राजस्थान में आगामी त्योहारी सीजन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस की जवाबदेही तय करने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेश में हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं और कुछ पुलिसकर्मियों के कथित लापरवाहीपूर्ण एवं अमर्यादित व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस विभाग ने एक अधिकारी को निलंबित किया, छह अधिकारियों को पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा (एपीओ) और दो अधिकारियों को उनके पद से हटा दिया। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को आयोजित उच्चस्तरीय कानून-व्यवस्था समीक्षा बैठक में पुलिस महानिदेशक समेत वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अपराधों के प्रति किसी भी स्तर पर नरमी नहीं बरती जाए। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान है और अपराध में शामिल व्यक्ति के खिलाफ उसकी पहचान या स्थिति की परवाह किए बिना कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, आपराधिक घटनाओं को रोकने में लापरवाही बरतने वालों की जिम्मेदारी तय करने और उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने पर जोर दिया।
अपराध रोकने में लापरवाही पर तय होगी जवाबदेहीमुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान की पहचान शांतिप्रिय प्रदेश के रूप में रही है और सरकार इस छवि तथा नागरिकों के भरोसे को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की इस छवि पर प्रतिकूल असर पड़ा था, जबकि मौजूदा सरकार के दौरान इसे फिर से मजबूत करने की दिशा में काम हुआ है। ऐसे में अपराधों के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति पर सख्ती से अमल किया जाना जरूरी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन मामलों में लापरवाही अपराध को बढ़ावा दे सकती है, उनमें किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरती जाए। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था विकसित करने के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने पुलिस के कामकाज और हाल में सामने आए आपराधिक मामलों की गहन समीक्षा करने को कहा, ताकि कमियों की पहचान कर समय रहते सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें।
खनन और जमीन से जुड़े विवादों पर भी कार्रवाई के निर्देशकानून-व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने खनन और भूमि से संबंधित विवादों को गंभीरता से लेते हुए जिलेवार विस्तृत सूची तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन मामलों के निस्तारण के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए और उसके आधार पर कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री ने माफियाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने पर भी जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है और सरकार किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी। माफियाओं पर पूरी तरह शिकंजा कसने के साथ ऐसे मामलों की नियमित निगरानी करने और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश भी दिए गए।
त्योहारी सीजन में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर जोर
आगामी त्योहारों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को कानून-व्यवस्था के साथ यातायात प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि छोटी से छोटी घटना को भी नजरअंदाज न किया जाए और संबंधित पुलिस अधिकारी तत्काल संज्ञान लेकर जरूरी कदम उठाएं। उनका जोर इस बात पर रहा कि समय रहते कार्रवाई होने से किसी घटना को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों से अपने-अपने प्रभार वाले रेंज और जिलों में कानून-व्यवस्था की नियमित समीक्षा करने को कहा। इस व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं पर नजर रखना और जरूरत पड़ने पर समय रहते हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है।
महिला सुरक्षा के लिए कालिका पेट्रोलिंग यूनिट्स सक्रिय करने के निर्देश
महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कालिका पेट्रोलिंग यूनिट्स का सुचारू और व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करने के साथ स्कूलों और कॉलेजों में इन यूनिट्स के संवाद एवं संपर्क कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के मुताबिक, इन इकाइयों की सक्रियता और शैक्षणिक संस्थानों में उनके संवाद से महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों की रोकथाम के प्रयासों को प्रभावी बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि सुरक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें महिलाएं और अन्य नागरिक बिना भय के अपनी रोजमर्रा की गतिविधियां कर सकें।
पुलिस के व्यवहार से विभाग की छवि प्रभावित होती है: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुलिसकर्मियों के आचरण को विभाग की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए कहा कि कुछ घटनाओं या कर्मचारियों के अनुचित व्यवहार का असर पूरे पुलिस विभाग की छवि पर पड़ता है। पुलिस का मूल दायित्व अपराधियों में कानून का भय पैदा करना और आम लोगों के मन में सुरक्षा तथा विश्वास की भावना मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि पुलिस का व्यवहार ऐसा होना चाहिए कि हर नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करे। इसी उद्देश्य से आपराधिक घटनाओं और पुलिसकर्मियों के आचरण से जुड़े मामलों की गंभीरता से समीक्षा करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
समीक्षा बैठक के बाद किन पुलिस अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद पुलिस विभाग ने नौ अधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की। इनमें एक अधिकारी का निलंबन, छह अधिकारियों को एपीओ करना और दो अधिकारियों को तत्काल हटाना शामिल है। कार्रवाई के तहत वेर के थानाधिकारी धीरेन्द्र सिंह को निलंबित कर दिया गया। वहीं, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रेरणा शेखावत को पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है। इसके अलावा, वृत्ताधिकारी भुसावर नीरज भारद्वाज, उप पुलिस अधीक्षक (यातायात), अजमेर अंजू यादव, वृत्ताधिकारी सांभर मुकेश जोशी, वृत्ताधिकारी श्रीगंगानगर विष्णु कुमार खत्री और पुलिस निरीक्षक, आयुक्तालय जयपुर के मुकेश खराड़िया को एपीओ किया गया है। विभागीय कार्रवाई के तहत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसआईयूसीएडब्ल्यू, जयपुर ग्रामीण बृजमोहन मीणा और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, खैरथल जया सिंह को भी तत्काल उनके पद से हटा दिया गया है।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूदकानून-व्यवस्था की इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा और गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर ए. सावंत सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में अपराध नियंत्रण, पुलिसकर्मियों की जवाबदेही, माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई, महिला सुरक्षा और आगामी त्योहारी सीजन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़े मुद्दों पर निर्देश दिए गए।