अखिलेश यादव के सामने भिड़े सपा नेता, गाली-गलौज के बाद एटा-कासगंज की जिला इकाइयां भंग

लखनऊ में समाजवादी पार्टी की बैठक के दौरान दो वरिष्ठ नेताओं के बीच हुए विवाद के बाद पार्टी ने एटा और कासगंज की जिला इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह घटनाक्रम पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में हुआ, जब दोनों जिलों के संगठन और आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर बैठक चल रही थी। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, कार्रवाई के दायरे में दोनों जिलों के फ्रंटल संगठनों और अन्य संबद्ध इकाइयों को भी शामिल किया गया है।

बैठक में एटा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष जुगेंद्र सिंह यादव और सपा नेता मंजीत यादव के बीच पहले तीखी बहस हुई। रिपोर्टों के अनुसार, मंजीत यादव ने जुगेंद्र सिंह यादव की कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद विवाद बढ़ गया और दोनों नेताओं के बीच कथित तौर पर गाली-गलौज तक की स्थिति बन गई। बैठक में करीब 250 वरिष्ठ नेता और पदाधिकारी मौजूद थे।

अखिलेश यादव के सामने बढ़ा विवाद

यह बैठक लखनऊ स्थित सपा कार्यालय में एटा और कासगंज के पदाधिकारियों के साथ हुई थी। इसका उद्देश्य संगठन की स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा करना था। विवाद के दौरान मौजूद अन्य नेताओं ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन मामला शांत नहीं हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, इसके बाद अखिलेश यादव बैठक से चले गए।

टाइम्स ऑफ इंडिया की 21 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, अखिलेश यादव ने घटना के संदर्भ में पार्टी में अनुशासन और नेताओं के व्यवहार पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसी बातें होती रहती हैं और साथ मिलकर काम करने पर जोर दिया। रिपोर्ट में उनके बयान को धन से पैदा होने वाले अहंकार से जोड़कर बताया गया है।

एटा और कासगंज का पूरा संगठन भंग

विवाद के बाद सपा ने एटा और कासगंज की जिला कार्यकारिणियों को भंग कर दिया। इसके साथ दोनों जिलों के सभी फ्रंटल संगठनों और संबद्ध इकाइयों को भी भंग किए जाने की जानकारी सामने आई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई का आधार अनुशासनहीनता बताया गया है।

इंडिया टुडे ने पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया कि विवाद के बाद दोनों जिलों में संगठन का नए सिरे से गठन किया जा सकता है और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
क्या था विवाद का कारण?

उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, बैठक में पहले मंजीत यादव ने पार्टी के पिछले चुनावी प्रदर्शन और संगठन से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। इसके बाद जुगेंद्र सिंह यादव ने अपनी बात रखी। उनकी कुछ टिप्पणियों पर मंजीत यादव ने आपत्ति जताई, जिसके बाद दोनों के बीच बहस तेज हो गई। रिपोर्टों में दोनों के बीच हुए गाली-गलौज को पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया है।

मंजीत यादव पूर्व उत्तर प्रदेश विधान परिषद सभापति रमेश यादव के भतीजे बताए गए हैं, जबकि जुगेंद्र सिंह यादव एटा जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं।

2027 की तैयारियों के बीच संगठनात्मक बदलाव

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत जिला स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ा रही है। एटा में विधानसभा की चारों सीटें फिलहाल भाजपा के पास हैं। कासगंज की चार विधानसभा सीटों में भाजपा के पास तीन और सपा के पास एक सीट है।

फिलहाल पार्टी की ओर से दोनों जिलों में नई कार्यकारिणियों की घोषणा की तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है। ताजा स्थिति यह है कि एटा और कासगंज की जिला इकाइयां तथा संबंधित फ्रंटल संगठन भंग हैं और नए संगठन के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है।