पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार को पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता सुंदर शाम अरोड़ा से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। दी गई जानकारी के मुताबिक, ईडी की जालंधर टीम ने एक साथ 16 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। मोहाली, चंडीगढ़, होशियारपुर, जालंधर और लुधियाना में यह कार्रवाई की गई। जांच टीम ने अरोड़ा के आवास पर भी दबिश दी है। उनके सहयोगियों से जुड़े परिसरों की भी तलाशी ली जा रही है। इस कार्रवाई का संबंध मोहाली में जमीन की खरीद-फरोख्त और उससे जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन की जांच से बताया जा रहा है। हालांकि, 2 नवंबर की कार्रवाई के संबंध में जांच एजेंसियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए छापेमारी के सभी ठिकानों और उसके सटीक आधार की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। सोमवार सुबह होशियारपुर में अरोड़ा के आवास पर केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की खबर भी सामने आई।
पांच करोड़ रुपये की कथित रिश्वत का मामलासुंदर शाम अरोड़ा के खिलाफ जांच में मोहाली की करीब 25 एकड़ जमीन की डील का मामला भी शामिल बताया गया है। आरोप है कि इस जमीन के सौदे और उसके लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) हासिल करने के बदले पांच करोड़ रुपये की रिश्वत ली गई थी। जांच का एक अहम पहलू यह है कि जमीन के सौदे से जुड़े भुगतान और बाद में हुए वित्तीय लेनदेन के बीच क्या संबंध रहा। जांच में गुलमोहर टाउनशिप की ओर से जमीन का एग्रीमेंट होने से पहले ही 27.5 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने की बात सामने आई है। इस जमीन के लिए NOC 17 नवंबर 2020 को जारी की गई थी। जांच में सुंदर शाम अरोड़ा के बेटे प्रतीक अरोड़ा की एक रियल एस्टेट कंपनी में 35 प्रतिशत हिस्सेदारी होने का पहलू भी शामिल बताया गया है।
Marbella Grand प्रोजेक्ट में रकम लगाने का आरोपजांच से जुड़े आरोपों के मुताबिक, कथित रिश्वत की रकम को Marbella Grand प्रोजेक्ट में निवेश किया गया था। इसके अलावा जमीन की खरीद से संबंधित लेनदेन में संजीव जुनेजा के करोड़ों रुपये ट्रांसफर होने की बात भी जांच में सामने आने का दावा किया गया है। ईडी की तलाशी का एक अहम उद्देश्य इन वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को समझना और यह पता लगाना हो सकता है कि जमीन की खरीद, NOC जारी होने और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में निवेश के बीच किस तरह का संबंध रहा। हालांकि, इन आरोपों पर एजेंसी की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान या तलाशी में मिली सामग्री का ब्योरा सामने आने के बाद ही स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। फिलहाल इन आरोपों को जांच का हिस्सा माना जाना चाहिए, न कि साबित हो चुके अपराध के रूप में।
50 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए 2022 में हुई थी गिरफ्तारी
सुंदर शाम अरोड़ा इससे पहले भी रिश्वत के एक मामले में गिरफ्तार हो चुके हैं। 15 अक्टूबर 2022 को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उन्हें कथित तौर पर 50 लाख रुपये की रिश्वत देते हुए गिरफ्तार किया था। उस मामले में आरोप था कि उन्होंने अपने खिलाफ चल रही जांच में राहत पाने के लिए विजिलेंस के एक अधिकारी को एक करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी। विजिलेंस के तत्कालीन अधिकारियों के मुताबिक, 50 लाख रुपये पहली किस्त के तौर पर दिए जाने थे और बाकी रकम बाद में देने की बात थी।
उस मामले की जांच में अरोड़ा से जुड़ी 30 एकड़ जमीन, एक अस्पताल में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी और लग्जरी गाड़ियों से संबंधित पहलुओं का भी उल्लेख हुआ था। अब मौजूदा ईडी कार्रवाई में जमीन के सौदों, संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच की जानकारी दी गई है। हालांकि, 2022 के विजिलेंस मामले और मौजूदा छापेमारी को एक ही जांच मानने से पहले दोनों की आधिकारिक केस डिटेल और आपसी संबंध स्पष्ट होना जरूरी है।
रिश्वत मामले में हाईकोर्ट का जुलाई 2026 का आदेश
सुंदर शाम अरोड़ा से जुड़े 50 लाख रुपये के पुराने रिश्वत मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 1 जुलाई 2026 को नए सिरे से जांच कराने की मांग वाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि केवल इस आधार पर दोबारा जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता कि जांच शिकायतकर्ता के अधीनस्थ अधिकारी ने की थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसके आदेश में की गई टिप्पणियों का लंबित ट्रायल पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस तरह सुंदर शाम अरोड़ा से जुड़े पुराने विजिलेंस मामले और जमीन सौदों से संबंधित मौजूदा जांच के बीच कई वित्तीय और संपत्ति संबंधी पहलू चर्चा में हैं। सोमवार को हुई छापेमारी के बाद अब जांच एजेंसियों की आधिकारिक जानकारी और तलाशी के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी।