‘खेजड़ी कटेगी तो राजस्थान का अस्तित्व खतरे में…’, खाचरियावास का BJP सरकार पर तीखा हमला, कहा- पूरा राज्य होगा आंदोलन की चपेट में

बीकानेर से शुरू हुआ खेजड़ी बचाओ आंदोलन अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। पिछले दो दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे आंदोलनकारियों को अब राजनीतिक हस्तियों का भी समर्थन मिलने लगा है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, RLP प्रमुख हनुमान बेनीवाल और कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास शामिल हैं। खाचरियावास ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि खेजड़ी सिर्फ एक पेड़ नहीं है, बल्कि राजस्थान की संस्कृति और आत्मा का प्रतीक है। उनका कहना है कि अगर सरकार ने पेड़ों की कटाई रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस पूरे राज्य में इस आंदोलन को और तेज करेगी।

सरकार ने कमजोर किए पर्यावरण कानून – खाचरियावास

खाचरियावास ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने पेड़ कटाई को लेकर पहले से मौजूद सख्त कानूनों को कमजोर कर दिया है। इसके चलते जीवनदायिनी खेजड़ी जैसे पेड़ संकट में हैं। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि वही सरकार जो विकास की बातें करती है, अब पर्यावरण की रीढ़ खेजड़ी को खतरे में डाल रही है। खेजड़ी की कटाई का मतलब राजस्थान की आत्मा पर हमला है।”

खेजड़ी की कटाई से छिन रहा सुकून

प्रताप सिंह खाचरियावास ने आगे कहा कि राजस्थान की हर मां, बेटी और बहन चाहती है कि खेजड़ी सुरक्षित रहे। उनका कहना था, “खेजड़ी बचेगी तो पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा तो जीवन सुरक्षित रहेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में खेजड़ी का दृश्य आज भी लोगों को आनंद और सुकून देता है, लेकिन कुछ लोग अब इसे छीनने की कोशिश कर रहे हैं।”

जीवन का आधार खेजड़ी

खाचरियावास ने खेजड़ी के महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि खेजड़ी का पत्ता पशुओं का पोषण करता है, लूम बकरियां खाती हैं, जिनका दूध ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी है। इसकी सूखी टहनियों का इस्तेमाल ईंधन के रूप में होता है और पेड़ फिर से पनप जाता है। यह ऐसा अद्वितीय वृक्ष है जो बिना नुकसान पहुँचाए भी अत्यंत उपयोगी रहता है।

कांग्रेस खेजड़ी संरक्षण आंदोलन में जनता के साथ

बयान के अंत में खाचरियावास ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस आंदोलन में जनता के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए खेजड़ी संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। अन्यथा यह आंदोलन केवल बीकानेर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे राजस्थान में फैल जाएगा।