जयपुर: मनरेगा के नाम परिवर्तन और उसमें किए गए संशोधनों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर लगातार सड़क से लेकर प्रेस मंच तक मुखर नजर आ रही है। इसी कड़ी में शनिवार को कांग्रेस ने प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ‘वीबी जी राम जी एक्ट’ पर सवाल उठाए और मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में भी शहर कांग्रेस नेताओं ने इस कानून को लेकर भाजपा को कठघरे में खड़ा किया।
पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने प्रेस वार्ता के दौरान बड़ा दावा करते हुए कहा कि ‘वीबी जी राम जी एक्ट’ में भगवान राम का नाम तक दर्ज नहीं है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, “अगर भाजपा का कोई भी नेता यह साबित कर दे कि इस कानून में भगवान राम का नाम है, तो मैं उसे एक लाख रुपये का इनाम दूंगा।” खाचरियावास ने आरोप लगाया कि भाजपा को राम के नाम पर वोट तो चाहिए, लेकिन कानून में राम का नाम रखने में उन्हें आपत्ति है। उन्होंने कहा कि भाजपा सिर्फ भ्रम फैलाने का काम कर रही है और भगवान राम का अपमान कर रही है। उनके अनुसार भाजपा के केंद्रीय मंत्री और नेता लगातार जनता को गुमराह कर रहे हैं, जिन्हें शर्म आनी चाहिए।
खाचरियावास ने आगे कहा कि महात्मा गांधी का नाम मनरेगा से हटा दिया गया, लेकिन कम से कम ‘राम’ का नाम तो जोड़ा जा सकता था। उन्होंने याद दिलाया कि महात्मा गांधी भगवान राम के परम भक्त थे और जब उन्हें गोली लगी थी, तब उनके मुख से “हे राम” ही निकला था। ऐसे में गांधी और राम—दोनों के नामों को हटाना भाजपा की मानसिकता को दर्शाता है।
महात्मा गांधी के नाम को मिटाने की साजिश: कांग्रेस का आरोपपूर्व मंत्री ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह से मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाया गया है, उससे आशंका पैदा होती है कि कहीं भविष्य में भारतीय नोटों से भी गांधीजी की तस्वीर न हटा दी जाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के भीतर इस तरह की साजिशें चल रही हैं। खाचरियावास ने ऐलान किया कि ‘वीबी जी राम जी एक्ट’ में भगवान राम का नाम नहीं होने को लेकर भाजपा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी और कानूनी नोटिस भी भेजा जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अब भाजपा ने अपने मंत्रियों को अलग-अलग जिलों में भेजकर ‘जी राम जी’ एक्ट के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी सौंपी है, लेकिन सच्चाई यह है कि उन्हें खुद इस कानून की कोई जानकारी नहीं है। खाचरियावास ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा मंत्रियों के दरवाजे आम जनता के लिए हमेशा बंद रहते हैं।
60:40 के फॉर्मूले से नहीं टिक पाएगी योजना: रोहित बोहराजयपुर कांग्रेस के प्रभारी रोहित बोहरा ने कहा कि भाजपा सरकार ने सिर्फ मनरेगा का नाम ही नहीं बदला, बल्कि उसके मूल कानून से भी छेड़छाड़ की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजीव गांधी द्वारा 73वें और 74वें संविधान संशोधन के तहत पंचायत राज व्यवस्था को जो मजबूती दी गई थी, मौजूदा सरकार उसे कमजोर कर रही है। बोहरा ने कहा कि हर साल गांवों के विकास के नाम पर जो करीब 80 हजार करोड़ रुपये खर्च होते थे, वह राशि अब जमीन पर नजर नहीं आ रही है।
उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2022 में कराए गए कार्यों का भुगतान आज तक कई सरपंचों को नहीं मिला है। पहले केंद्र सरकार 90 प्रतिशत हिस्सा देती थी, लेकिन अब इसे घटाकर 60:40 कर दिया गया है। रोहित बोहरा ने कहा, “मैं गारंटी से कहता हूं कि राज्यों के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वे इस अनुपात में योजना चला सकें।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब पेंशन तक तीन-तीन महीने में दी जा रही है, तो मनरेगा पर खर्च कैसे होगा। उनके मुताबिक, इस स्वरूप में यह योजना ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं है।
कांग्रेस का ऐलान: एक्ट वापस लेने तक जारी रहेगा संघर्षकांग्रेस विधायक रफीक खान ने केंद्र सरकार पर गरीबों से रोजगार छीनने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह सरकार गरीबों को फिर से बंधुआ मजदूरी की ओर धकेलना चाहती है। रफीक खान ने साफ कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर सदन से लेकर सड़क तक लगातार संघर्ष करती रहेगी और केंद्र सरकार को यह कानून वापस लेना ही पड़ेगा।
जयपुर शहर कांग्रेस अध्यक्ष आर. आर. तिवाड़ी ने कहा कि गांवों से हो रहे पलायन को रोकने के लिए कांग्रेस सरकार ने मनरेगा कानून लागू किया था। आंधी, बारिश और अकाल जैसी परिस्थितियों में भी लोगों को गांव में ही रोजगार मिलता था, लेकिन मौजूदा सरकार ने इस व्यवस्था को कमजोर करने का काम किया है। इसके विरोध में कांग्रेस आंदोलन तेज करेगी। उन्होंने जानकारी दी कि रविवार को जयपुर के शहीद स्मारक पर एक दिवसीय उपवास और मौन सत्याग्रह किया जाएगा। यह सत्याग्रह सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा, जिसमें प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी मौजूद रहेंगे।