मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में मृत्युदंड का फैसला सुनते ही दोनों रोने लगे। सजा सुनाते समय अदालत ने महाभारत का उल्लेख करते हुए कहा कि अपराधियों को सजा देना भी धर्म है।
अदालत की टिप्पणी के बाद सुनाई गई सजा
सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में जिला जज की अदालत ने मुस्कान और साहिल को दोषी ठहराए जाने के बाद मृत्युदंड सुनाया। फैसले के दौरान महाभारत का संदर्भ देते हुए अदालत ने दंड को धर्म से जोड़ा। सजा का ऐलान होते ही दोनों दोषियों के रोने की बात सामने आई।
नीले ड्रम में मिला था सौरभ का शव
यह मामला मर्चेंट नेवी के पूर्व कर्मचारी सौरभ राजपूत की हत्या से जुड़ा है। हत्या के बाद उनके शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में रखे गए थे और उसके ऊपर सीमेंट डाल दिया गया था। इस घटना के सामने आने के बाद मामला देशभर में चर्चा में रहा। मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को इस हत्याकांड में दोषी पाया गया। सौरभ के परिवार ने कहा- हमें न्याय मिला
अदालत के फैसले के बाद सौरभ के परिजनों ने संतोष जताया। परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्हें न्याय मिल गया है। फैसले के बाद परिजन भावुक हो गए। लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवार ने इसे न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया। मृत्युदंड के ऐलान के बाद कचहरी परिसर में जश्न का माहौल भी देखने को मिला। वहां वकीलों ने मिठाई बांटी।
सौरभ की छह साल की बेटी को अपने पास रखना चाहता है परिवार
सजा के फैसले के साथ ही सौरभ की छह साल की बेटी को लेकर भी पारिवारिक विवाद सामने आया है। सौरभ का परिवार बच्ची को अपने पास रखना चाहता है। इसके लिए सौरभ के भाई राहुल अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। खबर के मुताबिक, बच्ची के नाना-नानी ने उसे सौरभ के परिवार को सौंपने से मना कर दिया था। वहीं, जेल में जन्मी दूसरी बच्ची को सौरभ के परिवार ने साहिल की बेटी बताते हुए अपनाने से इनकार कर दिया है।