राजस्थान में 2026 का पहला छात्र सुसाइड मामला, हनुमानगढ़ मेडिकल कॉलेज के छात्र ने हॉस्टल में की आत्महत्या

राजस्थान में छात्र आत्महत्याओं का दर्दनाक सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही प्रदेश से एक बेहद झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। हनुमानगढ़ मेडिकल कॉलेज के एक छात्र ने हॉस्टल के अपने कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना को राजस्थान में वर्ष 2026 का पहला बड़ा स्टूडेंट सुसाइड मामला माना जा रहा है, जिसने शिक्षा जगत से लेकर प्रशासन तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

कोटपुतली के संदीप का डॉक्टर बनने का सपना अधूरा

मृतक छात्र की पहचान संदीप गुर्जर के रूप में हुई है। संदीप मूल रूप से जयपुर के नजदीक कोटपुतली क्षेत्र के एक गांव का रहने वाला था। वह हनुमानगढ़ मेडिकल कॉलेज में तृतीय वर्ष का छात्र था और डॉक्टर बनने का सपना संजोए हुए था। परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन अचानक मिली इस दुखद खबर ने न सिर्फ घरवालों बल्कि पूरे कॉलेज परिसर को शोक में डुबो दिया है।

जब रूममेट को हुआ शक, खुला दर्दनाक राज

इस हृदयविदारक घटना का पता उस समय चला, जब संदीप का रूममेट हॉस्टल पहुंचा। उसने कमरे का दरवाजा खटखटाया और संदीप को कई बार फोन किया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। अनहोनी की आशंका होने पर अन्य छात्रों और कॉलेज प्रशासन को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची हनुमानगढ़ जंक्शन पुलिस ने दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का दृश्य देखकर हर कोई सन्न रह गया।

FSL टीम ने की जांच, पुलिस हर एंगल से पड़ताल में जुटी

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ सिटी मीनाक्षी और थाना प्रभारी रामचंद्र कसवां ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम को भी बुलाया गया, जिसने कमरे से साक्ष्य जुटाकर बारीकी से जांच की। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह मामला केवल आत्महत्या तक सीमित है या इसके पीछे कोई अन्य वजह भी छिपी हुई है।

परिजनों का टूटा सब्र, जांच जारी

घटना की सूचना मिलते ही संदीप के परिजन कोटपुतली से हनुमानगढ़ पहुंचे। बेटे का शव देखकर परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पुलिस ने परिजनों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव उन्हें सौंप दिया। सीओ सिटी मीनाक्षी के अनुसार, फिलहाल मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस छात्र के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और दोस्तों से पूछताछ कर रही है, ताकि आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जा सके।