जोधपुर। मारवाड़ की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट बढ़ गई है, क्योंकि जोधपुर में प्रस्तावित बहुचर्चित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर श्रेय लेने की प्रतिस्पर्धा अब खुलकर सामने आ गई है। इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। दोनों नेताओं के बीच यह राजनीतिक टकराव अब परियोजना के विकास और स्वीकृति के योगदान को लेकर सीधा टकराव बनता दिख रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को जोधपुर दौरे के दौरान सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए एलिवेटेड रोड परियोजना पर अपनी सरकार के प्रयासों को विस्तार से रखा। उन्होंने दावा किया कि जब राज्य में उनकी सरकार इस परियोजना पर काम कर रही थी, तब सबसे बड़ी चुनौती इसके डिजाइन और तकनीकी स्वीकृति को लेकर सामने आ रही थी। गहलोत के अनुसार, इस परियोजना से जुड़ी तकनीकी अड़चनें मुख्य रूप से केंद्र सरकार की एजेंसियों और नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के इंजीनियरों के स्तर पर थीं, जिसके कारण काम आगे बढ़ने में देरी हो रही थी।
अशोक गहलोत ने कहा कि इस गतिरोध को दूर करने के लिए उन्होंने स्वयं पहल करते हुए तत्कालीन केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा था। उन्होंने बताया कि उन्होंने गडकरी से व्यक्तिगत हस्तक्षेप का अनुरोध किया ताकि परियोजना से जुड़ी तकनीकी बाधाएं दूर हो सकें और काम आगे बढ़ सके। पूर्व मुख्यमंत्री ने नितिन गडकरी की भूमिका की सराहना करते हुए कहा, “गडकरी जी एक सरल और सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने मेरे पत्र पर बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और परियोजना को आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग दिया।”
एलिवेटेड रोड के श्रेय को लेकर उठ रहे विवाद पर अशोक गहलोत ने केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास कार्य का श्रेय लेने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि जब कोई मंत्री किसी परियोजना से जुड़ा होता है तो उसका श्रेय लेना स्वाभाविक है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस नाम पर गलत या नकारात्मक राजनीति नहीं की जानी चाहिए। गहलोत ने कहा कि जोधपुर की जनता पूरी तरह जानती है कि किस स्तर पर और किस समय किसने इस परियोजना के लिए प्रयास किए थे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है, जो विकास कार्यों की भावना के विपरीत है। उनका कहना था कि परियोजना जैसे मुद्दों पर राजनीति की बजाय सहयोग और सकारात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है, ताकि शहर का विकास तेजी से हो सके।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी जोधपुर के सर्किट हाउस में एक बयान के दौरान अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि उनके कार्यकाल में जोधपुर अपेक्षित विकास से वंचित रहा। इसी बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई थी।
एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब जोधपुर की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन गया है। दोनों नेताओं के समर्थक भी इस मुद्दे पर सक्रिय नजर आ रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और अधिक बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल जोधपुर में इस परियोजना को लेकर विकास और श्रेय दोनों ही बहस के केंद्र में बने हुए हैं।