जोधपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जोधपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान राज्य की भाजपा सरकार पर कई मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने बाड़मेर रिफाइनरी परियोजना, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की कार्यशैली, प्रशासनिक हस्तक्षेप और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित राजस्थान दौरे से पहले गहलोत ने राज्य सरकार को रिफाइनरी परियोजना की व्यवस्थाओं को लेकर सतर्क रहने की सलाह भी दी।
गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से तैयारियों की निगरानी करनी चाहिए। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री को कम से कम तीन-चार दिन पहले और मुख्य सचिव को दो दिन पहले परियोजना स्थल पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक चूक न हो।
रिफाइनरी परियोजना पर बरती जाए पूरी सावधानीपूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल औपचारिक तैयारियों से काम नहीं चलेगा। उन्होंने सुझाव दिया कि परियोजना स्थल पर लगातार दो से तीन दिन तक ट्रायल रन कराए जाएं, ताकि यदि कोई तकनीकी खामी हो तो उसे समय रहते दूर किया जा सके।
उन्होंने पिछली घटना का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के एक पूर्व दौरे से पहले रिफाइनरी परिसर में आग लगने की घटना हुई थी, जिसने राज्य की छवि को नुकसान पहुंचाया था। गहलोत ने कहा कि सरकार को इस बार ऐसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए।
37 हजार करोड़ की परियोजना 80 हजार करोड़ तक कैसे पहुंची?बाड़मेर रिफाइनरी परियोजना की पृष्ठभूमि पर बात करते हुए गहलोत ने भाजपा पर विकास कार्यों में देरी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार के समय मंजूरी मिली थी।
उन्होंने बताया कि तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली के सहयोग से इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति मिली थी। गहलोत के अनुसार, उस समय इसकी अनुमानित लागत लगभग 37 हजार करोड़ रुपये थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बनने के बाद परियोजना को वर्षों तक आगे नहीं बढ़ाया गया। इसी देरी के कारण इसकी लागत बढ़कर लगभग 80 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री राजस्थान आएं तो जनता को यह भी बताया जाना चाहिए कि परियोजना में हुई देरी और लागत में आई भारी वृद्धि के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।
एसीबी की निष्पक्षता पर उठाए सवालअशोक गहलोत ने राज्य की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान समय में एसीबी स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर रही है और उस पर राजनीतिक दबाव हावी है।
गहलोत ने कहा कि कई मामलों में जांच अधिकारी यह राय देते हैं कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं या मामला नहीं बनता, लेकिन इसके बावजूद उच्च स्तर से गिरफ्तारी के निर्देश दिए जाते हैं। उनके मुताबिक, यह स्थिति कानून के शासन और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नए पुलिस महानिदेशक के कार्यभार संभालने के बाद हालात और खराब हुए हैं। गहलोत का कहना था कि जांच अधिकारियों की राय को नजरअंदाज कर राजनीतिक प्रभाव के तहत कार्रवाई करवाई जा रही है।
महेश जोशी के मामले का भी किया उल्लेखअपने आरोपों को स्पष्ट करने के लिए गहलोत ने कांग्रेस नेता महेश जोशी का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे कई मामलों में जांच अधिकारियों की असहमति के बावजूद गिरफ्तारी की गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि महेश जोशी पहले से ही एक अन्य मामले में गिरफ्तार थे, इसके बावजूद उन्हें दोबारा गिरफ्तार किया गया। उन्होंने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का मजाक बनाने जैसा है।
गहलोत ने दावा किया कि तीन बार मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्होंने कभी एसीबी के कामकाज में इस प्रकार का हस्तक्षेप नहीं देखा। उनके अनुसार, जांच एजेंसियों को राजनीतिक दबाव से मुक्त रहकर कार्य करना चाहिए।
सरकार नहीं, पर्दे के पीछे कोई और चला रहा है व्यवस्थामुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए गहलोत ने कहा कि राज्य की सत्ता का संचालन वास्तविक रूप से कहीं और से हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण फैसलों पर सरकार स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले पा रही है।
उन्होंने कहा कि जब भी आरएसएस की ओर से दबाव आता है, सरकार उसके आगे झुक जाती है। गहलोत ने दावा किया कि वर्तमान सरकार केवल एक मुखौटा बनकर रह गई है और असली निर्णय लेने की प्रक्रिया पर किसी अन्य शक्ति का प्रभाव है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य में होने वाले ट्रांसफर, पोस्टिंग और अन्य प्रशासनिक फैसलों के पीछे भी बाहरी प्रभाव काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के लिए उचित संकेत नहीं है।
भाजपा सरकार पर विकास और प्रशासन को लेकर सवालगहलोत ने कहा कि राज्य में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जनता जवाब चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी उपलब्धियों का प्रचार तो कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां अब भी मौजूद हैं।
उनके अनुसार, प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के बजाय राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जनता इन सभी बातों को देख रही है और समय आने पर अपना फैसला सुनाएगी।
राजस्थान की जनता सब समझ रही हैअपने बयान के अंत में अशोक गहलोत ने दावा किया कि राजस्थान की जनता राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर पूरी तरह जागरूक है। उन्होंने कहा कि केवल नेतृत्व परिवर्तन से हालात नहीं बदलेंगे और जनता सरकार के प्रदर्शन के आधार पर निर्णय करेगी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि अगले विधानसभा चुनाव में प्रदेश की जनता बदलाव का फैसला लेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा चाहे संगठनात्मक या नेतृत्व स्तर पर कोई भी बदलाव कर ले, लेकिन जनता के मुद्दों का समाधान किए बिना राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला है।