राजस्थान: भ्रूण लिंग जांच रैकेट का भंडाफोड़, 80 हजार में तय होती थी डील, 6 आरोपी रंगे हाथों दबोचे गए

राजस्थान में अवैध भ्रूण लिंग जांच का मामला एक बार फिर सामने आया है। इससे पहले 8 जनवरी को उदयपुर में महिला डॉक्टर और एक दलाल की गिरफ्तारी के बाद यह मुद्दा चर्चा में था, और अब कोटपूतली–बहरोड़ क्षेत्र से एक और बड़ा खुलासा हुआ है। हरियाणा से सटे राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है। नारनौल पीएनडीटी प्राधिकरण की कार्रवाई में सामने आया है कि यह नेटवर्क 80 हजार रुपये में गर्भ में पल रहे भ्रूण का लिंग बताने का सौदा करता था।

NDTV राजस्थान की खबर के अनुसार, नोडल अधिकारी डॉ. विजय यादव के नेतृत्व में जिला प्रशासन की विशेष रेड टीम ने कोटपूतली–बहरोड़ क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से छापा मारा। इस दौरान छह आरोपितों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया, जो गर्भवती महिलाओं को अवैध रूप से भ्रूण लिंग जांच कराने के लिए राजस्थान ला रहे थे। आरोपितों के पास से सौदे से जुड़े कई अहम सबूत भी बरामद किए गए हैं।

छापेमारी में मिले अहम सबूत

रेड के दौरान टीम को पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन, अन्य मेडिकल उपकरण, चार कारें, दो मोटरसाइकिलें, मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट्स, वीडियो रिकॉर्डिंग और डिजिटल भुगतान से संबंधित पुख्ता प्रमाण मिले। इन सभी साक्ष्यों के आधार पर थाना शहर नारनौल में पीसीपीएनडीटी एक्ट, बीएनएस और एनएमसी एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

डिकोय महिला बनाकर रची गई पूरी योजना

जिला समुचित प्राधिकरण पीएनडीटी नारनौल को 24 दिसंबर 2025 को सूचना मिली थी कि हरियाणा की गर्भवती महिलाओं को सुनियोजित ढंग से राजस्थान के कोटपूतली इलाके में ले जाकर भ्रूण लिंग जांच कराई जा रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए 16 जनवरी को जिला नोडल अधिकारी पीएनडीटी डॉ. विजय कुमार यादव की अगुवाई में एक विशेष टीम गठित की गई। सच सामने लाने के लिए सरकारी योजना ‘बेटी बचाओ’ के तहत एक महिला को डिकोय के रूप में तैयार किया गया। गिरोह के संपर्ककर्ता से व्हाट्सएप कॉल और चैट के जरिए बातचीत की गई, जिसमें 80 हजार रुपये में भ्रूण लिंग जांच का सौदा तय हुआ। रकम फोनपे के जरिए तीन किश्तों में ट्रांसफर कराई गई, जिसके स्क्रीनशॉट जांच टीम के पास सुरक्षित हैं।

नारनौल से कोटपूतली तक चला पीछा

18 जनवरी को आरोपितों ने गर्भवती महिला को नारनौल के रघुनाथपुरा स्थित हनुमान मंदिर के पास बुलाया। वहां से उसे अलग-अलग वाहनों में बैठाकर कोटपूतली ले जाया गया। पीएनडीटी टीम लगातार पूरे रास्ते आरोपितों पर नजर रखे हुए थी। कोटपूतली के मोहल्ला बड़ाबास स्थित एक मकान में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिए भ्रूण लिंग जांच की जा रही थी। जैसे ही महिला डिकोय ने तय संकेत दिया, टीम ने मौके पर दबिश देकर तीन आरोपितों को वहीं पकड़ लिया।

मौके पर मिली दूसरी गर्भवती महिला, आरोपी फरार


छापेमारी के दौरान एक और गर्भवती महिला भी उस मकान में मौजूद मिली, जिसकी पहले ही जांच की जा चुकी थी। हालांकि उसका पति मौके से फरार होने में सफल रहा। इसके बाद कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए मुख्य सौदागर को चरखी दादरी से और एक अन्य आरोपी को सतनाली क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपितों की पहचान

गिरफ्तार किए गए आरोपितों में चरखी दादरी के कादमा गांव निवासी मुख्य सौदागर बिरेंद्र, सतनाली क्षेत्र से सुनील, हमीदपुर निवासी जितेंद्र, राजस्थान के कोटपूतली के गांव कंवरपुरा निवासी धर्मवीर, कोटपूतली के मोहल्ला बड़ा बास निवासी आनंद जांगिड़ और महेंद्रगढ़ जिले के मुंडियाखेड़ा निवासी पवन कुमार शामिल हैं। सभी आरोपितों को नारनौल लाकर पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। इन सभी के खिलाफ पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 की धारा 3, 3बी, 4, 5, 6, 18, 29 तथा नियम 3ए, 9, 10, 18 के साथ-साथ बीएनएस की धारा 318, 61 और एनएमसी एक्ट की धारा 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित ठिकानों की भी पड़ताल कर रही हैं।