जोधपुर पुलिस कमिश्नर के तबादले पर सियासी संग्राम, अशोक गहलोत ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप; बोले- माफिया के दबाव में हुआ फैसला

जयपुर। जोधपुर पुलिस कमिश्नर के हालिया तबादले को लेकर राजस्थान की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। इस प्रशासनिक बदलाव पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार को निशाने पर लेते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में आरोप लगाया कि यह तबादला किसी प्रशासनिक जरूरत या नियमित प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि कथित तौर पर शराब माफिया के दबाव का परिणाम है। गहलोत ने कहा कि यदि ऐसे कारणों से अधिकारियों के तबादले किए जाते हैं, तो यह प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिए चिंताजनक संकेत है।

रात 8 बजे शराब बिक्री प्रतिबंध का किया जिक्र

अपने बयान में अशोक गहलोत ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की एक अहम नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने प्रदेश में अपराधों पर नियंत्रण, युवाओं को नशे की लत से बचाने और सामाजिक व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से रात 8 बजे के बाद शराब बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया था। उनके मुताबिक इस निर्णय के सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले थे और कई क्षेत्रों में इसका असर कानून-व्यवस्था पर भी पड़ा था।

गहलोत ने दावा किया कि जोधपुर में इसी नियम को सख्ती से लागू कराने वाले पुलिस कमिश्नर का कुछ ही महीनों के भीतर अचानक तबादला कर दिया गया। उन्होंने इस कदम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे कई तरह के सवाल खड़े होते हैं और सरकार की मंशा पर भी संदेह पैदा होता है।

'प्रशासन पर दबाव का संदेश जा रहा है'

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह के फैसलों से प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल के बीच गलत संदेश जाता है। उनका आरोप है कि यदि कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करने के बाद भी इस तरह के निर्णयों का सामना करेंगे, तो इससे अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की पुलिस और प्रशासन में यह धारणा बन सकती है कि वर्तमान व्यवस्था में निष्पक्ष तरीके से काम करने वाले अधिकारियों को पर्याप्त संरक्षण नहीं मिल रहा है। गहलोत के अनुसार, ऐसी परिस्थितियां प्रशासनिक स्वतंत्रता पर भी असर डाल सकती हैं।
शराब माफिया को लेकर सरकार पर साधा निशाना

अशोक गहलोत ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि इस तबादले से शराब माफिया का मनोबल बढ़ेगा। उनका कहना है कि यदि नियमों को सख्ती से लागू करने वाले अधिकारियों को हटाया जाता है, तो इससे अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के बीच यह संदेश जाएगा कि वे सरकारी आदेशों की अनदेखी कर सकते हैं और उन पर प्रभाव डालने की क्षमता रखते हैं।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से रात 8 बजे शराब बिक्री बंद करने जैसे नियमों के पालन को लेकर सरकार की गंभीरता पर भी अब सवाल उठ रहे हैं। उनके मुताबिक इस तरह की कार्रवाई से कानून का पालन कराने वाले अधिकारियों की स्थिति कमजोर होती है।

सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

अपने बयान के अंत में पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रशासनिक फैसले जनता के हित में लिए जा रहे हैं या फिर किसी विशेष दबाव में। उन्होंने पूछा कि क्या अब प्रदेश में निर्णय आम लोगों की सुरक्षा और हितों को ध्यान में रखकर होंगे या फिर माफिया के प्रभाव और उनके आर्थिक हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को ही जोधपुर के नए पुलिस कमिश्नर अंशुमन भोमिया ने अपना कार्यभार संभाला है। उनके पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद अशोक गहलोत का यह बयान सामने आने से इस प्रशासनिक फेरबदल को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।