'लाल कम, भगवा ज्यादा', अखिलेश के पीडीए रथ पर मायावती का हमला; सपा से पूछे कई सवाल

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उनके ‘पीडीए रथ’ और पार्टी की सामाजिक-राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाए। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कहा कि सपा के प्रचारित ‘पीडीए रथ’ में पार्टी के पारंपरिक लाल रंग की तुलना में आरएसएस-भाजपा से जुड़ा भगवा रंग अधिक दिखाई दे रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह चुनावी लाभ के लिए रणनीति में बदलाव है या फिर सपा को मुस्लिम मतदाताओं से समर्थन मिलने का भरोसा कम हुआ है।

मायावती ने अपने पोस्ट में उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समाज का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं के बड़े हिस्से का समर्थन मिलने के बावजूद सपा भाजपा को उत्तर प्रदेश और केंद्र में सरकार बनाने से रोक नहीं सकी। इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि मुस्लिम मतदाता बार-बार सपा को वोट क्यों दें। मायावती ने यह भी दावा किया कि मुस्लिम समाज का एक हिस्सा अब बीएसपी की ओर रुख कर रहा है। यह मायावती का राजनीतिक दावा है, जिसकी स्वतंत्र मतदाता-स्तरीय पुष्टि उन्होंने अपनी पोस्ट में नहीं दी।

‘पीडीए’ को लेकर भी अखिलेश पर निशाना

मायावती ने सपा के ‘पीडीए’ फॉर्मूले को भी अपने हमले का केंद्र बनाया। उन्होंने सपा से जनता के सामने यह स्पष्ट करने को कहा कि उसके ‘पीडीए’ की वास्तविक परिभाषा क्या है। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा ने अलग-अलग मौकों पर ‘पीडी’ को पिछड़ा-दलित और पंडित जैसे अलग संदर्भों में पेश किया है। उन्होंने अखिलेश यादव की ओर से नीले रंग के कपड़ों और प्रतीकों के इस्तेमाल का भी जिक्र किया और इसे अंबेडकरवादी पहचान से जोड़ने के प्रयास के रूप में आलोचना की।

मायावती ने इसके जवाब में बीएसपी को डॉ. भीमराव आंबेडकर की विचारधारा और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति वाली पार्टी बताया। उन्होंने कानून-व्यवस्था, जनकल्याण और विकास के मुद्दों पर अपने पूर्ववर्ती बीएसपी शासन का उल्लेख करते हुए पार्टी की नीतियों को सामने रखा। ये उनके राजनीतिक दावे और पार्टी के पक्ष में दिए गए तर्क हैं।

‘पीडीए रथ’ पर क्यों उठा विवाद?


अखिलेश यादव की ओर से आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत ‘पीडीए रथ’ का इस्तेमाल किया जा रहा है। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, अखिलेश यादव 24 सितंबर से इस रथ के जरिए अपने चुनावी कार्यक्रम की शुरुआत करने वाले हैं और इसके लिए विशेष रूप से तैयार मल्टी-एक्सल बस का इस्तेमाल किया जाएगा।

‘पीडीए’ सपा की राजनीतिक रणनीति में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समूहों को संबोधित करने वाला प्रमुख राजनीतिक सूत्र रहा है। हाल के महीनों में इस शब्द और उससे जुड़े सामाजिक समीकरणों को लेकर सपा और बीएसपी के बीच सार्वजनिक बयानबाजी बढ़ी है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने अगस्त में रिपोर्ट किया था कि सपा की ‘पीडीए’ राजनीति में ‘पी’ को अलग-अलग सामाजिक समूहों से जोड़कर पेश किए जाने को लेकर राजनीतिक चर्चा चल रही है।

इससे पहले सितंबर में मायावती ने सपा के छात्र संगठन की नीली वर्दी को लेकर भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि केवल नीला रंग अपनाने या नीले कपड़े पहनने से कोई पार्टी अंबेडकरवादी नहीं बन जाती।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले तेज हुई बयानबाजी

उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है। चुनाव की औपचारिक तारीखों की घोषणा अभी नहीं हुई है। चुनावी तैयारियों के बीच सपा और बीएसपी के बीच सामाजिक समीकरण, ‘पीडीए’ और विभिन्न वर्गों के समर्थन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी सामने आ रही है।

मायावती का सोमवार का हमला मुख्य रूप से अखिलेश यादव के ‘पीडीए रथ’, उसके रंगों और सपा के मुस्लिम तथा अन्य सामाजिक समूहों के बीच समर्थन को लेकर था। फिलहाल अखिलेश यादव की ओर से मायावती की इस ताजा पोस्ट पर कोई प्रत्यक्ष जवाब इस रिपोर्ट के समय तक सामने नहीं आया है।

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