वोटों की चोरी लोकतंत्र पर सीधा वार, एफआईआर दर्ज होनी चाहिए, गहलोत का तीखा हमला

जयपुर: मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान (SIR) के दौरान कथित रूप से कांग्रेस समर्थक वोटरों के नाम हटाने और फर्जी आपत्तियां दर्ज कराने को लेकर राजस्थान की राजनीति में जबरदस्त घमासान मचा हुआ है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली लगातार भाजपा और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं, भाजपा कांग्रेस पर पलटवार करते हुए बांग्लादेशी और रोहिंग्या मतदाताओं को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप लगा रही है।

इसी सियासी टकराव के बीच एक बार फिर अशोक गहलोत ने वोट चोरी के मामले को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को जनादेश पर डाका डालने की कोशिश करार दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए कहा कि राजस्थान में लोकतांत्रिक मूल्यों को जिस तरह कुचला जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। अलवर जिले के रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र का मामला इसका जीवंत उदाहरण है।

गहलोत ने लिखा कि एक ही दिन में 1383 फर्जी आपत्तियां दर्ज होना, वह भी भाजपा के बूथ लेवल एजेंट (BLA) के नाम से, कई सवाल खड़े करता है। जब संबंधित BLA स्वयं इन आपत्तियों पर किए गए हस्ताक्षरों से इनकार कर रहे हैं, तो साफ है कि मामला साधारण वोट कटने तक सीमित नहीं है। यह कूटरचित दस्तावेजों के सहारे सुनियोजित तरीके से जनमत को प्रभावित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के कई हिस्सों में इसी तरह के प्रयास किए गए, लेकिन समय रहते इनका पर्दाफाश हो गया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में प्रशासन और निर्वाचन आयोग की भूमिका पर गंभीर सवालिया निशान लगते हैं। लोकतंत्र की रक्षा करना चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन ऐसे मामलों से उसकी निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है। गहलोत ने राज्य के मुख्य निर्वाचन आयुक्त नवीन महाजन से स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है कि भविष्य में इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियां न हों।

उन्होंने मांग की कि इस कथित ‘जालसाजी’ में शामिल लोगों के साथ-साथ आंखें मूंदकर तमाशा देखने वाले अधिकारियों के खिलाफ तुरंत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए और कठोर कानूनी कार्रवाई हो। गहलोत ने जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत जिला कलेक्टरों और ईआरओ की भूमिका निभा रहे एसडीएम से भी अपील की कि वे किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव में न आएं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यह काम पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ होना चाहिए। अंत में गहलोत ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और लोकतंत्र की हत्या किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।