शिवा शर्मा हत्याकांड: पुलिस को चकमा देकर लखनऊ पहुंची श्रद्धा दुबे, हाई कोर्ट में बेल की अर्जी; अफसरों पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कारोबारी शिवा शर्मा की मौत के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। चर्चित शिवा हत्याकांड में मुकदमा दर्ज होने के करीब 10 दिन बाद भी मुख्य आरोपित श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश उर्फ तनवीर पुलिस की पकड़ से दूर हैं। इस बीच श्रद्धा सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताती रही। अब सामने आया है कि वह लखनऊ पहुंची और अपने वकीलों के साथ हाई कोर्ट भी गई, लेकिन पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।

आरोपियों की गिरफ्तारी में नाकामी और जांच को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पुलिस प्रशासन ने अधिकारियों पर कार्रवाई की है। पुलिस कमिश्नर ने हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया। डीसीपी विक्रांत वीर को मुख्यालय अटैच किया गया, जबकि एसीपी रजनीश वर्मा को भी पद से हटा दिया गया। इसके अलावा तीनों आरोपियों पर घोषित इनाम की राशि 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई। इस मामले की पूरी कहानी अब तक की जांच और सामने आए घटनाक्रम के जरिए समझिए।

क्या है शिवा शर्मा हत्याकांड?

लखनऊ के हजरतगंज इलाके में स्थित अवध ग्रीन अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से कारोबारी शिवा शर्मा नीचे गिर गए थे। उन्हें इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। घटना के बाद शिवा की मां रंजना शर्मा ने हजरतगंज थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश उर्फ तनवीर पर हत्या का आरोप लगाया।

शिकायत के आधार पर तीनों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। परिवार की ओर से आरोप लगाया गया कि शिवा को प्रताड़ित किया जा रहा था। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों का पता लगाने तथा उन्हें गिरफ्तार करने के लिए अलग-अलग टीमें लगाईं। जांच में पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश की कि शिवा के अपार्टमेंट से गिरने से पहले क्या घटनाक्रम हुआ था और उस समय वहां कौन-कौन मौजूद था।

10 से 13 अक्टूबर: सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी जांच

मुकदमा दर्ज होने के बाद हजरतगंज पुलिस ने अवध ग्रीन अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज अपने कब्जे में ली। जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना था कि शिवा के चौथी मंजिल से गिरने से पहले क्या हुआ था। पुलिस फुटेज के जरिए घटनाक्रम को समझने और उस समय मौजूद लोगों की भूमिका के बारे में जानकारी जुटाने में लगी रही।

इस बीच पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी। रिपोर्ट में शिवा के शरीर पर 11 चोटों का उल्लेख किया गया। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट समेत उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले की परिस्थितियों की जांच करनी थी। दूसरी ओर, हत्या के आरोपों का सामना कर रहे श्रद्धा, रश्मि और दानिश की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
14 अक्टूबर: तीनों आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम

आरोपियों का पता लगाने और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने दबिश तेज की। 14 अक्टूबर को पुलिस कमिश्नर ने श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया। तीनों को पकड़ने के लिए पुलिस की तीन टीमें लगाई गईं, जिन्हें अलग-अलग स्थानों पर भेजा गया। एक टीम श्रद्धा के रायबरेली स्थित घर पहुंची। दूसरी टीम दानिश के सीतापुर स्थित घर गई, जबकि तीसरी टीम ने लखनऊ के अलग-अलग इलाकों में दबिश दी। पुलिस की कोशिश थी कि आरोपियों के संभावित ठिकानों का पता लगाकर उन्हें गिरफ्तार किया जाए। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद तीनों पुलिस के हाथ नहीं आए।

15 अक्टूबर: श्रद्धा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर रखा अपना पक्ष

एक तरफ पुलिस श्रद्धा और अन्य आरोपियों की तलाश में अलग-अलग जिलों में दबिश दे रही थी, तो दूसरी तरफ श्रद्धा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपना पक्ष सामने रखा। 15 अक्टूबर को जारी वीडियो में उसने खुद को निर्दोष बताया और दावा किया कि शिवा शर्मा ने आत्महत्या की थी, उनकी हत्या नहीं हुई थी।

श्रद्धा ने अपने वीडियो में शिवा पर 15 से 20 लाख रुपये तक का कर्ज होने की बात कही। उसका दावा था कि शिवा आर्थिक दबाव में थे। उसने यह भी कहा कि शिवा पहले भी आत्महत्या करने की बात कह चुके थे। श्रद्धा ने एक के बाद एक तीन वीडियो जारी किए, जिनमें उसने मामले को लेकर अपनी बात रखी और खुद को निर्दोष बताया। श्रद्धा के इन दावों के बीच पुलिस की जांच जारी रही। एक ओर परिवार की शिकायत में हत्या का आरोप लगाया गया था, तो दूसरी ओर श्रद्धा सोशल मीडिया पर शिवा की मौत को आत्महत्या बता रही थी। इन दोनों पक्षों के बीच वास्तविक घटनाक्रम का पता लगाना जांच का अहम हिस्सा बना रहा।

नेपाल सीमा के पास सामने आया सीसीटीवी फुटेज

जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि श्रद्धा अपनी बहन रश्मि और ड्राइवर दानिश के साथ नेपाल भाग गई है। इस संबंध में नेपाल सीमा के पास का एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया। फुटेज में दो ई-रिक्शों में चार लोग बैठे दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस ने नेपाल सीमा से लगे इलाकों के साथ-साथ अन्य संभावित ठिकानों पर भी दबिश दी।

पुलिस आरोपियों की तलाश में लगातार प्रयास करती रही, लेकिन उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी। इसी दौरान आरोपियों की ओर से अदालत में आत्मसमर्पण करने के लिए आवेदन भी दाखिल किए गए। पुलिस के लिए चुनौती यह थी कि एक तरफ आरोपियों की तलाश चल रही थी, वहीं दूसरी तरफ उनके अदालत पहुंचने और कानूनी प्रक्रिया अपनाने की जानकारी भी सामने आने लगी थी।

लखनऊ आई श्रद्धा, वकीलों के साथ हाई कोर्ट पहुंची; पुलिस को नहीं लगी भनक

श्रद्धा के आत्मसमर्पण से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद लखनऊ पुलिस उसकी तलाश में जुट गई थी। इसी बीच सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धा अपने वकीलों के साथ हाई कोर्ट पहुंची और जमानत के लिए अर्जी दाखिल की। आरोपों का सामना कर रही श्रद्धा का लखनऊ आना और हाई कोर्ट पहुंचना पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े करने वाला घटनाक्रम बन गया, क्योंकि पुलिस को इसकी जानकारी तक नहीं मिली।

इस दौरान श्रद्धा ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में भी खुद को निर्दोष बताया। उसने शिवा पर करीब 16 से 17 लाख रुपये का कर्ज होने का दावा दोहराया। इसके साथ ही उसने आरोप लगाया कि शिवा उसके घर से करीब पांच से छह लाख रुपये के गहने ले गए थे। श्रद्धा के इन बयानों के बाद मामले को लेकर पुलिस की जांच पर सवाल उठने लगे। पुलिस पहले से ही तीनों आरोपियों की तलाश में जुटी थी, लेकिन श्रद्धा के लखनऊ आने और हाई कोर्ट पहुंचने की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। इस घटनाक्रम ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए चल रही कार्रवाई और पुलिस की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए।

18 अक्टूबर: इनाम की रकम बढ़ाकर 50 हजार रुपये की गई

श्रद्धा दुबे, रश्मि दुबे और दानिश को गिरफ्तार करने में पुलिस को लगातार नाकामी मिल रही थी। पहले तीनों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। करीब आठ दिनों तक उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाने के बाद 18 अक्टूबर को इनाम की राशि बढ़ाकर 50-50 हजार रुपये कर दी गई। आरोपियों की तलाश में हो रही देरी के बीच पुलिस प्रशासन ने जांच से जुड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई की। पुलिस कमिश्नर ने हजरतगंज इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया। देर रात डीसीपी विक्रांत वीर को भी उनके पद से हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया। इस तरह मामले में गिरफ्तारी न होने के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर भी कार्रवाई सामने आई।

श्रद्धा के घर पर नोटिस चस्पा, 19 अक्टूबर को एसीपी भी हटाए गए

मामले में आगे की कार्रवाई के तहत सहारनपुर कोर्ट से श्रद्धा के घर पर नोटिस भी चस्पा किया गया। इसके बाद 19 अक्टूबर की सुबह एसीपी रजनीश वर्मा को भी हटा दिया गया। इस तरह शिवा शर्मा हत्याकांड में आरोपियों की गिरफ्तारी न होने और जांच के तरीके को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पुलिस विभाग के कई अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। फिलहाल, श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि दुबे और ड्राइवर दानिश की गिरफ्तारी इस मामले की प्रमुख चुनौती बनी हुई है। परिवार ने शिवा की मौत को हत्या बताते हुए तीनों पर आरोप लगाए हैं, जबकि श्रद्धा सोशल मीडिया वीडियो और मीडिया से बातचीत में खुद को निर्दोष बताती रही है। पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आरोपियों के संभावित ठिकानों से जुड़ी जानकारी अहम बनी हुई है। मामले में आरोपों और श्रद्धा के दावों की सच्चाई का निर्धारण जांच तथा कानूनी प्रक्रिया के जरिए होना है।