राजस्थान में शराब की दुकानों को देर रात तक खोलने की संभावनाओं ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। नई आबकारी नीति को लेकर उठी चर्चाओं के बीच सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। जयपुर में गुरुवार को हवामहल से विधायक बालमुकुंदाचार्य ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि फिलहाल सरकार ने इस विषय पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। वहीं दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस प्रस्ताव को सामाजिक मूल्यों और महिला सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए खुला विरोध दर्ज कराया है।
सरकार ने अभी नहीं लिया कोई अंतिम फैसलाविधायक बालमुकुंदाचार्य के अनुसार, शराब की दुकानों के संचालन समय को बढ़ाने को लेकर कुछ सुझाव सरकार के पास जरूर आए हैं, लेकिन उन पर अभी केवल विचार-विमर्श चल रहा है। उन्होंने कहा, “इस मुद्दे पर सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर समीक्षा की जा रही है। बिना पूरी जांच-पड़ताल के कोई भी निर्णय लेना ठीक नहीं होगा। इसलिए फिलहाल इस पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है।”
अपराध और असुरक्षा बढ़ने की आशंकापूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बहस को गंभीर बताते हुए याद दिलाया कि उनकी सरकार ने वर्ष 2018 में देर रात शराब बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा कि रात के समय शराब की बिक्री बढ़ने से अपराध, घरेलू हिंसा और महिलाओं के प्रति असुरक्षा की घटनाओं में इजाफा होता है। इसी खतरे को देखते हुए उनकी सरकार ने शराब दुकानों के लिए रात 8 बजे की समय सीमा तय की थी, जिसे राज्यभर में खासकर महिलाओं और परिवारों का व्यापक समर्थन मिला था।
सरकार को चेतावनी भरे शब्दअशोक गहलोत ने भाजपा सरकार की इस सोच को जनहित के खिलाफ करार दिया। उन्होंने कहा कि अगर नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी को नजरअंदाज कर ऐसे फैसले लिए गए, तो इसका सीधा असर कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह किसी भी तरह का ऐसा कदम उठाने से बचे, जिससे समाज में असंतुलन और भय का माहौल बने।
1 अप्रैल से शराब होगी महंगीइसी बीच राजस्थान सरकार ने वर्ष 2025 से 2029 तक लागू होने वाली नई आबकारी नीति में कई अहम बदलावों की घोषणा की है। इस नीति के तहत 1 अप्रैल से 750 एमएल अंग्रेजी शराब की बोतल पर 20 रुपये और बीयर की बोतल पर करीब 5 रुपये तक की कीमत बढ़ाई जाएगी। इसके अलावा शराब की दुकानों को स्कूल-कॉलेज और धार्मिक स्थलों से कम से कम 150 मीटर दूर रखने का प्रावधान किया गया है। लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ आबकारी आयुक्त को अधिक अधिकार दिए गए हैं, ताकि व्यवस्था को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा सके।