गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके के टीला मोड़ थाना क्षेत्र में तीन बच्चियों की आत्महत्या से जुड़े मामले ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। घटना के बाद पुलिस ने जब परिवार की आर्थिक पृष्ठभूमि की जांच शुरू की, तो कई अहम तथ्य सामने आए। शुरुआती पड़ताल में संकेत मिले हैं कि परिवार लंबे समय से वित्तीय दबाव से गुजर रहा था।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बच्चियों के पिता चेतन ने पिछले करीब दस वर्षों में अलग-अलग बैंकों और क्रेडिट कार्ड के जरिए कुल 10 लोन लिए थे। जांच के दौरान उसके बैंक खातों और निवेश से जुड़े दस्तावेज खंगाले गए। एक सक्रिय डीमैट खाते में लगभग 37 हजार रुपये पाए गए हैं। इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्यों के खातों की भी छानबीन की जा रही है।
छह बैंक खातों की जानकारी सामने आईघटना के बाद आर्थिक हालात की तह तक पहुंचने के लिए पुलिस ने परिवार से जुड़े बैंक खातों की डिटेल जुटाई। जांच में कुल छह खातों का पता चला। इनमें तीन खाते चेतन के नाम पर, दो उसकी पत्नी सुजाता के नाम पर और एक खाता टीना के नाम दर्ज है।
इन खातों की स्थिति और लेन-देन की जानकारी से परिवार की वित्तीय स्थिति का अंदाजा लगाने की कोशिश की जा रही है।
तीन बैंक खातों में से दो बंद, एक डीमैट सक्रियजांच में पाया गया कि चेतन के कोटक महिंद्रा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा में खाते थे। इनमें से कोटक महिंद्रा और सेंट्रल बैंक के खाते पहले ही बंद हो चुके हैं।
हालांकि बैंक ऑफ बड़ौदा से जुड़ा उसका डीमैट खाता अभी भी चालू मिला है। इसी खाते में करीब 37 हजार रुपये की राशि दर्ज पाई गई है। पुलिस यह भी देख रही है कि इस खाते में हाल के वर्षों में कोई सक्रिय निवेश या लेन-देन हुआ है या नहीं।
परिजनों से भी लिया था उधारपत्नी सुजाता के नाम पर कोटक महिंद्रा और एचडीएफसी बैंक में दो खाते थे, जो काफी समय पहले बंद कर दिए गए थे। टीना के नाम पर कोटक महिंद्रा बैंक में एक खाता मिला, जिसमें केवल 39 पैसे शेष थे।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि चेतन समय-समय पर अपने भाई विष्णु से आर्थिक मदद मांगता था। कुछ अन्य रिश्तेदारों से उधार लेने की जानकारी भी पुलिस को मिली है। इससे यह संकेत मिलता है कि परिवार नियमित रूप से पैसों की कमी से जूझ रहा था।
10 साल में 10 लोन, फिर भी सिविल स्कोर ठीकसाल 2016 से अब तक चेतन ने अलग-अलग बैंकों और क्रेडिट कार्ड कंपनियों से कर्ज लिया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उसने करीब 10 लोन लिए। हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि वह अधिकतर किस्तें समय पर चुका रहा था, जिससे उसका सिविल स्कोर संतोषजनक पाया गया।
सूत्रों के मुताबिक, इन कर्जों की राशि आमतौर पर दो से तीन लाख रुपये के बीच थी। बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकांश लोन की अदायगी पूरी या लगभग पूरी हो चुकी थी।
पुलिस कर रही विस्तृत जांचएसीपी शालीमार गार्डन अतुल कुमार ने बताया कि बैंक खातों और वित्तीय दस्तावेजों की जांच में परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं पाई गई है। कुछ कर्ज परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर भी लिए गए थे, जिनकी पड़ताल जारी है।
पुलिस फिलहाल हर पहलू से मामले की जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या आर्थिक तंगी इस दुखद घटना की एक वजह बनी या इसके पीछे अन्य कारण भी जिम्मेदार थे।