प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद की गूंज अब राजस्थान तक पहुंच चुकी है। शंकराचार्य के समर्थन में और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के विरोध में 27 जनवरी को पूरे राजस्थान में व्यापक प्रदर्शन किए जाएंगे। गौ प्रतिष्ठा आंदोलन, गौ सेवादिश सहित कई हिंदू संगठनों ने एकजुट होकर प्रदेशव्यापी आंदोलन का एलान किया है। इन संगठनों की ओर से राजस्थान के सभी जिलों और तहसील मुख्यालयों पर एक साथ विरोध प्रदर्शन किए जाने की तैयारी की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इस आंदोलन के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले जलाने की भी योजना बनाई गई है। राजधानी जयपुर में इस अवसर पर एक प्रतिकार यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा गोविंद देव जी मंदिर से शुरू होकर कलेक्ट्रेट तक पहुंचेगी। खास बात यह है कि इस प्रतिकार यात्रा में बड़ी संख्या में गौ माता को भी शामिल किए जाने की बात कही जा रही है, जिससे आंदोलन को धार्मिक और सांकेतिक रूप से और मजबूत संदेश देने की तैयारी है।
हिंदू संगठनों ने योगी सरकार के रुख पर जताया आक्रोशहिंदू संगठनों ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है। संगठनों ने साफ किया है कि 27 जनवरी को सुबह 11 बजे पूरे प्रदेश में एक साथ विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस संबंध में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठनों के प्रतिनिधियों ने शंकराचार्य के धरने को लेकर गहरी पीड़ा जताई और यूपी सरकार के रवैये को असंवेदनशील बताया।
प्रदर्शन का एलान करते हुए हिंदू संगठनों ने कहा कि जिस तरह से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ व्यवहार किया गया, वह निंदनीय है। उन्होंने योगी सरकार पर हठधर्मी रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि यह मामला सिर्फ एक संत का नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज के सम्मान से जुड़ा हुआ है।
क्या है शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा पूरा विवाद?दरअसल, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रविवार (18 जनवरी) को आरोप लगाया था कि मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रयागराज माघ मेले के दौरान प्रशासन ने उन्हें संगम नोज की ओर जाने से रोक दिया। उनका कहना था कि जब वह अपने अनुयायियों के साथ पवित्र स्नान के लिए संगम घाट की ओर बढ़ रहे थे, तभी पुलिसकर्मियों ने बीच रास्ते में उन्हें रोक लिया। हालात ऐसे बने कि उन्हें बिना स्नान किए ही अपने अखाड़े में लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।
शंकराचार्य के अनुसार, उनकी पालकी को रास्ते में ही रोक दिया गया और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी करने के आरोप भी लगाए गए। इस घटना के बाद मौके पर मौजूद शंकराचार्य समर्थकों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया और धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। हालात बिगड़ते देख शंकराचार्य ने मेला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
विवाद यहीं नहीं थमा। प्रयागराज मेला अथॉरिटी की ओर से शंकराचार्य को दो अलग-अलग नोटिस जारी किए गए, जिसके बाद संत समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों में नाराजगी और ज्यादा गहरा गई। इसी नाराजगी के चलते अब राजस्थान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की गई है, जिससे यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक व सामाजिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है।