राजस्थान के जैसलमेर से जोधपुर जा रही एक प्राइवेट स्लीपर बस मंगलवार दोपहर भीषण आग की चपेट में आ गई। इस भयावह अग्निकांड में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। हादसा इतना भयानक था कि बस पूरी तरह जलकर राख में बदल गई। मृतकों के शव इस कदर झुलस चुके हैं कि उनकी पहचान अब केवल डीएनए जांच के जरिए ही की जा सकती है। इस दर्दनाक घटना ने पूरे राजस्थान को हिला कर रख दिया है।
डीएनए जांच के लिए जोधपुर पहुंचाए गए शवबुधवार सुबह तक, हादसे में मारे गए 19 शवों को जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल (MGH) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की मोर्चरी में लाया गया है। शवों को सीमा सुरक्षा बल (BSF) के वाहनों के जरिए विशेष सुरक्षा के साथ लाया गया। वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों ने सभी शवों को अलग-अलग रखवाकर डीएनए सैंपलिंग प्रक्रिया शुरू करवाई है।
मृतकों की पहचान के लिए विशेष व्यवस्था, प्रशासन ने की अपीलजैसलमेर और जोधपुर जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि जिनके परिजन हादसे के बाद लापता हैं, वे आगे आएं ताकि डीएनए सैंपल देकर पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा सके। इसके लिए जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल के कॉटेज नंबर 4 और 5 तथा जैसलमेर के जवाहर अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में विशेष व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने बताया कि प्रत्येक मृतक के दो करीबी परिजनों से डीएनए सैंपल लिए जाएंगे। प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए अजमेर और बीकानेर से विशेषज्ञ टीमों को भी बुलाया गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पहुंचे जोधपुर, घायलों से की मुलाकातहादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने तुरंत राहत और बचाव कार्यों के निर्देश दिए। देर रात वे चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर, राज्यमंत्री केके बिश्नोई और शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी के साथ विशेष विमान से जोधपुर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती 15 घायलों से मुलाकात की और उनके उपचार की जानकारी ली। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसी भी घायल को इलाज में किसी प्रकार की कमी न रहने पाए। हालांकि, एक घायल ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया।
“सिर्फ एक दरवाजे के कारण फंसे यात्री” – चिकित्सा मंत्री की टिप्पणीघटनास्थल का मुआयना करने के बाद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि आग इतनी तीव्र थी कि स्लीपर कोच में फंसे यात्री बाहर निकल भी नहीं सके। उन्होंने कहा, “बस में सिर्फ एक ही दरवाजा था, जबकि सेफ्टी मानकों के अनुसार दो आपात दरवाजे अनिवार्य होते हैं। इसी वजह से कई यात्री अंदर ही फंस गए।” उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान डीएनए जांच से होगी और यह भी जांच की जाएगी कि बस में सुरक्षा नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने जताया शोक, मुआवजे की घोषणाप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। PMO की ओर से जारी संदेश में कहा गया, “राजस्थान के जैसलमेर में हुए हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।” प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।
बसों में ज्वलनशील सामग्री की जांच शुरूइस भीषण दुर्घटना के बाद पुलिस प्रशासन भी सक्रिय हो गया है। जोधपुर में प्रवेश करने वाली सभी यात्री बसों की सघन जांच की जा रही है। पुलिस ड्यूटी ऑफिसर रामवतार ने बताया कि अब यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई बस चालक पेट्रोल, डीजल, पटाखे या अन्य ज्वलनशील सामग्री लेकर यात्रा न करे। साथ ही सभी बसों के इमरजेंसी गेट और सुरक्षा उपकरणों की भी जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न घटे।
“यह आरोपों का नहीं, सहारे का वक्त है” – विधायक रविंद्र सिंह भाटीशिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने भी अस्पताल में घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा, “यह समय किसी पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि दुखी परिवारों को सहारा देने का है।” भाटी ने अपील की कि जिन परिवारों के सदस्य अब तक लापता हैं, वे डीएनए सैंपल देकर पहचान की प्रक्रिया में सहयोग करें।