नोएडा में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़े भले ही सुधार का संकेत दे रहे हों, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बुधवार को शहर का औसत एक्यूआई 242 दर्ज किया गया — यानी “बेहद खराब” श्रेणी में। सरकारी रिकॉर्ड में थोड़ी राहत दिखाई दी, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस हैं। पूरे दिन धुंध और स्मॉग की परत शहर के आसमान पर छाई रही, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ा।
शाम होते-होते जब प्रदूषण नियंत्रण की गतिविधियां धीमी पड़ीं, तो एक्यूआई में अचानक उछाल देखने को मिला। रात आठ बजे तक यह सूचकांक बढ़कर 267 पहुंच गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वृद्धि इस बात का सबूत है कि असली स्थिति कागजी रिपोर्ट्स से कहीं ज्यादा चिंताजनक है।
मॉनिटरिंग स्टेशनों पर दिख रहा “कृत्रिम सुधार”प्रदूषण के आंकड़े सुधारने के लिए शहर के मॉनिटरिंग स्टेशनों के आसपास लगातार पानी का छिड़काव और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन असल समस्या यह है कि ये उपाय केवल 20 से 50 मीटर के दायरे में ही असर दिखाते हैं। स्टेशन से थोड़ा दूर जाते ही हवा की गुणवत्ता तेजी से गिर जाती है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यह आंकड़ों में सुधार दिखाने की “तकनीकी चाल” है, जिससे आम लोगों को प्रदूषण की असली स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता।
सुबह से रात तक बिगड़ता गया हालसुबह से ही नोएडा की हवा में धुंध घुली रही। हवा की रफ्तार मात्र चार से पांच किलोमीटर प्रति घंटा थी, जिससे प्रदूषक कण ऊपर नहीं उठ सके। सुबह 11 बजे एक्यूआई 219 था, दोपहर तीन बजे यह बढ़कर 223, शाम चार बजे 230 और रात सात बजे तक 257 तक पहुंच गया। यानी दिन बढ़ने के साथ-साथ सांस लेना और मुश्किल होता गया।
विशेषज्ञों ने जताई चिंतापर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में प्रदूषण नियंत्रण उपायों को दिखावे की बजाय वास्तविक प्रभावी तरीके से लागू करने की जरूरत है। सेक्टर 116 और 74 जैसे इलाकों में बढ़ते प्रदूषण के चलते नोएडा प्राधिकरण को नोटिस तक जारी किया गया था, जिसके बाद जगह-जगह पानी का छिड़काव शुरू किया गया। हालांकि, इससे केवल अस्थायी राहत ही मिल पाई।
सेक्टर-125 का मॉनिटरिंग स्टेशन रहा ठपबुधवार को सेक्टर-125 स्थित वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग स्टेशन पूरे दिन बंद रहा। इसका मतलब यह है कि इस इलाके की वास्तविक वायु स्थिति का कोई रिकॉर्ड ही नहीं बना। ऐसे में शहर की कुल औसत वायु गुणवत्ता के आंकड़े अधूरे साबित हो रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाईप्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने बुधवार को सेक्टर-142 में निरीक्षण के दौरान बड़े पैमाने पर नियम उल्लंघन पकड़े। यहां एक निर्माण स्थल पर खुले में निर्माण सामग्री रखी हुई थी और किसी तरह का ग्रीन कवर नहीं लगाया गया था। नियमों की अनदेखी पर बोर्ड ने संबंधित फर्म पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया।
विशेषज्ञ की राय“मॉनिटरिंग स्टेशनों के आसपास पानी का छिड़काव केवल अस्थायी राहत देता है। जैसे ही मिट्टी सूखती है, हवा में धूलकण फिर बढ़ जाते हैं और वायु गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में लौट आती है। शहर की असली हवा अभी भी साफ नहीं है।” — अमित गुप्ता, पर्यावरणविद्