राजस्थान में कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राजस्थान की भाजपा सरकार दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई है? गहलोत का कहना है कि प्रदेश के कर्मचारी और बुजुर्ग पेंशनर्स पिछले 10 महीने से पेंशन परिलाभ, ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (पीएफ) के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं, जबकि यह उनकी मेहनत की कमाई और वर्षों से जमा की गई पूंजी है।
10 महीने से भुगतान का इंतजार कर रहे कर्मचारी और पेंशनर्सअशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजस्थान में कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने बकाया पैसों के लिए लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। उनके मुताबिक, पेंशन परिलाभ, ग्रेच्युटी और पीएफ की राशि कर्मचारियों की अपनी कमाई है, जिसे उन्होंने भविष्य की जरूरतों के लिए जमा किया था। इसके बावजूद उन्हें अपनी ही रकम हासिल करने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
गहलोत ने इस बात पर जोर दिया कि कर्मचारियों के लिए यह जमा पूंजी केवल बचत नहीं, बल्कि परिवार की जरूरतों को पूरा करने का अहम साधन है। घर में शादी-ब्याह, त्योहार और दूसरे जरूरी अवसरों पर इसी पैसे की आवश्यकता होती है। ऐसे में लंबे समय तक भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों और उनके परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
बकाया भुगतान के विरोध में कर्मचारी महासंघ का प्रदर्शनपूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारियों को अपने बकाया भुगतान की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, इसी मुद्दे पर कर्मचारी महासंघ को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने की नौबत आई है। उन्होंने यह भी बताया कि त्योहार के मौके पर कर्मचारियों ने अब 'काली दिवाली' मनाने का ऐलान किया है।
गहलोत ने कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनर्स की स्थिति का उल्लेख करते हुए भाजपा सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि जिस सरकार के कर्मचारी और बुजुर्ग पेंशनर्स को अपने हक का पैसा पाने के लिए दिवाली पर सड़क पर उतरना पड़े, उसे शर्म आनी चाहिए। उनका आरोप है कि कर्मचारियों को उनकी मेहनत की कमाई के भुगतान के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
दिखावटी आयोजनों और प्रचार पर खर्च को लेकर भाजपा पर निशानाअशोक गहलोत ने राजस्थान सरकार के खर्चों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता की गाढ़ी कमाई को रोज नए दिखावटी आयोजनों और प्रचार पर खर्च कर रही है, लेकिन उसके पास अपने ही कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्थिति को लेकर जनता में आक्रोश है। उनके बयान का मुख्य मुद्दा यह है कि जब कर्मचारियों और पेंशनर्स को उनकी बकाया राशि नहीं मिल रही है, तो सरकार के खर्चों और प्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, सरकार की वास्तविक वित्तीय स्थिति के बारे में गहलोत ने अपने बयान में सवाल उठाते हुए जवाब सार्वजनिक करने की मांग की है।
सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांगअशोक गहलोत ने राजस्थान की भाजपा सरकार से प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को जनता के सामने प्रदेश की वास्तविक आर्थिक स्थिति रखनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कर्मचारियों के भुगतान में देरी क्यों हो रही है।
गहलोत ने सरकार से यह भी मांग की कि कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की बकाया राशि का भुगतान जल्द से जल्द किया जाए। उनके मुताबिक, पेंशन परिलाभ, ग्रेच्युटी और पीएफ कर्मचारियों की अपनी जमा पूंजी है और उन्हें इसके लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने बयान में एक बार फिर सवाल उठाया कि कहीं राजस्थान की भाजपा सरकार दिवालिया होने की कगार पर तो नहीं पहुंच गई है। उन्होंने वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने और कर्मचारियों के बकाया भुगतान को जल्द पूरा करने की मांग के जरिए राज्य सरकार को घेरा।