पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) को लगातार तीसरा बड़ा झटका लगा है। अमृतसर नॉर्थ से विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां को भेजा है। सोमवार, 2 नवंबर को उन्होंने फेसबुक पर इस्तीफे की प्रति साझा करते हुए इसकी जानकारी दी। उनके पत्र में इस्तीफा 1 नवंबर 2026 से प्रभावी करने की बात लिखी गई है। कुंवर विजय प्रताप सिंह ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने पंजाब विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में उन्होंने सदन की सदस्यता छोड़ने का फैसला दर्ज कराया है। इस्तीफा भेजने के माध्यम को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, पत्र ईमेल, व्हाट्सऐप और डाक के जरिए अध्यक्ष तक पहुंचाया गया। हालांकि, इस्तीफे के पत्र में उन्होंने अपने फैसले के पीछे किसी खास राजनीतिक या व्यक्तिगत कारण का उल्लेख नहीं किया है।
दो विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद तीसरा इस्तीफा
कुंवर विजय प्रताप सिंह का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब इससे पहले रविवार, 1 नवंबर को आम आदमी पार्टी के दो विधायकों ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का ऐलान किया था। इनमें समाना से विधायक चेतन सिंह जौड़ामाजरा और सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा शामिल हैं। दोनों ने पार्टी से इस्तीफा दिया है। उनके इस फैसले के बाद अब कुंवर विजय प्रताप सिंह ने विधानसभा की सदस्यता भी छोड़ दी है।
इन घटनाक्रमों के बीच एक अंतर समझना जरूरी है। चेतन सिंह जौड़ामाजरा और हरमीत सिंह पठानमाजरा ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया था, जबकि कुंवर विजय प्रताप सिंह ने विधानसभा की सदस्यता छोड़ने का पत्र भेजा है। तीनों घटनाएं लगातार दो दिनों में हुई हैं। यह घटनाक्रम पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सामने आया है। आम आदमी पार्टी ने हाल ही में चुनाव के लिए 40 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी।
पांच साल के लिए पार्टी से निलंबित किए गए थे कुंवर विजय प्रताप
कुंवर विजय प्रताप सिंह को जून 2025 में आम आदमी पार्टी ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में पांच साल के लिए निलंबित कर दिया था। यह कार्रवाई शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ पंजाब विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई को लेकर उनकी सार्वजनिक टिप्पणियों के बाद हुई थी। मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने 25 जून 2025 को गिरफ्तार किया था। कुंवर विजय प्रताप सिंह ने इस कार्रवाई और गिरफ्तारी के तरीके पर सवाल उठाए थे। इसके बाद पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति ने उन्हें निलंबित करने का फैसला लिया था।
बेअदबी और पुलिस फायरिंग मामलों की जांच से जुड़े रहे हैंकुंवर विजय प्रताप सिंह पंजाब पुलिस में आईपीएस अधिकारी रह चुके हैं। वह 2015 के बेअदबी मामलों और उसके बाद कोटकपूरा तथा बहिबल कलां में हुई पुलिस फायरिंग की जांच करने वाली विशेष जांच टीम (SIT) का हिस्सा थे। इन मामलों में जांच की प्रगति और न्याय मिलने में देरी को लेकर वह कई बार अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके थे। आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद भी उन्होंने इन मामलों को विधानसभा में उठाया। उनका कहना रहा कि बेअदबी और पुलिस फायरिंग से जुड़े मामलों में न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़नी चाहिए। इन मुद्दों पर सरकार के कामकाज को लेकर उनकी आलोचना पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों का एक प्रमुख कारण रही।
भगवंत मान सरकार की कार्यशैली पर भी उठाते रहे सवाल
कुंवर विजय प्रताप सिंह कई मौकों पर मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। 2015 के बेअदबी और पुलिस फायरिंग मामलों के अलावा उन्होंने अमृतसर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद भी सरकार की आलोचना की थी। उनके बयानों में कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई पर सवाल उठाने के बाद पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके बावजूद वह सार्वजनिक रूप से सरकार और उसके फैसलों पर अपनी राय रखते रहे।
2021 में IPS सेवा छोड़कर राजनीति में आए थे
कुंवर विजय प्रताप सिंह ने वर्ष 2021 में पुलिस सेवा से समय से पहले सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में कदम रखा था। इसके बाद वह आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें अमृतसर नॉर्थ सीट से उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। अब विधानसभा की सदस्यता से उनके इस्तीफे के बाद पंजाब की राजनीति में एक और घटनाक्रम जुड़ गया है। उनका इस्तीफा पत्र 1 नवंबर 2026 से प्रभावी करने की बात कहता है, जबकि इसकी सार्वजनिक जानकारी उन्होंने 2 नवंबर को साझा की।