प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बांसवाड़ा दौरा एक बार फिर सुर्खियों में तब आया, जब उन्होंने अपने स्वभाव से कुछ अलग हटकर भाजपा नेताओं से आत्मीय संवाद किए। आमतौर पर प्रधानमंत्री का स्वागत सीमित औपचारिकताओं तक सिमटा रहता है, लेकिन इस बार उदयपुर एयरपोर्ट और बांसवाड़ा के नापदा हेलिपैड पर उनके रवैये में एक खास अपनापन नजर आया।
जैसे ही प्रधानमंत्री दिल्ली से उदयपुर पहुंचे, भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. सतीश पूनिया से उन्होंने मुस्कराकर हालचाल पूछे और राजस्थान-हरियाणा से जुड़े राजनीतिक मसलों पर संक्षिप्त लेकिन मार्गदर्शक संवाद किया। लौटते समय उन्होंने सांसद दामोदर अग्रवाल से भी बातचीत की, जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि संगठनात्मक ड्यूटी को लेकर वे कितने सजग हैं।
मावली के पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी से प्रधानमंत्री ने सिक्किम के हालात पूछे, जिस पर जोशी ने उन्हें बताया कि उनके मार्गदर्शन में दो बार सिक्किम का दौरा किया और सब कुछ बेहतर है। उदयपुर ग्रामीण के पूर्व जिलाध्यक्ष चंद्रगुप्त सिंह ने जब प्रधानमंत्री को पुष्पगुच्छ भेंट किया और सभा की सफलता की शुभकामनाएं दीं, तो प्रधानमंत्री ने विनम्रता से कहा कि यह पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत का परिणाम है।
नापदा हेलिपैड पर जब प्रधानमंत्री का स्वागत राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, प्रेमचंद बैरवा, केंद्रीय मंत्री और प्रदेशाध्यक्ष द्वारा किया जा रहा था, उसी दौरान प्रधानमंत्री ने दीया कुमारी से रुककर उनकी माता के स्वास्थ्य की जानकारी ली।
मंच पर मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से उन्होंने उनकी पुत्रवधू निहारिका सिंह के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता प्रकट की और हालचाल पूछे। यह सभी संवाद दर्शाते हैं कि प्रधानमंत्री भले ही सर्वोच्च पद पर हों, लेकिन निजी संबंधों को निभाने में हमेशा तत्पर रहते हैं। इस दौरान वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी ने भी प्रधानमंत्री से परिचय कराया, जिस पर उन्होंने हँसते हुए बहुत बढ़िया कहा। रवाना होते समय पूर्व केंद्रीय मंत्री कनकमल कटारा से भी प्रधानमंत्री ने संवाद कर आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी की योजनाओं के क्रियान्वयन की निरंतरता बनाए रखने का संकेत दिया।
लेकिन सबसे दिलचस्प पल तब सामने आया जब प्रधानमंत्री की नजर बांसवाड़ा के पूर्व विधायक भवानी जोशी पर पड़ी। उन्होंने मुस्कराते हुए पूछा, “मेरे लिए पकौड़े लाए क्या?” इस पर भवानी जोशी ने जवाब दिया, “सर, आदेश देते तो जरूर लाता, अब आगे से ध्यान रखूंगा।”
यह प्रसंग इसलिए भी खास रहा क्योंकि जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने बांसवाड़ा प्रवास के दौरान भवानी जोशी की दुकान पर समोसे और पकौड़े खाए थे। वर्षों बाद भी प्रधानमंत्री को यह स्मृति याद रही, जो उनके स्वभाव की आत्मीयता और मानवीयता को दर्शाता है। यह दौरा केवल प्रशासनिक या राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का उदाहरण बनकर उभरा, जिससे कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ।