धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व में खुशी का माहौल, बाघिन T-117 के शावक से बढ़ा कुनबा, बाघों की संख्या छह

धौलपुर–करौली टाइगर रिजर्व में एक बार फिर खुशखबरी ने वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों को उत्साहित कर दिया है। जंगल की खामोशी के बीच गूंजी शावक की किलकारी ने यह संकेत दे दिया है कि यहां का प्राकृतिक तंत्र सुरक्षित और संतुलित दिशा में आगे बढ़ रहा है। मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर बाघिन टी-117 ने एक शावक को जन्म दिया है। रिजर्व क्षेत्र में लगे कैमरा ट्रैप में बाघिन टी-117 अपने नवजात शावक के साथ जंगल में निर्भीक होकर विचरण करती नजर आई है।

जैसे ही बाघिन बादली टी-117 के साथ शावक की मौजूदगी की पुष्टि हुई, वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया। शावक की सुरक्षा को देखते हुए उसके मूवमेंट वाले इलाकों में अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में वनकर्मियों की विशेष टीमें तैनात की गई हैं, ताकि किसी भी तरह की बाधा या खतरे से नवजात शावक को सुरक्षित रखा जा सके।

धौलपुर–करौली टाइगर रिजर्व के डीएफओ डॉ. आशीष व्यास ने बताया कि बाघिन टी-117 इससे पहले भी शावकों को जन्म देकर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ा चुकी है। वर्तमान में उसके दो शावक पहले से मौजूद हैं, जिनकी पहचान DKT-2501 और DKT-2502 के रूप में की गई है। अब नए शावक के आने से रिजर्व में बाघों के कुनबे को और मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि रिजर्व क्षेत्र में बाघ पूरी तरह सुरक्षित माहौल में विचरण कर रहे हैं, जो वन विभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

डॉ. व्यास के अनुसार, यह सफलता धौलपुर–करौली टाइगर रिजर्व में उपलब्ध अनुकूल प्राकृतिक आवास, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, चौबीसों घंटे की निगरानी, कैमरा ट्रैप मॉनिटरिंग और फील्ड स्टाफ के निरंतर प्रयासों का नतीजा है। बाघों का लगातार सफल प्रजनन इस बात का प्रमाण है कि रिजर्व क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से धीरे-धीरे एक आदर्श क्षेत्र के रूप में उभर रहा है।

वन विभाग बाघिन और उसके शावक की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया गया है, ताकि किसी भी बाहरी हस्तक्षेप से वन्यजीवों को नुकसान न पहुंचे। यह वृद्धि न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश में बाघ संरक्षण से जुड़े प्रयासों के लिए एक सकारात्मक और उत्साहजनक संकेत मानी जा रही है।

बाघों की संख्या पहुंची छह

डीएफओ डॉ. आशीष व्यास ने बताया कि धौलपुर–करौली टाइगर रिजर्व वन्यजीवों के लिए बेहद सुरक्षित क्षेत्र माना जाता है। यहां का जंगल और प्राकृतिक वातावरण बाघों सहित अन्य वन्यजीवों के अनुकूल है। धौलपुर से करौली और सवाई माधोपुर तक बाघों की आवाजाही बनी रहती है, जो इस पूरे क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर बनाती है। नए शावक के जन्म के बाद रिजर्व में बाघों की कुल संख्या अब छह हो गई है। विभाग की टीमें कैमरों की मदद से नवजात शावक पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं, ताकि उसका विकास सुरक्षित और प्राकृतिक रूप से हो सके।