सुरक्षा के नाम पर पड़ोसी की जासूसी नहीं चलेगी, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ की CCTV की सीमा

घर की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाना आम बात हो गई है, लेकिन इनकी दिशा अगर पड़ोसी के घर के आने-जाने वाले रास्ते पर है और इससे वहां आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, तो यह निजता का सवाल बन सकता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसी मुद्दे पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि कोई भी निजी CCTV कैमरा इस तरह नहीं लगाया जा सकता, जिससे पड़ोसी की निजता में दखल हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपने घर की सुरक्षा के लिए कैमरा लगाने का मतलब यह नहीं है कि उसके जरिए पड़ोसी के निजी जीवन पर नजर रखी जाए। यह मामला प्रयागराज के योगेंद्र मौर्य की ओर से दायर रिट याचिका से जुड़ा है। मौर्य ने अपने पड़ोसी के CCTV कैमरे की स्थिति पर आपत्ति जताई थी। उनका आरोप था कि कैमरे का फोकस उनके घर के आने-जाने के रास्ते पर है। इससे उनके घर में कौन आ रहा है और कौन जा रहा है, इसकी निगरानी संभव हो रही है। याचिकाकर्ता ने इसे अपने और अपने घर आने वाले लोगों की निजता में हस्तक्षेप बताया था।

पड़ोसी की निजता में दखल नहीं दे सकते निजी CCTV कैमरे

जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए 26 अक्टूबर 2026 को दिए आदेश में कहा कि निजी CCTV कैमरा इस तरह स्थापित या उसकी दिशा निर्धारित नहीं की जा सकती, जिससे पड़ोसी की निजता प्रभावित हो। कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण है, जहां घर या परिसर की सुरक्षा के लिए लगाए गए कैमरे दूसरे मकान के प्रवेश और निकास वाले हिस्से को भी रिकॉर्ड कर सकते हैं। याचिकाकर्ता की शिकायत का मुख्य आधार यही था कि पड़ोसी के कैमरे से उनके घर आने-जाने वाले परिवार के सदस्यों और मेहमानों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है।

क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता योगेंद्र मौर्य ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में बताया था कि उनके पड़ोसी ने अपने घर में CCTV कैमरा इस तरह लगाया है कि उसकी निगरानी उनके मकान के प्रवेश और निकास के रास्ते तक पहुंच रही है। मौर्य के मुताबिक, इस व्यवस्था के कारण उनके घर आने वाले मेहमानों और परिवार के सदस्यों की आवाजाही कैमरे में रिकॉर्ड हो सकती है। उनका तर्क था कि किसी व्यक्ति के घर आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर इस तरह नजर रखना उसकी निजता के अधिकार में हस्तक्षेप है। याचिकाकर्ता ने कैमरे की दिशा को लेकर आपत्ति जताई और इसे निजी जीवन में अनावश्यक दखल बताया। मामले की सुनवाई जस्टिस अजित कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने अपने आदेश में निजी CCTV कैमरे लगाने और उनकी दिशा तय करने के संबंध में स्पष्ट टिप्पणी की कि पड़ोसी की निजता प्रभावित करने वाले तरीके से कैमरा नहीं लगाया जा सकता।
हाईकोर्ट ने सीधे कैमरा हटाने का आदेश क्यों नहीं दिया?

इस मामले में हाईकोर्ट ने पड़ोसी का CCTV कैमरा हटाने या उसकी दिशा तत्काल बदलने का सीधा आदेश नहीं दिया। इसके बजाय कोर्ट ने योगेंद्र मौर्य को संबंधित जिलाधिकारी के समक्ष अपनी शिकायत के साथ आवेदन देने को कहा। खंडपीठ ने निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ता जिलाधिकारी के सामने आवेदन दाखिल करता है, तो अधिकारी को आवेदन मिलने की तारीख से एक महीने के भीतर उस पर विचार करके फैसला करना होगा। इस तरह कोर्ट ने कैमरे की वास्तविक स्थिति और उससे जुड़ी शिकायत पर प्रशासनिक स्तर पर निर्णय लेने का रास्ता दिया।

इसलिए कोर्ट के आदेश को यह समझना जरूरी है कि हाईकोर्ट ने पड़ोसी के कैमरे को तत्काल हटाने या उसकी दिशा बदलने का निर्देश नहीं दिया है। उसने निजता से जुड़ा सिद्धांत स्पष्ट करते हुए शिकायत पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी संबंधित जिलाधिकारी को सौंपी है।

CCTV लगाते समय किन बातों का रखें ध्यान?

इस आदेश से यह बात सामने आती है कि घर की सुरक्षा के लिए CCTV कैमरा लगाते समय उसकी दिशा और रिकॉर्डिंग का दायरा भी महत्वपूर्ण है। कैमरे का उद्देश्य अपने घर, प्रवेश द्वार या परिसर की सुरक्षा करना हो सकता है, लेकिन उसकी स्थिति ऐसी नहीं होनी चाहिए कि पड़ोसी के घर के निजी हिस्से या वहां आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियां अनावश्यक रूप से रिकॉर्ड हों। हालांकि, इस मामले में हाईकोर्ट ने किसी विशेष कैमरे को हटाने का अंतिम फैसला नहीं दिया है। याचिकाकर्ता को जिलाधिकारी के समक्ष आवेदन देने और संबंधित अधिकारी को एक महीने में उस पर निर्णय करने का निर्देश दिया गया है।