RUHS को खत्म कर RIMS की स्थापना, चिकित्सक बोले- नियम हमारे अधिकारों के खिलाफ

जयपुर। राजस्थान सरकार ने राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (आरयूएचएस) को समाप्त कर उसके स्थान पर राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) की स्थापना करने का फैसला किया है। इस प्रस्ताव को हाल ही में विधानसभा में पारित कर दिया गया है। सरकार का दावा है कि रिम्स के माध्यम से राज्य में सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार होगा और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।

लेकिन इस कदम का विरोध आरयूएचएस में कार्यरत चिकित्सकों ने किया है। आरयूएचएस मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ। प्रहलाद धाकड़ का कहना है कि रिम्स की स्थापना का स्वागत तो है, लेकिन इसके नियमों में उनके अधिकारों की अनदेखी की गई है। खासकर पिछले 12-13 वर्षों से काम कर रहे फैकल्टी को सीधे रिम्स में शामिल करने का स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

अधिकारों के साथ अन्याय


आरयूएचएस मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन का कहना है कि देश के प्रमुख शैक्षणिक एवं चिकित्सा संस्थानों जैसे AIIMS, IIT, IIM, PGIMER, KGMU लखनऊ, AMU अलीगढ़, JIPMER, NIT, IIS और केंद्रीय विश्वविद्यालय के अधिनियम में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान है कि यदि किसी मौजूदा संस्थान को अपग्रेड कर नए संस्थान में परिवर्तित किया जाता है, तो पूर्व संस्थान के सभी कर्मचारी अपनी सेवा शर्तों, वेतन और वरिष्ठता के साथ नए संस्थान में समायोजित किए जाएंगे।

यह प्रथा पूरे भारत में वर्षों से स्थापित है और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करती है। वहीं, प्रस्तावित RIMS अधिनियम में यह प्रावधान पूरी तरह उल्टा है। इसमें आरयूएचएस मेडिकल कॉलेज की संपत्ति (चल-अचल) को रिम्स में समाहित कर दिया गया है, जबकि कर्मचारियों को पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसका मतलब यह है कि वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारी, जो वर्तमान में RUHS संस्थान की सफलता और संचालन का आधार हैं, उन्हें नए संस्थान में शामिल नहीं किया जाएगा। यह कदम कर्मचारियों के अधिकारों के उल्लंघन वाला है।

इन सुविधाओं का दावा

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह का कहना है कि दिल्ली की तर्ज पर रिम्स में विश्वस्तरीय और सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी। इसकी स्थापना के लिए राज्य सरकार द्वारा समुचित बजट प्रावधान किया गया है। इससे प्रदेश में अति विशिष्ट चिकित्सा उपचार को नया आयाम मिलेगा और अगले 2 साल में तैयार हो जाएगा।

रिम्स में में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी, एंडोक्राइनोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, सीटीवीएस एवं ट्रांसप्लांट यूनिट जैसे सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएँ होगी तथा पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, जेरियाट्रिक मेडिसिन, रूमेटोलॉजी, रिप्रोडक्टिव बायोलॉजी, जेनेटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, स्लीप मेडिसिन, क्रिटिकल केयर जैसी अनेक नई सब-स्पेशियलिटी विभागों की भी स्थापना की जाएगी।

100 करोड़ रुपए का व्यय

रिम्स एक स्वायत्त संस्थान के रूप में कार्य करेगा, जिसकी एक समर्पित निधि होगी। राज्य सरकार द्वारा रिम्स के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए का व्यय किया जाना प्रस्तावित है। अन्य खर्चों के लिए प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है, जिसे आवश्यकतानुसार बढ़ाया जा सकेगा। रिम्स में मेडिकल, डेंटल और नर्सिंग कॉलेज, ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केन्द्रों और फिजियोथेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट जैसे स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे चिकित्सक निजी प्रैक्टिस के स्थान पर संस्थागत उत्कृष्टता पर ध्यान केंद्रित करेंगे।