जयपुर में चौंकाने वाली कार्रवाई, JDA ने भगवान शिवजी के नाम से भेजा अतिक्रमण नोटिस

राजस्थान की राजधानी जयपुर में विकास प्राधिकरण (JDA) का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। प्राधिकरण द्वारा वैशाली नगर क्षेत्र स्थित शिव मंदिर के बाहर एक ऐसा नोटिस चस्पा किया गया, जिसने लोगों को आश्चर्य में डाल दिया। नोटिस सीधे भगवान शिव के नाम जारी किया गया है, जिसमें सात दिनों के भीतर कथित अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया गया है।

नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि निर्धारित समय सीमा में अतिक्रमण हटाकर प्राधिकरण को सूचित करना अनिवार्य है। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि समय रहते कार्रवाई न होने पर सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

कैद और जुर्माने की धमकी

जेडीए के इस नोटिस में लिखा है कि यदि निर्दिष्ट समय में अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो संबंधित प्रावधानों के तहत एक वर्ष तक की जेल और एक लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा भी लागू हो सकती है। यह नोटिस मंदिर के मुख्य द्वार पर चस्पा किया गया है।

चौंकाने वाली बात यह है कि नोटिस किसी पुजारी, प्रबंधक या मंदिर समिति के नाम नहीं, बल्कि सीधे तौर पर ‘भगवान भोलेनाथ’ के नाम जारी किया गया है। मंदिर में शिवजी के साथ-साथ कई अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं।

जेडीए की जमीन पर बना है मंदिर

जानकारी के अनुसार, यह शिव मंदिर उसी जमीन पर स्थित है जो जयपुर विकास प्राधिकरण के दायरे में आती है। दशकों पहले जेडीए ने ही इस मंदिर को यहां स्थानांतरित करवाया था। पहले मंदिर किसी अन्य स्थान पर था, जिसे योजनाबद्ध तरीके से यहां शिफ्ट कराया गया था।

भगवान के नाम नोटिस भेजे जाने से मंदिर के पुजारी और श्रद्धालुओं में गहरा रोष है। उनका कहना है कि यह न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कदम है, बल्कि प्रशासन की गंभीर लापरवाही भी दर्शाता है।

श्रद्धालुओं का विरोध: माफी और कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों और भक्तों ने इस नोटिस को अविलंब रद्द करने की मांग की है। इसके साथ ही नोटिस जारी करने वाले अधिकारी पर कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग भी जोर पकड़ रही है। श्रद्धालुओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।

प्राधिकरण की चुप्पी और आंतरिक जांच

इस विवाद पर जेडीए के अधिकारियों ने आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। कैमरे के सामने कोई भी अधिकारी प्रतिक्रिया देने से बच रहा है। हालांकि, अनौपचारिक बातचीत में एक अधिकारी ने बताया कि यह जांच की जा रही है कि नोटिस इस तरह से कैसे जारी हो गया।

कुछ अधिकारियों का तर्क है कि पुजारी नोटिस लेने को तैयार नहीं थे, इसलिए मंदिर के नाम पर नोटिस चस्पा करना पड़ा। उनका कहना है कि “केवल प्राप्तकर्ता का नाम गलत लिखा गया है, बाकी प्रक्रिया सामान्य है।”

इस पूरे प्रकरण ने सोशल मीडिया पर भी खूब हलचल मचा दी है। लोग इसे प्रशासनिक अव्यवस्था का उदाहरण बताते हुए तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं।