राजस्थान में नशे के खिलाफ अभियान लगातार तेज किया जा रहा है, फिर भी अवैध तस्करी और खेती की घटनाएं प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनी हुई हैं। एक तरफ जहां बाहरी राज्यों से मादक पदार्थों की सप्लाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के कुछ इलाकों में चोरी-छिपे अफीम की खेती भी की जा रही है। इसी कड़ी में उदयपुर जिले से बड़ी कार्रवाई की खबर सामने आई है, जहां एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर अवैध अफीम की फसल पर बड़ा प्रहार किया है।
170 एकड़ में फैली थी अफीम की खेतीकार्रवाई के दौरान करीब 170 एकड़ भूमि पर उगाई गई अवैध अफीम की फसल पकड़ी गई। अधिकारियों के अनुसार, यदि यह फसल बाजार तक पहुंचती तो इसकी अनुमानित कीमत लगभग 275 करोड़ रुपये होती। इतनी बड़ी मात्रा में अवैध खेती का खुलासा होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चौंकाने वाला है।
‘ऑपरेशन अंत:स्फोट’ के तहत संयुक्त अभियानयह कार्रवाई ‘ऑपरेशन अंत:स्फोट’ के अंतर्गत की गई। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और उदयपुर पुलिस ने जिले के कोटड़ा क्षेत्र के तीन गांवों—सामोली, खूणा और पीपली—में संयुक्त रूप से छापेमारी की। यहां उच्च गुणवत्ता वाली अफीम के लगभग पांच लाख पौधे पाए गए, जिन्हें मौके पर ही उखाड़कर नष्ट कर दिया गया।
अधिकारियों का मानना है कि इन पौधों से बड़ी मात्रा में अवैध अफीम तैयार कर बाजार में खपाई जानी थी। समय रहते की गई इस कार्रवाई से करोड़ों रुपये की मादक सामग्री को अवैध बाजार में पहुंचने से रोक लिया गया।
तीन एजेंसियों की समन्वित कार्रवाईएनसीबी के क्षेत्रीय निदेशक घनश्याम सोनी के मुताबिक, कोटड़ा इलाके में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की सूचना मिली थी। प्रारंभिक इनपुट एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मिला, जिसके बाद इसकी जानकारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को दी गई। जांच में सूचना सही पाए जाने पर एनसीबी, एएनटीएफ और उदयपुर पुलिस ने मिलकर संयुक्त अभियान चलाया।
तीनों एजेंसियों की टीमों ने क्षेत्र को घेरकर करीब पांच लाख अफीम के पौधों को नष्ट किया। पूरी प्रक्रिया का पंचनामा तैयार किया गया। इसके बाद उदयपुर पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
संदिग्ध हिरासत में, जांच जारीकार्रवाई के दौरान कुछ संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध खेती के पीछे सक्रिय नेटवर्क की पहचान करने के लिए गहन जांच की जा रही है।
राजस्थान सरकार पहले ही नशे के खिलाफ सख्त रुख अपना चुकी है और इसी उद्देश्य से एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया था। उदयपुर में की गई यह कार्रवाई प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार पर लगाम कसने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।