VMOU ने लॉन्च किया कर्मकांड सर्टिफिकेट कोर्स, 16 संस्कारों की मिलेगी विधिवत शिक्षा


वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय (VMOU), कोटा ने वर्ष 2026 से कर्मकांड में सर्टिफिकेट कोर्स की शुरुआत कर दी है। इस कोर्स के तहत विद्यार्थियों को हिंदू धर्म में प्रचलित पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों की विधिवत शिक्षा दी जाएगी। जन्म से लेकर मृत्यु तक किए जाने वाले सभी संस्कारों को इसमें शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय ने इसके लिए नया सिलेबस तैयार कर इसे लॉन्च किया है, जिसमें इच्छुक अभ्यर्थी अब प्रवेश ले सकते हैं।

डिस्टेंस लर्निंग के माध्यम से होगी पढ़ाई

यह सर्टिफिकेट कोर्स दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के तहत संचालित किया जाएगा। कोर्स की न्यूनतम अवधि छह महीने रखी गई है, जबकि अधिकतम समय सीमा एक वर्ष निर्धारित की गई है। यदि कोई विद्यार्थी छह महीने में कोर्स पूरा नहीं कर पाता है तो उसे अतिरिक्त छह महीने का विस्तार दिया जाएगा, लेकिन एक साल के भीतर कोर्स पूरा करना अनिवार्य होगा। कोर्स पूरा करने पर अभ्यर्थियों को कर्मकांड का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।

उम्र, जाति और धर्म की कोई बाध्यता नहीं

इस कोर्स में प्रवेश के लिए किसी भी प्रकार की आयु सीमा तय नहीं की गई है। पुरुषों के साथ-साथ छात्राएं भी इसमें पढ़ाई कर सकती हैं। किसी विशेष जाति या धर्म की बाध्यता नहीं है, यानी कोई भी इच्छुक व्यक्ति इस कोर्स में दाखिला ले सकता है। विश्वविद्यालय ने सीटों की संख्या पर भी कोई सीमा निर्धारित नहीं की है।

16 संस्कारों से लेकर पूजा-पद्धति तक का विस्तृत अध्ययन


कोर्स में हिंदू धर्म के 16 संस्कारों की संपूर्ण जानकारी दी जाएगी। इसमें जातकर्म संस्कार, मुंडन, यज्ञोपवीत, विवाह और अंत्येष्टि संस्कार तक की विधियां शामिल होंगी। इसके साथ ही मुहूर्त निकालना, पंचांग का ज्ञान, गृह शांति, तर्पण और श्राद्ध की प्रक्रिया भी पढ़ाई जाएगी। विद्यार्थियों को गणेश, दुर्गा, सूर्य, नवग्रह, शिव-पार्वती सहित विभिन्न देवी-देवताओं की पूजा-पद्धति का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा। रुद्राभिषेक, शतचंडी, दुर्गा सप्तशती पाठ, यंत्र-तंत्र, हवन, यज्ञ, गृह प्रवेश और प्रतिष्ठा पूजन जैसी विधियां भी कोर्स का हिस्सा हैं।

मंडल निर्माण और संस्कृत मंत्रोच्चार पर विशेष फोकस


इस कोर्स में विवाह और अन्य धार्मिक आयोजनों में बनने वाले मंडलों की संरचना और महत्व भी समझाया जाएगा। अलग-अलग देवताओं के अनुसार 108 प्रकार के मंडलों का निर्माण, उनमें उपयोग होने वाली भोग्य सामग्री और सबसे जटिल सर्वतोभद्र मंडल का ज्ञान भी पढ़ाया जाएगा। पढ़ाई का माध्यम हिंदी होगा, लेकिन विद्यार्थियों को संस्कृत मंत्रोच्चार की भी विधिवत शिक्षा दी जाएगी।

फीस और परीक्षा प्रणाली


कर्मकांड सर्टिफिकेट कोर्स की कुल फीस 4800 रुपये रखी गई है। यदि कोई विद्यार्थी पुस्तकें नहीं लेना चाहता है तो उसे फीस में 15 प्रतिशत की छूट मिलेगी। जनवरी में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की परीक्षा जून में होगी, जबकि जून सत्र के विद्यार्थियों की परीक्षा दिसंबर में आयोजित की जाएगी। कोर्स में दो लिखित पेपर और एक प्रैक्टिकल परीक्षा होगी, तीनों ही 100-100 अंकों की होंगी।

ऑनलाइन लेक्चर और सीमित क्लासेस की सुविधा

हालांकि यह कोर्स डिस्टेंस लर्निंग के तहत है, फिर भी विश्वविद्यालय समय-समय पर कुछ क्लासेस आयोजित करेगा, जिससे विद्यार्थियों को विषय की गहराई से समझ मिल सके। इसके अलावा यूट्यूब पर भी लेक्चर उपलब्ध कराए जाएंगे। कोर्स से संबंधित सभी पुस्तकें विस्तृत रूप में तैयार की गई हैं, जिनके आधार पर विद्यार्थी अध्ययन कर सकेंगे।

नए सिलेबस के साथ दोबारा लॉन्च


विश्वविद्यालय पहले भी 2014-15 में ऐसा कोर्स चला चुका है, जिसे बाद में बंद कर दिया गया था। अब 2026 में इसे पूरी तरह नए और अपडेटेड सिलेबस के साथ दोबारा शुरू किया गया है। उद्देश्य यह है कि कर्मकांड की शास्त्रीय परंपरा और उसके वैज्ञानिक पक्ष को संरक्षित किया जा सके और नई पीढ़ी तक सही विधि-पद्धति पहुंचाई जा सके।