अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में 8 आरोपी, 74 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल यानी SIT ने बुधवार, 23 सितंबर को आठ आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब 90 दिन की वैधानिक अवधि पूरी होने वाली थी। सुप्रीम कोर्ट को इससे पहले बताया गया था कि जांच एजेंसी 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करेगी।

चार्जशीट की लंबाई को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। आजतक और दैनिक जागरण ने इसे करीब 74 हजार पन्नों से अधिक बताया है। वहीं हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चार्जशीट, उसके परिशिष्ट और दूसरे दस्तावेज मिलाकर करीब 60 हजार पन्नों के हैं। इसलिए उपलब्ध रिपोर्टों में दस्तावेजों की कुल संख्या को लेकर अंतर है।

दैनिक जागरण के मुताबिक, जांच अधिकारी और अयोध्या के क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने अदालत में आरोप पत्र पेश किया। रिपोर्ट के अनुसार जांच के दौरान मंदिर परिसर से जुड़े सीसीटीवी फुटेज की जांच में चढ़ावे से जुड़ी 105 घटनाओं का उल्लेख किया गया है और 173 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। विवेचना के दौरान 101 पर्चे भी काटे गए।

जांच में आरोपी बनाए गए लोगों में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। इन सभी को जून में दर्ज एफआईआर के बाद गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस की जांच के मुताबिक, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास दानपात्रों की चाबियां थीं। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार जांच में उसके बयान और अन्य दस्तावेजों के आधार पर श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर पैसे लेने तथा उससे जुड़े लेनदेन की जानकारी चार्जशीट में शामिल की गई है।

अनुकल्प मिश्र और लवकुश मिश्र पर नकदी की गिनती से जुड़े होने की बात जांच में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने अनुकल्प के घर से करीब 20 लाख रुपये और लवकुश के घर से करीब 10 लाख रुपये बरामद किए थे। अन्य आरोपियों से भी नकदी और कीमती सामान बरामद होने का उल्लेख चार्जशीट से जुड़ी रिपोर्टों में है।
इससे पहले 21 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि SIT 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करेगी। केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया था कि पहली गिरफ्तारी के 90 दिन 25 सितंबर को पूरे हो रहे थे और निर्धारित अवधि में आरोप पत्र दाखिल नहीं होने पर आरोपियों को वैधानिक डिफॉल्ट बेल का अधिकार मिल सकता था।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष SIT की स्थिति रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज में चढ़ावे की रकम को कथित तौर पर अनधिकृत तरीके से हटाए जाने की 105 घटनाएं दर्ज हुईं। वहीं चांदी की ईंटों और कुछ अन्य मूल्यवान चढ़ावे की जांच में SIT ने कोई विसंगति नहीं मिलने की बात कही थी।

चार्जशीट दाखिल होने के साथ ही इस मामले की जांच का यह चरण पूरा हो गया है। अब आरोप पत्र में दर्ज आरोपों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया होगी।