अखिलेश यादव का तंज, बोले- 'बेसुध को सब माफ', जनता इन्हें माफ करने के मूड में नहीं; अंत में लिखा- 'अलविदा!'

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बिना नाम लिए तीखा हमला बोला है। लखनऊ अग्निकांड में अपना बच्चा गंवाने वाली एक मां के साथ कथित तौर पर किए गए दुर्व्यवहार और अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति से इस तरह के व्यवहार की उम्मीद हो, उससे सभ्य भाषा और शालीन आचरण की अपेक्षा करना ही बेकार है।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर शनिवार को एक पोस्ट के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपनी पोस्ट की शुरुआत 'बेसुध को सब माफ!' लिखकर की। इसके बाद उन्होंने लखनऊ अग्निकांड का जिक्र करते हुए कहा कि जिस मां ने अपना बच्चा खोया हो, उसके साथ कैमरे के सामने सार्वजनिक रूप से बदजुबानी और दुर्व्यवहार किया जा सकता है, तो ऐसे लोगों से अच्छे शब्दों और अच्छे व्यवहार की उम्मीद करना व्यर्थ है।

सपा प्रमुख ने अपने पोस्ट में लिखा, जो लखनऊ अग्निकांड में उस एक दुखी मां के साथ, जिसने अपना बच्चा खोया हो, कैमरे के सामने सरेआम बदजुबानी और दुर्व्यवहार कर सकते हैं, ऐसे लोगों से सद्-वचन एवं सद्-व्यवहार की अपेक्षा ही निरर्थक है।

'व्यक्ति को पद का भी सम्मान करना चाहिए'

अखिलेश यादव ने अपने बयान में सिर्फ कथित दुर्व्यवहार पर सवाल नहीं उठाया, बल्कि पद की गरिमा को लेकर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को कम से कम अपने पद और उस जिम्मेदारी का सम्मान करना चाहिए, जिस पर वह बैठा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर कोई व्यक्ति अपने पद की गरिमा का सम्मान नहीं कर सकता तो उसे जल्द ही उस पद से हट जाना चाहिए या उस पद पर वापस जाना चाहिए, जहां उसे भविष्य में बैठना है।

उन्होंने कहा, व्यक्ति को स्वयं का नहीं तो उन पदों का सम्मान करना चाहिए जिस पर वह बैठे हैं या फिर शीघ्र ही वापस जाकर जिस पद पर उन्हें बैठना है।

अखिलेश यादव ने अपने पोस्ट में धार्मिक संदर्भ का इस्तेमाल करते हुए भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि मान्यता है कि वाणी में मां सरस्वती का वास होता है, लेकिन संबंधित व्यक्ति न तो परलोक की मां का सम्मान करना जानते हैं और न ही इस दुनिया में मौजूद मां का।

उन्होंने आगे लिखा, वाणी में सरस्वती मां का वास होता है, ये न परलोक की मां का सम्मान करना जानते हैं, न इहलोक की मां का। इनके तो दोनों लोक बिगड़ गए।
'हमने मन से माफ किया, क्योंकि किसी और के असर में हैं'

सपा अध्यक्ष ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनकी ओर से ऐसे लोगों को व्यक्तिगत रूप से माफ किया जा चुका है, क्योंकि उनके अनुसार वे किसी और के प्रभाव में हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि जो लोग जाने वाले हैं, उनसे शिकायत या शिकवा करने का कोई मतलब नहीं है।

उन्होंने लिखा, हमने इन्हें मन से माफ किया क्योंकि वो किसी और के असर में हैं। जाते हुए लोगों से क्या तो शिकवा, क्या शिकायत।

हालांकि, इसके तुरंत बाद अखिलेश यादव ने अपने बयान में जनता के रुख का जिक्र करते हुए सियासी संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि जनता ऐसे लोगों को माफ करने के लिए तैयार नहीं है। अपने सोशल मीडिया पोस्ट के अंत में उन्होंने सिर्फ एक शब्द लिखकर अपनी बात को विराम दिया- 'अलविदा!'

अखिलेश यादव की इस पोस्ट को उत्तर प्रदेश की सियासत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर किए गए एक और हमले के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया, लेकिन लखनऊ अग्निकांड में बच्चे को खोने वाली मां के साथ कथित व्यवहार का जिक्र करते हुए सरकार और उसके नेतृत्व पर सवाल खड़े किए।

इस पूरे मामले को लेकर अखिलेश यादव ने एक तरफ जहां पद की गरिमा, सार्वजनिक व्यवहार और संवेदनशीलता का मुद्दा उठाया, वहीं दूसरी ओर अपने बयान के जरिए आने वाले राजनीतिक बदलाव की ओर भी इशारा किया। उनका कहना है कि भले ही उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर संबंधित लोगों को माफ कर दिया हो, लेकिन जनता का रुख अलग है और वह उन्हें माफ करने के मूड में नहीं है।

अपने पोस्ट के अंतिम शब्द 'अलविदा!' के जरिए सपा प्रमुख ने साफ संकेत देने की कोशिश की कि वह इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ एक विवादित बयान तक सीमित नहीं मान रहे हैं, बल्कि इसे प्रदेश की राजनीति और जनता के मूड से जोड़कर देख रहे हैं।