एसडीआरएफ और दमकल विभाग के कर्मियों के बयान दर्ज किए। बचाव एजेंसियों ने अपने पक्ष में घने कोहरे के कारण शून्य दृश्यता, बेसमेंट में पानी के अंदर लोहे के सरिए होने और संसाधनों की कमी को बचाव कार्य में बाधा बताया।
दोपहर बाद SIT ने घटना स्थल का निरीक्षण कर जरूरी साक्ष्य जुटाए। इसके बाद शाम को एक बार फिर टीम ने नोएडा प्राधिकरण कार्यालय में डेरा डालकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की और उनके बयान दर्ज किए।
वरिष्ठ अधिकारियों के साथ SIT की बैठकSIT में शामिल मेरठ के एडीजी भानु भास्कर, मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता अजय वर्मा पूर्वाह्न 11:55 बजे नोएडा पहुंचे। उनके साथ पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह और जिलाधिकारी मेधा रूपम भी मौजूद रहीं। चेयरमैन के कक्ष में SIT ने पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी और अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करूणेश के साथ मामले को लेकर विस्तृत चर्चा की।
युवराज के पिता ने SIT को बताई पूरी घटनाबैठक के बाद टीम बोर्ड रूम में पहुंची। दिवंगत इंजीनियर युवराज मेहता के पिता भी पुलिस के साथ कार्यालय पहुंचे और सीधे बोर्ड रूम में गए। करीब एक घंटे से अधिक समय तक वे SIT के सदस्यों के साथ अंदर रहे और पूरी घटना का सिलसिलेवार विवरण दिया।
मीडिया से बातचीत में एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि SIT को पांच दिन के भीतर सभी पहलुओं की जांच कर रिपोर्ट सौंपनी है। उन्होंने कहा कि हादसा किसकी लापरवाही से हुआ, इसकी गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस, प्रशासन, प्राधिकरण, दमकल विभाग, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ—सभी की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
घटना स्थल का दोबारा निरीक्षणइसके बाद SIT टीम पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी के साथ सेक्टर-150 स्थित घटना स्थल के लिए रवाना हुई। शाम साढ़े पांच बजे टीम फिर से नोएडा कार्यालय लौटी और चेयरमैन की अध्यक्षता में प्रकरण पर विस्तृत चर्चा की। करीब सात बजे टीम कार्यालय से रवाना हो गई।
इस बीच पुलिस ने घटना के लगभग 24 घंटे बाद केस दर्ज करने के बाद 72 घंटे के भीतर आरोपित बिल्डर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पीड़ित पिता की तहरीर पर 18 जनवरी को नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने एमजेड विशटाउन और लोटस ग्रीन बिल्डर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि प्लॉट पर न तो बैरिकेडिंग थी और न ही रिफ्लेक्टर लगाए गए थे, जिससे यह हादसा हुआ। एमजेड विशटाउन के प्लानर और डेवलपर आर्टच डेवलपर की ओर से गंभीर लापरवाही सामने आई है।