'मस्जिदों के लाउडस्पीकर पर लगाम जरूरी, नहीं तो शहर खाली हो जाएगा' — बालमुकुंद आचार्य

हवामहल से भारतीय जनता पार्टी के विधायक बालमुकुंद आचार्य ने गुरुवार (29 जनवरी) को धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की तेज आवाज को लेकर सवाल उठाया था। शुक्रवार (30 जनवरी) को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने इस मुद्दे पर एक बार फिर अपनी बात दोहराई और कहा कि यह किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि आम नागरिकों की परेशानी से जुड़ा मामला है।

विधायक ने कहा कि उनकी विधानसभा क्षेत्र में कई मस्जिदें और मदरसे स्थित हैं और इससे उन्हें किसी तरह की आपत्ति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस शासनकाल में बड़ी संख्या में मस्जिदों का निर्माण हुआ, जिसे लेकर कभी विवाद नहीं रहा। हर धर्म की अपनी पूजा-पद्धति और परंपराएं होती हैं, जिनका सभी को सम्मान करना चाहिए। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि जो परंपरा पहले शुरू हुई थी, अब उस पर नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा।

हर मंजिल पर लगे कई-कई स्पीकर, रोज बढ़ रही आवाज

बालमुकुंद आचार्य ने आरोप लगाया कि मस्जिदों में लाउडस्पीकर की संख्या लगातार बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि अब हालात ऐसे हो गए हैं कि हर मंजिल पर 8 से 10 स्पीकर लगा दिए गए हैं और उनकी आवाज दिन-ब-दिन तेज होती जा रही है, जिससे आसपास रहने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

“भजन-कीर्तन 10 बजे बंद करवाते हैं, तो नियम सबके लिए समान हों”

बीजेपी विधायक ने कहा कि इलाके में रहने वाले बच्चे लगातार इस समस्या की शिकायत कर रहे हैं। उनका कहना है कि पढ़ाई और आराम में खलल पड़ रहा है। आचार्य ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि इस परेशानी का समाधान नहीं किया गया, तो लोग मजबूरी में शहर छोड़ने तक का फैसला कर सकते हैं।

उन्होंने साफ किया कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और हर प्रकार की पूजा-अर्चना के पक्ष में हैं। लेकिन उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब सत्संग, भजन या कीर्तन होते हैं, तो रात 10 बजे के बाद उन्हें बंद कराने के निर्देश दिए जाते हैं। हम खुद लोगों से कहते हैं कि नियमों का पालन करें। जब हम इन निर्देशों को मानने के लिए तैयार हैं, तो बाकी धार्मिक स्थलों पर भी वही नियम लागू होने चाहिए।

तेज आवाज से बच्चों और मरीजों को परेशानी — विधायक

बालमुकुंद आचार्य ने आगे कहा कि अत्यधिक तेज आवाज में लाउडस्पीकर चलने से न केवल बच्चों को, बल्कि माइग्रेन और अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को भी गंभीर परेशानी होती है। उन्होंने सनातन धर्म का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें रोजमर्रा के आधार पर इतनी ऊंची आवाज में लाउडस्पीकर लगाने की परंपरा नहीं है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी विशेष पर्व या आयोजन के दौरान सीमित समय के लिए ऐसा हो सकता है, लेकिन हर दिन ऐसा माहौल बनाना सही नहीं है। रोजाना तेज आवाज में धार्मिक गतिविधियां चलाना आम नागरिकों के जीवन पर सीधा असर डालता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।