राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) एक के बाद एक घूसखोर अधिकारियों पर शिकंजा कस रही है। इसी कड़ी में धौलपुर जिले में एक पटवारी को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है। खास बात यह है कि यह वही पटवारी है जो करीब दस वर्ष पहले भी एसीबी की ट्रैप कार्रवाई में पकड़ा जा चुका है और जेल जा चुका है।
पिछले कुछ दिनों में एसीबी की कार्रवाई लगातार सुर्खियों में रही है। एक दिन पहले कोटपूतली-बहरोड़ जिले में साढ़े पांच बीघा जमीन के मामले में 15 हजार रुपये की रिश्वत मांगने वाले एक पटवारी को गिरफ्तार किया गया था। वहीं 24 फरवरी को सवाई माधोपुर में एक ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) जगदीश प्रसाद मीणा को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए दबोचा गया। इन कार्रवाइयों के तुरंत बाद 25 फरवरी को धौलपुर में यह बड़ी ट्रैप कार्रवाई सामने आई।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांचएसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ज्ञानचंद मीणा ने बताया कि जयपुर स्थित एसीबी मुख्यालय को एक परिवादी ने लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बसई सामंता ग्राम पंचायत में पदस्थापित पटवारी वीरेंद्र शर्मा जमीन का दाखिला खोलने के बदले 50 हजार रुपये की अवैध मांग कर रहा है।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पहले पूरे मामले का सत्यापन कराया। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर टीम ने ट्रैप की योजना तैयार की। पूरी कार्रवाई को बेहद गोपनीय रखा गया ताकि आरोपी को भनक न लगे।
जाल बिछाकर की गई गिरफ्तारीपूर्व निर्धारित योजना के तहत परिवादी को रिश्वत की रकम लेकर आरोपी के घर, धौलपुर स्थित कायस्थ पाड़ा, भेजा गया। एसीबी की टीम पहले से ही आसपास तैनात थी और हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थी।
जैसे ही पटवारी ने परिवादी से 50 हजार रुपये की राशि स्वीकार की, टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। तलाशी के दौरान रिश्वत की पूरी रकम उसके कब्जे से बरामद कर ली गई। इसके बाद उसे विधिवत गिरफ्तार कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।
पहले भी हो चुका है ट्रैपइस मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि आरोपी पटवारी वीरेंद्र शर्मा पहले भी एसीबी की गिरफ्त में आ चुका है। वर्ष 2016 में सैपऊ तहसील में जमीन का म्यूटेशन खोलने के बदले रिश्वत लेने के आरोप में उसे ट्रैप किया गया था। उस समय भी एसीबी ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2016 का मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है। बावजूद इसके, आरोपी पर दोबारा रिश्वत मांगने और लेने का आरोप साबित होना सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
लगातार सख्ती का संदेशएसीबी की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में अब किसी भी स्तर पर ढील नहीं दी जाएगी। लगातार हो रही ट्रैप कार्रवाइयों से सरकारी कर्मचारियों में भी हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।