‘विपक्ष मुक्त भारत चाहती है सरकार’, गहलोत का भाजपा पर हमला- निकाय चुनाव में हुई ऐसी गुंडागर्दी कभी नहीं देखी

राजस्थान में पंचायत चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल में हुए नगर निकाय चुनावों के दौरान पुलिस और प्रशासन का जिस तरह इस्तेमाल किया गया, वैसी स्थिति राजस्थान में पहले देखने को नहीं मिली। गहलोत ने दावा किया कि इस अनुभव को लेकर लोगों में नाराजगी है और इसका असर पंचायत चुनाव में दिखाई दे सकता है।

गहलोत ने पंचायत चुनाव को लेकर कांग्रेस की तैयारियों का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी के कार्यकर्ता गांवों से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर तक सक्रिय हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस भाजपा सरकार की कथित मनमानी का राजनीतिक तरीके से मुकाबला करेगी। उन्होंने दावा किया कि पिछले ढाई साल में कांग्रेस ने जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने और सरकार की नीतियों का विरोध करने में लगातार काम किया है।

पंचायत चुनाव में असर पड़ने का गहलोत का दावा

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निकाय चुनाव के दौरान लोगों को जो अनुभव हुआ, उसका प्रभाव पंचायत चुनाव में देखने को मिल सकता है। उन्होंने दावा किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस का संगठन मजबूत है और पार्टी पंचायत चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की स्थिति में है।

गहलोत ने भाजपा सरकार पर विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग राजनीतिक दलों का चुनाव जीतना स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन यदि सत्ता पक्ष यह चाहता है कि विपक्ष कहीं भी जीत हासिल न करे, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुकूल नहीं है।

बंद की गई योजनाओं को लेकर सरकार पर सवाल

गहलोत ने कांग्रेस सरकार के समय शुरू की गई जनकल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं को गांव-गांव में लोगों का समर्थन मिला था और गरीबों, दलितों तथा पिछड़े वर्गों को इनका लाभ मिल रहा था।

उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा सरकार ने केवल योजनाओं के नाम बदलने तक खुद को सीमित क्यों नहीं रखा और कई योजनाओं को बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी। गहलोत के मुताबिक, इन फैसलों को लेकर आम लोगों में नाराजगी है और चुनाव के दौरान इसका असर सामने आ सकता है।

किसानों को लेकर मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर भी निशाना

गहलोत ने किसानों के साल में केवल 20-25 दिन काम करने से जुड़ी कथित टिप्पणी को लेकर भी मुख्यमंत्री पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसानों और ग्रामीणों को इस तरह की बात अपमानजनक लग सकती है। गहलोत का दावा है कि ग्रामीण मतदाता पंचायत चुनाव में इस मुद्दे का जवाब दे सकते हैं।
पंचायत चुनाव के चार चरणों पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ की चर्चा और पंचायत चुनावों को चार चरणों में कराए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नगर निकाय और पंचायत चुनाव की परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। गहलोत ने माना कि चुनाव आयोग ने चरणों को लेकर सोच-समझकर फैसला किया होगा, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अगर इसके पीछे सरकार को राजनीतिक लाभ पहुंचाने की मंशा है तो वह बात सामने आ जाएगी।

उन्होंने पंचायत समिति और जिला परिषद के निर्वाचित सदस्यों को अपने पक्ष में करने या उनके अपहरण की आशंका भी जताई। गहलोत ने कहा कि चुनाव जीतने के बाद अलग-अलग दलों के सदस्यों का होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया को लेकर इस तरह की आशंकाएं चिंता का विषय हैं।

पुलिस-प्रशासन और अधिकारियों की सूची का भी जिक्र

गहलोत ने पुलिस और प्रशासन के कथित इस्तेमाल को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आईपीएस अधिकारियों की हालिया सूची का उल्लेख करते हुए भी सरकार पर निशाना साधा। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में उन्होंने जिन अधिकारियों या तबादलों का जिक्र किया, उनका विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

गहलोत ने कहा कि सत्ताधारी दल को विपक्ष की ओर से की जाने वाली आलोचना को दुश्मनी के तौर पर नहीं लेना चाहिए। उनके मुताबिक, विपक्ष की ओर से दिए जाने वाले सुझावों को सकारात्मक तरीके से देखना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहतर है।

‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर राहुल गांधी का समर्थन

पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से चुनाव आयोग को लेकर उठाए गए ‘वोट चोरी’ के मुद्दे का भी समर्थन किया। गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ने करीब एक साल पहले इस विषय पर सवाल उठाए थे और बाद के घटनाक्रम ने इन सवालों को फिर चर्चा में ला दिया।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के अन्य सदस्यों को लेकर भी आरोप लगाए। गहलोत ने नोटबंदी और कोरोना महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने उस समय भी कुछ मुद्दे उठाए थे और समय रहते ऐसी चेतावनियों पर ध्यान दिया जाता तो देश को फायदा हो सकता था।

युवाओं में असंतोष बढ़ने का गहलोत का दावा

गहलोत ने प्रदेश में भाजपा सरकार के प्रति असंतोष बढ़ने का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि युवा अपनी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस जिन मुद्दों को लगातार उठा रही है, उनमें जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े फैसले, ग्रामीणों की नाराजगी और सरकार की कार्यप्रणाली शामिल हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि इन मुद्दों और कांग्रेस के लगातार किए जा रहे संघर्ष का असर पंचायत चुनाव में दिखाई देगा।